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Project Cheetah: इस्राइली हेरॉन ड्रोन्स बनेंगे और खतरनाक, मेक इन इंडिया से बढ़ेगी सेना की ताकत
Sun, 18 Sep 2022 10:38 PM IST
शिव शरण शुक्ला
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: शिव शरण शुक्ला
Updated Sun, 18 Sep 2022 10:38 PM IST
सार
लंबे समय से भारतीय रक्षा बल टोही और जासूसी उद्देश्यों के लिए IAF इजराइज निर्मित सर्चर II और हेरोन यूएवी पर निर्भर हैं। चीता प्रोजेक्ट के तहत विकसित करने के बाद हेरॉन के जरिए बलों को दुश्मन के ठिकाने के बारे में सटीक और खुफिया जानकारी मिल सकेगी।
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हेरॉन ड्रोन
- फोटो : एएनआई
विस्तार
भारत की मोदी सरकार ने मेक इन इंडिया अभियान को आगे बढ़ाने के लिए सभी प्रमुख आयात सौदों को या तो रोक दिया गया था या उन्हें रद्द कर दिया गया था। ऐसे में भारतीय वायु सेना अब मेक इन इंडिया के तहत अपने प्रोजेक्ट चीता को आगे बढ़ाने की योजना बना रही है। इसके तहत भारतीय रक्षा निर्माता इस्राइली हेरॉन ड्रोन्स को स्ट्राइक क्षमताओं से लैस करेंगे।
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भारतीय वायुसेना अपनी महत्वाकांक्षी परियोजना 'चीता' के तहत बेहतर संचार सुविधाओं और मिसाइलों के साथ इस्राइली मूल के हेरॉन मानव रहित हवाई ड्रोन्स के अपने मौजूदा बेड़े को विकसित करना चाहती है। गौरतलब है कि पहले इस परियोजना को इस्राइली हथियार निर्माताओं के साथ पूरा किया जाना था। सूत्रों के मुताबिक, अब भारतीय वायुसेना मेक इन इंडिया के तहत भारतीय रक्षा फर्मों को शामिल करके अपने ड्रोन को विकसित करके इस परियोजना को आगे बढ़ाने की योजना बना रही है।
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बता दें कि चीता परियोजना के तहत नौसेना और सेना में इस्राइली ड्रोन को स्ट्राइक क्षमताओं और बेहतर निगरानी क्षमताओं के साथ अपग्रेड करने की योजना है। साथ ही इन ड्रोन्स को घातक मिसाइलों और लेजर बमों से लैस किया जाना है। गौरतलब है कि भारतीय वायुसेना के नेतृत्व में ही इस परियोजना का क्रियान्वयन किया जाना है।
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दरअसल, लंबे समय से भारतीय रक्षा बल टोही और जासूसी उद्देश्यों के लिए IAF इजराइज निर्मित सर्चर II और हेरॉन यूएवी पर निर्भर हैं। चीता प्रोजेक्ट के तहत विकसित करने के बाद हेरॉन के जरिए बलों को दुश्मन के ठिकाने के बारे में सटीक और खुफिया जानकारी मिल सकेगी। इसके अलावा इन्हें लंबी दूरी से दुश्मन के ठिकानों को निशाना बनाने के काबिल भी बनाया जाएगा।
इस्राइली ड्रोन को विकसित करने से ग्राउंड स्टेशन इन ड्रोन को दूर से संचालित करने और उपग्रह संचार प्रणाली के माध्यम से नियंत्रित करने में भी सफलता मिल सकेगी। शुरुआती योजनाओं के अनुसार, भारत लंबे समय तक चलने वाले मिसाइलों सहित स्ट्राइक क्षमता से लैस 30 अमेरिकी सशस्त्र ड्रोन हासिल करने की योजना बना रहा था, जिन्हें तीनों सेवाओं के बीच समान रूप से वितरित किया जाना था।