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चेतावनी: 'ब्लैक फंगस' में न बरतें लापरवाही, बिना इलाज मौत का भी खतरा, आईसीएमआर ने कही यह बात

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: प्रशांत कुमार Updated Mon, 10 May 2021 08:34 AM IST

सार

आईसीएमआर और स्वास्थ्य मंत्रालय ने एडवाइजरी जारी करते हुए कहा कि कोविड मरीजों में 'ब्लैक फंगस' के मामले भी सामने आ रहे हैं। सही समय पर उपचार नहीं होने से यह जानलेवा साबित हो सकता है।
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सांकेतिक तस्वीर - फोटो : pixabay

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विस्तार

देश पहले से ही कोरोना की दूसरी लहर से तबाह है, मौतों के आंकड़े लगातार बढ़ रहे हैं। वहीं भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद (आईसीएमआर) ने कहा है कि कोरोना मरीजों में ब्लैक फंगस भी पाया जाता है। आईसीएमआर ने एडवाइजरी जारी कर बताया है कि कोरोना से ठीक हो चुके मरीजों के लिए यह म्यूकोरमाइकोसिस जानलेवा साबित हो रहा है। ब्लैक फंगस या म्यूकोरमाइकोसिस वातावरण में मौजूद रोगाणुओं से लड़ने की क्षमता को कमजोर कर देता है । सही समय पर इलाज नहीं मिलने से मरीजों की जान तक जा सकती है। खासकर यह बीमारी डायबिटीज और क्रॉनिकल बीमारी वालों के लिए खतरनाक है। 
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ब्लैक फंगस के क्या है लक्षण
 ब्लैक फंगस या म्यूकोरमाइकोसिस में सरदर्द, बदन दर्द, तेज बुखार, खांसी, सांस लेने में समस्या, आंखों और नाक के पास लाल होना, खून की उल्टी, मानसिक स्थिति बदल जाना जैसे कई लक्षण दिखते हैं। केंद्र सरकार और आईसीएमआर ने इसे नजर अंदाज नहीं करने की सलाह दी है। ऐसी स्थिति होने पर चिकित्सकों से परामर्श लेने को कहा है। 




केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय और (आईसीएमआर) ने बीमारी की निगरानी, जांच और इलाज के लिए एडवाइजरी जारी की है। इसमें बताया गया है ‘‘ ब्लैक फंगस या म्यूकोरमाइकोसिस का इलाज नहीं किया जाए तो इससे मरीज की जान तक जा सकती है। हवा में मौजूद फफूंद सांस के रास्ते शरीर में पहुंचता है और धीरे-धीरे फेफड़े को प्रभावित करना शुरू कर देता है’’ 

डायबीटिज मरीजों के लिए यह है खतरनाक
आईसीएमआर-स्वास्थ्य मंत्रालय के परामर्श में कहा गया इस बीमारी का सबसे बड़ा खतरा, मधुमेह का अनियंत्रित होना, स्ट्रॉयड की वजह से प्रतिरक्षण क्षमता में कमी, लंबे समय तक आईसीयू में रहने वाले मरीजों पर यह जल्द प्रभाव छोड़ता है। इस संक्रमण से बचने के लिए कोरोना मरीजों को अस्पतालों से छुट्टी देने के बाद भी ब्लड में ग्लूकोज की निगरानी जरूरी है। एंटीबायोटिक, एंटीफंगल दवा, स्ट्रॉयड और संक्रमणमुक्त पानी का इस्तेमाल किया जाना चाहिए।

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