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'मोदी बनाम ऑल' का चुनाव हुआ तो भाजपा को होगी मुश्किल! क्या कहते हैं आंकड़े

Mon, 21 Jan 2019 04:00 PM IST
Amit Sharma अमित शर्मा, नई दिल्ली
अमित शर्मा, नई दिल्ली Published by: Amit Sharma Updated Mon, 21 Jan 2019 04:00 PM IST
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If election narendra modi vs all parties, BJP will be difficult to win

अगले लोकसभा चुनाव को विपक्ष 'भाजपा बनाम बाकी सब' बनाने की रणनीति पर काम कर रहा है। भाजपा चाहते या न चाहते हुए भी, इस परिस्थिति के लिए खुद को तैयार करने की कोशिश में जुट गई है। पार्टी अध्यक्ष अमित शाह ने इसे भाजपा की सफलता बताने की कोशिश की है और कहा है कि चुनाव कभी 'कांग्रेस बनाम बाकी सब' हुआ करता था। आज 'भाजपा बनाम बाकी सब' का हो गया है। यह भाजपा और उसके कार्यकर्ताओं की जीत है। उन्होंने अपने कार्यकर्ताओं से अभी से हर बूथ पर 'पचास प्लस' वोट पाने का टार्गेट तय किया है। लेकिन क्या यह भाजपा के लिए इतना आसान होगा? अगर मध्यप्रदेश के चुनाव परिणाम में निकले वोटों का आकलन करें तो यह रास्ता उसके लिए आसान नहीं दिखता। 

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एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफार्म्स (एडीआर) की एक रिपोर्ट में दावा किया गया है कि पचास फीसदी से अधिक मतों के अंतर से जीत हासिल करने वाले उम्मीदवारों की संख्या बहुत कम रही है। ज्यादातर उम्मीदवारों ने औसतन 35.3 फीसदी वोट पाकर ही अपनी जीत सुनिश्चित की है। यानी भाजपा को अपने वोट फीसद में भारी इजाफा करना पड़ेगा जो उसके लिए आज की स्थिति में आसान नहीं दिखता। 
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50 फीसदी से अधिक वोट पाने में करोड़पति-दागी आगे

एडीआर की रिपोर्ट के मुताबिक भाजपा के 109 जीते विधायकों में से 71 ने, और कांग्रेस के 114 जीते विधायकों में से 69 ने पचास फीसदी से कम मतों से जीत दर्ज की है। इसमें भी 187 करोड़पति उम्मीदवारों में से 74 ऐसे रहे जिन्होंने पचास फीसदी से अधिक मतों के साथ जीत हासिल करने में कामयाबी पाई है। इसी तरह 94 अपराधी उम्मीदवारों में से भी 42 उम्मीदवार ऐसे रहे जिन्होंने पचास फीसदी से अधिक मतों के साथ जीत हासिल की है। यानी पचास फीसदी से अधिक वोट हासिल करने के मामले में करोड़पति और दागी उम्मीदवारों ने बाजी मारी है।
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इसी के साथ यह जान लेना भी ठीक होगा कि सिर्फ एक हजार या उससे कम वोटों के अंतर से जीत हासिल करने वालों की संख्या भी कम नहीं है। कांग्रेस के सात और भाजपा के तीन उम्मीदवारों ने हजार वोटों से भी कम के अंतर से जीत हासिल की है। 

मध्यप्रदेश में इस बार नोटा के वोटों की खूब चर्चा हुई। लगभग ग्यारह सीटें ऐसी रहीं जहां भाजपा उम्मीदवारों को नोटा में पड़े वोटों से कम वोटों से हार का सामना करना पड़ा। नोटा को पूरे राज्य में आश्चर्यजनक रुप से 5,42,295 वोट हासिल हुए।   

मोदी बनाम आल की स्थिति अभी बनती नहीं दिखती

हालांकि अभी तक की स्थिति के मुताबिक, यह नहीं कहा जा सकता कि अगला चुनाव भाजपा बनाम बाकी सब की तर्ज पर होगा। उत्तरप्रदेश में सपा-बसपा के गठबंधन से कांग्रेस को बाहर रखने से अभी से मामला त्रिकोणीय होता दिख रहा है। लगभग यही स्थिति उस पश्चिम बंगाल की भी है जहां ममता बनर्जी के नेतृत्व में लगभग डेढ़ दर्जन दलों के दो दर्जन नेताओं ने मोदी सरकार के खिलाफ हुंकार भरी। ममता के मजबूत गढ़ में अभी से कांग्रेस और वाम मोर्चे के लिए अलग राह जाती दिख रही है यानी यहां भी मामला त्रिकोणीय ही होने के आसार हैं। इसी प्रकार की स्थिति महाराष्ट्र, आंध्रप्रदेश, तेलंगाना जैसे कई बड़े राज्यों की हो सकती है। 


भाजपा का ज्यादा सीटें जीतने का दावा

50 फीसदी वोट हासिल करने के गणित पर टिप्पणी करते हुए भाजपा प्रवक्ता सुदेश वर्मा ने कहा कि पिछले चुनाव में भाजपा ने अकेले के दम पर ही लगभग 150 सीटों पर पचास फीसदी से अधिक का वोट शेयर हासिल किया है। दूसरी बात, जिन नेताओं ने महागठबंधन बनाने की पहल की है, उनमें से ज्यादातर ऐसे हैं जो किसी न किसी घोटाले के आरोपी हैं। जब वे वोट लेने के लिए जनता के पास जाएंगे तो जनता देखेगी कि इन्हें वोट देकर उसे क्या हासिल होगा, और दूसरी तरफ नरेंद्र मोदी को वोट देकर उसके लिए हर घर में बिजली, हर परिवार में शौचालय, हर जिले में  सुपर स्पेशलिटी अस्पताल बनने वाले हैं। उन्होंने कहा कि विपक्ष की योजना कभी सफल नहीं होगी और वे पिछली बार से अधिक वोट हासिल करने में कामयाब रहेंगे। 

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