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RSS: अनेकता में एकता भारत की सांस्कृतिक विरासत, संविधान भी दिखाता है यही राह- मोहन भागवत
Tue, 22 Apr 2025 09:49 PM IST
पवन पांडेय
डिजिटल ब्यूरो, अमर उजाला, नई दिल्ली
डिजिटल ब्यूरो, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: पवन पांडेय
Updated Tue, 22 Apr 2025 09:49 PM IST
सार
देश की राजधानी दिल्ली में एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत ने कहा कि- संगठन को न तो बहुत दिखावटी होना चाहिए और न ही इतना गरीब कि वह अपने काम भी ठीक से न कर सके। उन्होंने संतुलन की जरूरत पर जोर दिया और कहा कि यह संतुलन तभी आता है जब कार्यकर्ता जागरूक और समर्पित हों।
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मोहन भागवत, आरएसएस प्रमुख
- फोटो : ANI
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विस्तार
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के प्रमुख मोहन भागवत ने मंगलवार को एक चेतावनी भरे स्वर में कहा कि अगर किसी संगठन की अनदेखी की जाए, तो उसका चरित्र और दिशा बदल सकती है। वह दिल्ली में अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (एबीवीपी) के नए कार्यालय भवन के उद्घाटन कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे। इस कार्यक्रम में कई वरिष्ठ केंद्रीय मंत्री और भारतीय जनता पार्टी के नेता भी मौजूद थे।
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'अनेकता में एकता भारत की प्राचीन सांस्कृतिक विरासत'
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) प्रमुख मोहन भागवत ने कहा है कि अनेकता में एकता भारत की प्राचीन सांस्कृतिक विरासत है। यह हमारे देश के लिए कोई नया आयाम नहीं है। भारत पुरातन काल से ही विश्व बंधुत्व को अपना आदर्श मानकर देश-विदेश में रहने वाले विपरीत विचारधारा के लोगों को भी अपने साथ लेकर चलता रहा है। उन्होंने कहा कि यही बात हमारा संविधान भी हमें सिखाता है, लिहाजा सबको साथ लेकर चलने का प्रयास करना चाहिए।
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दुनिया में भी बहुत परिवर्तन हो रहे हैं- भागवत
संघ प्रमुख ने कहा कि भारत इस समय नई सफलता के काल में चल रहा है। दुनिया में भी बहुत परिवर्तन हो रहे हैं। दुनिया ने कई राह पर चलते हुए उसमें असफलता पाई। अब उसे भी संपूर्ण विकास के लिए भारत और उसकी संस्कृति में ही राह दिखाई दे रही है। उन्होंने कहा कि युवाओं को आगे बढ़कर इस अवसर को अपनाना चाहिए और देश को नई सफलता की राह पर आगे बढ़ाने के कार्य में अपना योगदान देना चाहिए।
संघ की छात्र इकाई मानी जाने वाली अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ABVP) के दिल्ली में कार्यालय 'यशवंत' का उद्घाटन करते हुए मोहन भागवत ने कहा कि भारत के संविधान में एकता का आदर्श विद्यमान है। इसका आशय है कि पूरे देश में विभिन्न धर्म-संस्कृतियों विचारधाराओं को मानते हुए सबको साथ लेते हुए आगे बढ़ना चाहिए।
यह भी पढ़ें - Railways: वंदे भारत के पहले डिब्बे में सामने आई ये बड़ी कमियां, कांग्रेस ने इस रिपोर्ट के जरिए किया खुलासा
अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (अभाविप) के प्रकल्प 'SEIL– Students' Experience in Interstate Living' (अंतर-राज्य छात्र जीवन-दर्शन) के केंद्रीय कार्यालय 'यशवंत' का उद्घाटन अवसर पर संघ, भाजपा, केंद्र-दिल्ली सरकार के कई गणमान्य लोग उपस्थित रहे। पूर्व उपराष्ट्रपति वेंकैया नायडू, पूर्व केंद्रीय मंत्री एवं भाजपा के वरिष्ठ नेता डॉ. मुरली मनोहर जोशी, दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के अधिकारी मुकुंद सीआर, डॉ. कृष्ण गोपाल, अरुण कुमार और संघ के अखिल भारतीय प्रचार प्रमुख सुनील आंबेकर भी इस अवसर पर उपस्थित रहे।
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'अनेकता में एकता भारत की प्राचीन सांस्कृतिक विरासत'
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) प्रमुख मोहन भागवत ने कहा है कि अनेकता में एकता भारत की प्राचीन सांस्कृतिक विरासत है। यह हमारे देश के लिए कोई नया आयाम नहीं है। भारत पुरातन काल से ही विश्व बंधुत्व को अपना आदर्श मानकर देश-विदेश में रहने वाले विपरीत विचारधारा के लोगों को भी अपने साथ लेकर चलता रहा है। उन्होंने कहा कि यही बात हमारा संविधान भी हमें सिखाता है, लिहाजा सबको साथ लेकर चलने का प्रयास करना चाहिए।
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दुनिया में भी बहुत परिवर्तन हो रहे हैं- भागवत
संघ प्रमुख ने कहा कि भारत इस समय नई सफलता के काल में चल रहा है। दुनिया में भी बहुत परिवर्तन हो रहे हैं। दुनिया ने कई राह पर चलते हुए उसमें असफलता पाई। अब उसे भी संपूर्ण विकास के लिए भारत और उसकी संस्कृति में ही राह दिखाई दे रही है। उन्होंने कहा कि युवाओं को आगे बढ़कर इस अवसर को अपनाना चाहिए और देश को नई सफलता की राह पर आगे बढ़ाने के कार्य में अपना योगदान देना चाहिए।
संघ की छात्र इकाई मानी जाने वाली अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ABVP) के दिल्ली में कार्यालय 'यशवंत' का उद्घाटन करते हुए मोहन भागवत ने कहा कि भारत के संविधान में एकता का आदर्श विद्यमान है। इसका आशय है कि पूरे देश में विभिन्न धर्म-संस्कृतियों विचारधाराओं को मानते हुए सबको साथ लेते हुए आगे बढ़ना चाहिए।
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अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (अभाविप) के प्रकल्प 'SEIL– Students' Experience in Interstate Living' (अंतर-राज्य छात्र जीवन-दर्शन) के केंद्रीय कार्यालय 'यशवंत' का उद्घाटन अवसर पर संघ, भाजपा, केंद्र-दिल्ली सरकार के कई गणमान्य लोग उपस्थित रहे। पूर्व उपराष्ट्रपति वेंकैया नायडू, पूर्व केंद्रीय मंत्री एवं भाजपा के वरिष्ठ नेता डॉ. मुरली मनोहर जोशी, दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के अधिकारी मुकुंद सीआर, डॉ. कृष्ण गोपाल, अरुण कुमार और संघ के अखिल भारतीय प्रचार प्रमुख सुनील आंबेकर भी इस अवसर पर उपस्थित रहे।
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