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वायु सेना कॉन्क्लेव में राजनाथ: मानवता और लोकतंत्र की गरिमा के लिए लड़ा गया था 1971 का युद्ध

Fri, 22 Oct 2021 05:51 PM IST
गौरव पाण्डेय न्यूज डेस्क, अमर उजाला, बंगलूरू
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, बंगलूरू Published by: गौरव पाण्डेय Updated Fri, 22 Oct 2021 05:51 PM IST
सार

बंगलूरू में स्वर्णिम विजय वर्ष के हिस्से के तौर पर शुक्रवार को भारतीय वायु सेना की ओर से एक कॉन्क्लेव का आयोजन किया गया। यहां रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, वायु सेना प्रमुख एयर चीफ मार्शल विवेक राम चौधरी और सीडीएस जनरल बिपिन रावत ने कार्यक्रम को संबोधित किया।

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IAF conclave Swarnim Vijay Varsh celebrations Bengaluru Rajnath Singh Air Chief Marshal Vivek Ram Chaudhary 1971 war
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह - फोटो : एएनआई

विस्तार

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने वायु सेना कॉन्क्लेव में कहा कि 1971 का युद्ध इतिहास की उन चंद लड़ाइयों में से एक है जो किसी क्षेत्र पर कब्जा करने के लिए या ताकत हासिल करने के लिए नहीं लड़ा गया था। इस लड़ाई का मुख्य उद्देश्य मानवता और लोकतंत्र की गरिमा की रक्षा करना था। 

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राजनाथ सिंह ने कहा कि तीन दिसंबर 1971 को जब विवाद शुरू हुआ था, हम राजनीतिक, राजनयिक और सैन्य रूप से इसके लिए तैयार थे। उन्होंने कहा कि हमारे देश के राजनीतिक-सैन्य विचारों और कार्यों की अनुरूपता ने एशिया में एक नए राष्ट्र (बांग्लादेश) को जन्म दिया।
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'द्वितीय विश्व युद्ध के बाद 1971 में हुआ सबसे बड़ा आत्मसमर्पण'
वहीं, वायु सेना प्रमुख विवेक राम चौधरी ने कहा कि 1971 का युद्ध सैन्य लड़ाई के इतिहास में सबसे छोड़ी और तेज विजय थी। 93 हजार पाकिस्तानी सैनिकों का आत्मसमर्पण द्वितीय विश्वयुद्ध के बाद किसी सेना भी सेना की ओर से किया गया अब तक का सबसे बड़ा आत्मसमर्पण है।
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चौधरी ने कहा कि भारतीय बलों ने पश्चिमी और पूर्वी मोर्चों पर बेहतरीन समन्वय के साथ लड़ाई लड़ी और हवा में, जमीन पर और समुद्र में अपना कौशल दिखाया। पाक सेना को कम से कम समय में आत्मसमर्पण करने के लिए मजबूर करने के लिए भारतीय सेनाएंसभी क्षेत्रों पर हावी रही थीं।

'1971 के युद्ध ने बदला दक्षिण एशियाई उपमहाद्वीप का भूगोल'
वहीं, सीडीएस जनरल बिपिन रावत ने कहा कि 1971 का भारत-पाकिस्तान युद्ध असल में एक ऐतिहासिक घटना थी जिसने दक्षिण एशियाई उपमहाद्वीप के भूगोल को बदल दिया। केवल 14 दिनों के अंदर युद्ध सफलतापूर्वक समाप्त हुआ और एक संप्रभु राष्ट्र बांग्लादेश का उदय हुआ था।


सीडीएस रावत ने कहा कि भविष्य की तैयारियों को लेकर अपने विरोधियों से आगे बने रहने के लिए हमें नई तकनीकी को अपनाने पर ध्यान देना होगा, जैसे कि आर्टीफिशियल इंटेलीजेंस, बिग डाटा एनालिसिस, क्वांटम कंप्यूटिंग, हाइपरसोनिक हथियार, रोबोटिक्स, नैनोटेक्नोलॉजी आदि।

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