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Hindi News ›   India News ›   I will retire in Aug 2027, subject to divine intervention: Vice President Jagdeep Dhankhar

Jagdeep Dhankhar: 'ईश्वर की कृपा रही तो सही समय पर 2027 में सेवानिवृत्त हो जाऊंगा', उपराष्ट्रपति धनखड़ का बयान

Thu, 10 Jul 2025 09:37 PM IST
अभिषेक दीक्षित न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: अभिषेक दीक्षित Updated Thu, 10 Jul 2025 09:37 PM IST
सार

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के बाद अब उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ ने अपनी सेवानिवृत्ति को लेकर बयान दिया है। उपराष्ट्रपति धनखड़ ने कहा कि ईश्वर की कृपा रही तो वह अगस्त, 2027 में सेवानिवृत्त हो जाएंगे। पेशे से वकील धनखड़ उपराष्ट्रपति चुने जाने से पहले पश्चिम बंगाल के राज्यपाल थे।

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I will retire in Aug 2027, subject to divine intervention: Vice President Jagdeep Dhankhar
उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ - फोटो : पीटीआई

विस्तार

उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ ने गुरुवार को कहा कि वह अगस्त 2027 में सेवानिवृत्त हो जाएंगे। उन्होंने यह टिप्पणी जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (जेएनयू) में एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए की। उन्होंने कहा, 'मैं सही समय पर अगस्त 2027 में भगवान की कृपा रही तो सेवानिवृत्त हो जाऊंगा। 14वें उपराष्ट्रपति के रूप में धनखड़ का पांच साल का कार्यकाल 10 अगस्त, 2027 को समाप्त हो रहा है। इससे पहले धनखड़ ने पश्चिम बंगाल के राज्यपाल का कार्यभार संभाला था। इसके बाद ही उन्हें भाजपा के नेतृत्व वाले एनडीए की ओर से उपराष्ट्रपति उम्मीदवार चुना गया था।

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'भारत युगों में फलता-फूलता है, युगों में जीता है'
उपराष्ट्रपति ने कहा कि भारत का वैश्विक शक्ति के रूप में उदय तभी सार्थक होगा, जब उसके साथ उसकी बौद्धिक और सांस्कृतिक गरिमा का उत्थान भी हो। उन्होंने कहा कि भारत युगों में फलता-फूलता है, युगों में जीता है। भारत वेदों और उपनिषदों के उच्चारण से श्वास लेता है, पाणिनि के जटिल सूत्रों के माध्यम से बोलता है, आर्यभट्ट की सटीकता से गणना करता है और कौटिल्य के विवेक, धैर्य तथा बुद्धिमत्ता से शासन करता है। उपराष्ट्रपति ने कहा कि एक वैश्विक शक्ति के रूप में भारत के उदय के साथ-साथ उसकी बौद्धिक और सांस्कृतिक गंभीरता का भी विकास होना चाहिए। किसी राष्ट्र की शक्ति उसके विचारों की मौलिकता और उसके मूल्यों की शाश्वतता में निहित होती है। पश्चिमी सिद्धांतों को सार्वभौमिक सत्य के रूप में प्रचारित किया गया।
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'वेदों, उपनिषदों और प्राकृतिक खेती के अध्ययन के लिए समर्पित करूंगा जीवन'
इससे पहले केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने अंतरराष्ट्रीय सहकारिता वर्ष के अवसर पर बुधवार को गुजरात, मध्य प्रदेश और राजस्थान की सहकारिता क्षेत्र से जुड़ीं महिलाओं और अन्य सहकारी कार्यकर्ताओं के साथ 'सहकार-संवाद' किया था। उन्होंने कहा था कि मैंने निर्णय लिया है कि सेवानिवृत्ति के बाद मैं अपना शेष जीवन वेदों, उपनिषदों और प्राकृतिक खेती के अध्ययन के लिए समर्पित करूंगा। प्राकृतिक खेती एक वैज्ञानिक प्रयोग है, जिसके अनेक लाभ हैं। रासायनिक उर्वरकों से उगाए गए गेहूं से अक्सर कई स्वास्थ्य समस्याएं उत्पन्न होती हैं। प्राकृतिक खेती न केवल शरीर को रोगमुक्त रखने में मदद करती है, बल्कि कृषि उत्पादकता को भी बढ़ाती है।

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