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मुझे भी कम सैलरी मिलती है रघुराम राजन
टीम डिजिटल / अमर उजाला, नई दिल्ली
Updated Wed, 17 Aug 2016 06:41 AM IST
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रघुराम राजन
- फोटो : ANI
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सितंबर में आरबीआई के गवर्नर पद से रिटायर हो रहे रघुराम राजन ने सरकारी बैंकों में मिलने वाली सैलरी का मुद्दा उठाते हुए कहा कि सरकारी बैंकों में निचले स्तर पर अच्छी सैलरी मिलती है लेकिन उच्च स्तर पर काफी कम हैं। उन्होंने मजाकिया लहजे में यह भी कहा कि उन्हें भी काफी कम सैलरी मिलती है।
सार्वजनिक क्षेत्र के बैकों के प्रतिनिधियों से बात करते हुए राजन ने कहा कि सार्वजनिक क्षेत्र की सभी इकाईयों के साथ यह दिक्कत है। सार्वजनिक क्षेत्र में निचले स्तर पर काफी अच्छी तनख्वाह मिलती है लेकिन ऊंचे स्तर पर काफी कम, इस कारण टॉप टैलेंट को आकर्षित करने में मुश्किलों का सामना करना पड़ता है।
आरबीआई के ताजा आंकड़ों के अनुसार जुलाई 2015 में राजन को 1,98,700 रुपये मासिक वेतन के रुप में दिए गए। भारत के सबसे बड़े बैंक भारतीय स्टेट बैंक की चेयरपर्सन अरुंधति भट्टाचार्य को वित्त वर्ष 2015-16 में बतौर सैलरी 31.1 लाख रुपये वार्षिक मिले। उसकी तुलना में निजी क्षेत्र के बैंक एचडीएफसी के एमडी आदित्य पुरी को 9.7 करोड़ रुपये सालाना मिले।
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इतने बड़े अंतर के कारण आईआईएम जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों के छात्र सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों में काम नहीं करना चाहते हैं।
सार्वजनिक क्षेत्र के बैकों के प्रतिनिधियों से बात करते हुए राजन ने कहा कि सार्वजनिक क्षेत्र की सभी इकाईयों के साथ यह दिक्कत है। सार्वजनिक क्षेत्र में निचले स्तर पर काफी अच्छी तनख्वाह मिलती है लेकिन ऊंचे स्तर पर काफी कम, इस कारण टॉप टैलेंट को आकर्षित करने में मुश्किलों का सामना करना पड़ता है।
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आरबीआई के ताजा आंकड़ों के अनुसार जुलाई 2015 में राजन को 1,98,700 रुपये मासिक वेतन के रुप में दिए गए। भारत के सबसे बड़े बैंक भारतीय स्टेट बैंक की चेयरपर्सन अरुंधति भट्टाचार्य को वित्त वर्ष 2015-16 में बतौर सैलरी 31.1 लाख रुपये वार्षिक मिले। उसकी तुलना में निजी क्षेत्र के बैंक एचडीएफसी के एमडी आदित्य पुरी को 9.7 करोड़ रुपये सालाना मिले।
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इतने बड़े अंतर के कारण आईआईएम जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों के छात्र सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों में काम नहीं करना चाहते हैं।