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Malaria: मच्छर जनित रोगों की रोकथाम के लिए आईसीएमआर की तैयारी, 25,000 स्लाइड जमा

Sat, 10 Feb 2024 06:40 AM IST
जलज मिश्रा परीक्षित निर्भय, नई दिल्ली
परीक्षित निर्भय, नई दिल्ली Published by: जलज मिश्रा Updated Sat, 10 Feb 2024 06:40 AM IST
सार

भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद (आईसीएमआर) ने जानकारी दी है कि राष्ट्रीय मलेरिया अनुसंधान संस्थान की टीम ने यह पहल की है। इनका लक्ष्य मच्छर जनित रोगों से ग्रस्त लोगों का बेहतर इलाज उपलब्ध कराना है।

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ICMR preparing for prevention of mosquito borne diseases 25000 slides deposited
ICMR - फोटो : ANI

विस्तार

मच्छर जनित रोगों की रोकथाम के लिए जल्द ही भारत में पहला राष्ट्रीय मलेरिया स्लाइड बैंक स्थापित होगा। इसमें अब तक 25 हजार स्लाइड इकट्ठा की गई हैं, जिन्हें शोध के लिए राज्यों को उपलब्ध कराया जाएगा। भारत के अलावा भूटान के अस्पतालों को भी शोध के लिए यह स्लाइड दी जाएंगी।

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भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद (आईसीएमआर) ने जानकारी दी है कि राष्ट्रीय मलेरिया अनुसंधान संस्थान की टीम ने यह पहल की है। इनका लक्ष्य मच्छर जनित रोगों से ग्रस्त लोगों का बेहतर इलाज उपलब्ध कराना है। आईसीएमआर ने बताया कि हाल ही में भारतीय शोधकर्ताओं ने एक ऐसी पीसीआर जांच तकनीक की खोज की है जिसके सहारे मच्छर की चारों प्रजातियों की पहचान हो सकती है। महज चार घंटे की जांच से मरीज में मलेरिया के स्वरूप का पता चल सकता है।

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मलेरिया की फिलहाल स्थिति  
विश्व मलेरिया रिपोर्ट के अनुसार, 2015-2022 के दौरान भारत में मलेरिया के मामलों में 85.1% की गिरावट और मौतों में 83.36% की गिरावट दर्ज आई। भारत में मलेरिया फैलाने वाले मच्छरों की नौ प्रजातियां हैं। हालांकि 686 में से 117 जिलों में एक भी मलेरिया केस नहीं मिला है।

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जहां मामले कम वहां से एकत्र किए जा रहे नमूने  
राष्ट्रीय मलेरिया अनुसंधान संस्थान ने जानकारी दी है कि जिन क्षेत्रों में मलेरिया के मामले लगातार कम हो रहे हैं, वहां संक्रमित मिलने वाले रोगियों के रक्त नमूने एकत्र किए जा रहे हैं। मलेरिया परजीवियों की प्रजातियों की पुष्टि के लिए डीएनए और पीसीआर विश्लेषण किया जा रहा है। गुणवत्ता मानदंडों को पूरा करने वाली स्लाइडों पर परजीवियों की गिनती, लेबलिंग और भंडारण किया गया।

कृत्रिम बुद्धिमत्ता से होगी लैस
स्लाइड बैंक कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) आधारित एल्गोरिदम प्रणालियों से लैस होगा, जो प्रशिक्षण व चुनौतियों को कम करेगा। साथ ही माइक्रोस्कोपी का उपयोग करके मलेरिया निदान में प्रयोगशाला तकनीशियनों की क्षमता बढ़ा सकती है।

भारत में टीका उपलब्ध नहीं  
हाल ही में आरटीएस नामक एक टीका आया है जिसे डब्ल्यूएचओ से अनुमति मिली है। इसे भारत में सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया ने बनाया है। अभी तक इस टीका को घाना, नाइजीरिया और बुर्किना फासो में उपयोग के लिए लाइसेंस मिला है।

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