रिपोर्ट: आईसीसी ने भारतीय प्रतिस्पर्धा आयोग की भूमिका को सराहा, टेक कंपनियों पर कार्रवाई को बताया जरूरी
आईसीसी ने भारत में डिजिटल व टेक कंपनियों और उनकी ओर से डाटा पूलिंग व एल्गोरिदम से खुली प्रतिस्पर्धा को नुकसान से बचाने के लिए आयोग की ओर से की जा रही कार्रवाइयों को दिलचस्प बताया है।
विस्तार
भारतीय प्रतिस्पर्धा आयोग (सीसीआई) की बाजार में 30 फीसदी ‘मार्केट पावर’ रखने वाली कंपनियों के प्रतिस्पर्धा रोधी आचरण पर नजर है। नियम विरुद्ध आचरण पर आयोग इन पर प्रतिबंध लगा सकता है। यह बात बाजार को एकाधिकार मुक्त रखने के लिए प्रमुख देशों की ओर से उठाए जा रहे कदमों पर इंटरनेशनल चेंबर ऑफ कॉमर्स (आईसीसी) ने अपनी ताजा सर्वे रिपोर्ट में कही है।
आईसीसी ने भारत में डिजिटल व टेक कंपनियों और उनकी ओर से डाटा पूलिंग व एल्गोरिदम से खुली प्रतिस्पर्धा को नुकसान से बचाने के लिए आयोग की ओर से की जा रही कार्रवाइयों को दिलचस्प बताया है। ‘डिजिटल इकोनॉमी में एकाधिकार-रोधी कानूनों पर वैश्विक रिपोर्ट’ में आईसीसी ने लिखा, भारतीय आयोग ने साफ कर दिया है कि कोई भी डिजिटल प्लेटफॉर्म अगर वर्चस्वशाली स्थिति में है और संबंधित क्षेत्र की ‘चौकीदारी’ कर रहा है, तो बाजार के प्रति उसकी विशेष जिम्मेदारियां बनती हैं। वह अपने वर्चस्व से प्रतिस्पर्धा को बिगाड़ नहीं सकते।’ उल्लेखनीय है कि गूगल पर ऐसे ही मामलों में भारत में मुकदमे दायर हुए हैं।
डाटा जमा करने के खतरे भी बताए
रिपोर्ट के अनुसार, डाटा को लेकर भी आयोग ने साफ किया कि बड़ी टेक कंपनियों की ओर से लोगों का निजी डाटा भारी मात्रा में जमा करने से उन्हें और उनके पूरे नेटवर्क को बाजार में अनुचित फायदा मिल सकता है। वे इसका न केवल दुरुपयोग कर सकती हैं। बाकी कंपनियों को बाजार से बाहर भी रख सकती हैं।
आयोग ने यहां बरती सख्ती
कैब बुकिंग कंपनी ओला में हुंडई व किया की ओर से छोटी हिस्सेदारी खरीदने के दौरान आयोग ने सुनिश्चित करवाया कि ओला का एल्गोरिदम इन कार कंपनियों को फेवर नहीं करेगा। दोनों कार कंपनियों ने इसका वचन दिया।
जियो प्लेटफॉर्म्स में फेसबुक की ओर से छोटी हिस्सेदारी खरीदते समय आयोग को आशंका थी कि टेक कंपनियां अपने डाटा बैंक की पूलिंग कर वित्तीय फायदा ले सकती हैं। इन कंपनियों ने वचन दिया कि वे अपने डाटा का आपस में विलय नहीं करेंगी।