आज हम आपको ऐसे आईएएस, आईएफएस और अन्य सिविल सेवकों के बारे में बताने जा रहे हैं जिन्होंने देश की राजनीति में भी कदम रखा है। इन्होंने राजनीति में भी उतना ही कमाल दिखाया है जितना अपनी नौकरी में। अभी हाल ही में रायपुर के जिला कलेक्टर ओ.पी. चौधरी खबरों में आए थे। जो कि 2005 बैच के आईएएस अफसर रह चुके हैं और भाजपा ज्वाइन करने के लिए अपने पद से बीते हफ्ते ही इस्तीफा दिया है।
ये हैं वो 10 आईएएस-आईएफएस जिन्होंने राजनीति में भी किया कमाल
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अजीत जोगी
अजीत जोगी ने जिस वक्त राजनीति से जुड़ने का फैसला किया तब वह जिला कलेक्टर थे। वह 1968 बैच के आईएएस अफसर रह चुके हैं। वह तत्कालीन प्रधानमंत्री राजीव गांधी के कहने पर कांग्रेस में शामिल हुए थे। जिसके बाद वह छत्तीसगढ़ के पहले मुख्यमंत्री बने। गांधी परिवार का वफादार होने के कारण जोगी पर कई बार भ्रष्टाचार और आपराधिक मामलों के आरोप लग चुके हैं।
जिसके बाद उन्होंने साल 2016 में पार्टी छोड़ दी। पार्टी छोड़ने का फैसला उन्होंने तब किया जब उनके विधायक बेटे अमित को छह साल के लिए पार्टी से निष्कासित किया गया। इसके बाद इस आदिवासी नेता ने छत्तीसगढ़ जनता कांग्रेस नाम से एक अन्य पार्टी बनाई जो कि आने वाले चुनावों में कांग्रेस के वोट भी ले सकती है।
यशवंत सिन्हा
पटना में जन्मे यशवंत सिन्हा 1960 में आएएस अफसर बने। वह इस पद पर 1984 तक रहे। इसके बाद 1990-91 के दौरान चंद्रशेखर की कैबिनेट में वित्त मंत्री रहे। भाजपा से पहले वह जनता दल के नेता थे। इसके बाद अटल बिहारी वाजपेयी के नेतृत्व वाली एनडीए सरकार में वित्त मंत्री और विदेश मामलों के मंत्री बने। उन्होंने इसी साल भाजपा को छोड़ दिया है। लेकिन उनके बेटे जयंत सिन्हा मोदी सरकार में नागरिक उड्डयन राज्य मंत्री हैं।
मीरा कुमार
बिहार के अारा में जन्मीं मीरा कुमार भारत की पहली महिला लोकसभा स्पीकर बनीं। वह 2009-14 तक लेकसभा के स्पीकर के पद पर रहीं। उनके पिता बाबू जगजीवन राम भारत के चौथे उप प्रधानमंत्री रह चुके हैं। उन्होंने आईएफएस के पद पर अपना कार्यभार 1973 को संभाला और काफी लंबे समय तक काम किया।
वह 1985 में राजनीति में पहुंची। बिजनौर उपचुनाव में उन्होंने राम विलास पासवान और मायावती को हरा दिया था। वह 2004 में कांग्रेस की यूपीए सरकार में सामाजिक न्याय और सशक्तिकरण मंत्री रहीं। कांग्रेस ने मीरा को 2017 के राष्ट्रपति उम्मीदवार के तौर पर खड़ा किया था लेकिन वह रामनाथ कोविंद से चुनाव हार गईं।
मणिशंकर अय्यर
लाहौर में जन्मे मणिशंकर अय्यर 1963 में आईएफएस सर्विस से जुड़े और 1989 में सेवानिवृत होने के बाद कांग्रेस से जुड़ गए। उन्होंने तमिलनाडु के मायिलादुतुरई निर्वाचन क्षेत्र से 1991 में लोकसभा का चुनाव लड़ा।
वह मई 2004 से जनवरी 2006 तक प्राकृतिक गैस और पेट्रोलियम तथा 2009 तक युवा कार्यकलाप और खेल मंत्रालय के कैबिनेट मंत्री रह चुके हैं। वह गांधी परिवार के करीब माने जाते हैं। स्कूल में वह पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी के सीनियर भी रह चुके हैं और पीएम मोदी के खिलाफ दिए अपने बयानों के कारण खबरों में रहते हैं।