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पश्चिम बंगाल चुनाव: येलो बुक से ‘आईबी-रॉ’ तय करती हैं नेताजी का सुरक्षा कवच, उसी हिसाब से मिलती है सिक्योरिटी

Wed, 31 Mar 2021 03:51 PM IST
Harendra Chaudhary जितेंद्र भारद्वाज, अमर उजाला, नई दिल्ली
जितेंद्र भारद्वाज, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Harendra Chaudhary Updated Wed, 31 Mar 2021 03:51 PM IST
सार

सुरक्षा एजेंसियों से जुड़े एक अधिकारी के मुताबिक पश्चिम बंगाल में नेताओं को 'येलो बुक' के आधार पर सुरक्षा दी जा रही है। राजनेताओं के लिए सुरक्षा इंतजाम कैसा हो, उन्हें किस तरह का सुरक्षा कवच मिले, यह सब 'येलो बुक' के अनुसार निर्धारित होता है...

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IB and RAW decide on which level of protection to be given to the VIPs on the basis of the Yellow Book
बंगाल में चुनाव प्रचार करते प्रत्याशी - फोटो : PTI

विस्तार

पश्चिम बंगाल के विधानसभा चुनाव में अमित शाह और ममता बनर्जी के बीच कड़ा चुनावी मुकाबला देखने को मिल रहा है। दोनों नेताओं ने अपने उम्मीदवारों को जिताने के लिए पूरी ताकत लगा दी है। शाह और दीदी की इस चुनावी बिसात पर 'नेताजी' की जान को खतरा भी बहुत है। खास बात है कि ये खतरा बढ़ता ही जा रहा है। दिसंबर में पश्चिम बंगाल के 49 नेताओं को सीआईएसएफ सुरक्षा कवच मुहैया कराया गया था, अब वह संख्या अस्सी तक जा पहुंची है।

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सीआरपीएफ ने अलग से 13 वीआईपी को सुरक्षा प्रदान की है। देश की आंतरिक और बाहरी खुफिया एजेंसियां यानी 'आईबी और रॉ' येलो बुक के आधार पर यह तय करती हैं कि किस वीआईपी को, कौन से स्तर की सुरक्षा देनी है। पश्चिम बंगाल चुनाव में ये दोनों एजेंसियां चंद मिनटों में बता देती हैं कि कौन सा वीआईपी कितने बड़े खतरे में है।
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बता दें कि पश्चिम बंगाल के चुनाव में जिस तेजी से नेताओं एवं दूसरे वीआईपी को केंद्रीय गृह मंत्रालय द्वारा सुरक्षा प्रदान की जा रही है, ऐसा पहले कम ही देखने को मिलता है। सुरक्षा एजेंसियों से जुड़े एक अधिकारी के मुताबिक पश्चिम बंगाल में नेताओं को 'येलो बुक' के आधार पर सुरक्षा दी जा रही है। राजनेताओं के लिए सुरक्षा इंतजाम कैसा हो, उन्हें किस तरह का सुरक्षा कवच मिले, यह सब 'येलो बुक' के अनुसार निर्धारित होता है।
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इस बुक में राजनीतिक हस्तियों को सुरक्षा मुहैया कराने के दिशा-निर्देश लिखे रहते हैं। एक दूसरी बुक भी होती है, जिसे 'ब्लू बुक' का नाम दिया गया है। इसमें राष्ट्रपति, उपराष्ट्रपति और प्रधानमंत्री की सुरक्षा से संबंधित दिशा निर्देश लिखे गए हैं। ये बुक केंद्रीय गृह मंत्रालय और एसपीजी के माध्यम से जारी होती है।

आईबी के पूर्व स्पेशल डायरेक्टर एवं कैबिनेट सचिवालय में सेक्रेटरी ‘सिक्योरिटी’ के पद से रिटायर हुए यशोवर्धन आजाद कहते हैं, हर चुनाव से पहले ये दोनों एजेंसियां नेताओं और दूसरे वीआईपी की सुरक्षा को लेकर एक विस्तृत रिपोर्ट तैयार करती हैं। आईबी अपने स्तर पर और लोकल पुलिस की मदद लेकर यह पता लगाती है कि किस नेता को कहां पर कितना और किस तरह का खतरा है।

बतौर यशोवर्धन आजाद, येलो बुक में ये सब लिखा रहता है। वीआईपी को आतंकियों से खतरा है, माफिया का खतरा है या राष्ट्रीय स्तर की कोई बड़ी साजिश है, ये सब येलो बुक का हिस्सा होता है। आईबी द्वारा यह तय किया जाता है कि किस वीआईपी को किस श्रेणी की सुरक्षा मुहैया कराई जाए। यह निर्धारित होने के बाद केंद्रीय गृह मंत्रालय में बैठक होती है, जिसमें आईबी के अलावा रॉ के अधिकारी भी शामिल रहते हैं।

इस बैठक में यह तय कर लिया जाता है कि राज्य में और राष्ट्रीय स्तर पर उस व्यक्ति को किस तरह की सुरक्षा मिलेगी। चुनाव के वक्त किसी राज्य में दो तरह की सुरक्षा मिलती है। किसी वीआईपी को राज्य अपनी सिक्योरिटी मुहैया कराता है तो कोई केंद्र से सुरक्षा ले लेता है। केंद्रीय एजेंसियों के एक अधिकारी बताते हैं, बंगाल चुनाव से कई माह पहले सुरक्षा एजेंसियों ने अपना होमवर्क पूरा कर लिया था। उसी आधार पर वीआईपी को चुनाव के दौरान सुरक्षा मुहैया कराई जा रही है। यदि किसी वीआईपी की सुरक्षा श्रेणी यानी एक्स, वाई, वाई प्लस, जेड या जेड प्लस में कोई बदलाव होना है तो उसके लिए आईबी और रॉ, दोनों का इनपुट लिया जाता है।

उक्त अधिकारी के मुताबिक, पश्चिम बंगाल के चुनाव में 'खतरा' कई तरह के रूप बदलता रहा है। कई केस तो ऐसे भी रहे हैं कि आईबी को 24 घंटे के भीतर किसी वीआईपी की सुरक्षा रिपोर्ट तैयार करनी पड़ी है। ऐसे वीआईपी का घर, कार्यालय, कितने जिलों में उसकी आवाजाही है, ये सब बातें रिपोर्ट का हिस्सा होती हैं। उस इलाके में किस तरह का हमला हो सकता है, इसका अंदाजा भी पहले ही लगा लिया जाता है।

काफिले के साथ कैसी सुरक्षा रहेगी, इसे लेकर स्थानीय पुलिस के साथ बैठक करते हैं। सीआरपीएफ के डीजी कुलदीप का कहना है, पश्चिम बंगाल में 13 लोगों को विभिन्न स्तर की सुरक्षा मुहैया कराई है। इनमें जेड श्रेणी की सुरक्षा प्राप्त लोगों की संख्या पांच है, जबकि वाई प्लस की सुरक्षा लेने वाले लोग भी पांच ही हैं। इनके अलावा वाई श्रेणी में एक और दो लोगों को एक्स श्रेणी की सुरक्षा दी गई है।


बतौर कुलदीप सिंह, बल के पास जैसे ही लिखित सूचना पहुंचती है कि फलां व्यक्ति को इस स्तर की सुरक्षा मुहैया कराई जाए, उसके चंद घंटे के भीतर हमारे सुरक्षा कर्मी संबंधित वीआईपी के पास पहुंच जाते हैं। इस प्रक्रिया में एक मिनट की भी देरी नहीं की जाती।

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