I.N.D.I alliance: दस दिन में कैसे हो पाएगा गठबंधन में सीटों का बंटवारा! क्या सब कुछ पहले ही तय हो चुका है?
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विस्तार
विपक्षी गठबंधन की बैठक में तय हुआ है कि 31 दिसंबर तक सीटों का बंटवारा हो जाएगा। सियासी गलियारों में चर्चा इस बात की हो रही है कि आखिर दस दिन में ऐसा क्या होगा कि गठबंधन के भीतर सीटों की शेयरिंग का फॉर्मूला तय होकर सभी सीटें घोषित हो जाएंगी। वहीं I.N.D.I गठबंधन से जुड़ी पार्टी के नेताओं का कहना है कि गठबंधन की बैठक भले लंबे अरसे बाद हुई हो, लेकिन सीटों की शेयरिंग का फॉर्मूला पहले से तय हो चुका है। बस उसको लागू करके आगे की तैयारी शुरू करनी है।
नई दिल्ली में सोमवार को हुई विपक्षी गठबंधन की बैठक में कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा हुई। इसमें सबसे महत्वपूर्ण और जटिल बिंदु सीटों के शेयरिंग का फॉर्मूला भी था। गठबंधन में शामिल एक पार्टी के वरिष्ठ नेता कहते हैं कि लोगों को सीटों के शेयरिंग के फॉर्मूले पर सबसे बड़ी रार नजर आती है। जबकि हकीकत में ऐसा बिल्कुल नहीं है। वह कहते हैं कि उत्तर प्रदेश, दिल्ली और पश्चिम बंगाल में जो थोड़ी बहुत समस्याएं नजर आ रही थी, उनका तकरीबन निपटारा हो गया है। जबकि पंजाब में कुछ सीटों को लेकर आपसी समझ के साथ सीट शेयरिंग समझौता होना है। हालांकि सभी राज्यों में 31 दिसंबर या उसके आसपास तक सब कुछ फाइनल होकर आगे की रणनीति शुरू होगी।
हालांकि सूत्रों के मुताबिक कुछ राज्यों में गठबंधन के दल बगैर किसी आपसी समझौते के सियासी मैदान में उतर सकते हैं। इसमें पश्चिम बंगाल और केरल को लेकर सबसे ज्यादा संभावनाएं नजर आ रही हैं। इसलिए इन राज्यों में कम्युनिस्ट पार्टी अलग चुनाव लड़ सकती है। जिसमें पश्चिम बंगाल में तृणमूल कांग्रेस और केरल में कांग्रेस के साथ दोनों की फ्रेंडली फाइट की संभावनाएं बन रही हैं। गठबंधन में शामिल राजनीतिक दलों के सूत्रों का मानना है कि बाकी किसी भी राज्य में खासतौर से हिंदी भाषी राज्य में कोई समस्या नहीं है। इसे लेकर सोमवार की बैठक में खुलकर चर्चा भी हुई है।
गठबंधन से जुड़े सूत्रों के मुताबिक सभी पार्टियों के नेताओं की बैठक भले एक लंबे अरसे बाद हुई हो, लेकिन सीटों के बंटवारे से लेकर अन्य सभी जरूरी बातों पर लगातार मंथन होता रहा है। गठबंधन ने जिस तरीके से सभी दलों को एक साथ आकर केंद्र सरकार और उनकी नीतियों के विरोध के लिए बड़ा मंच तैयार किया है, उस पर सहमति पहले भी बनी थी। लेकिन पांच राज्यों में हुए चुनावों के चलते उसे आगे लिए बढ़ा दिया गया था। अब 22 दिसंबर के बाद इसको सभी राज्यों में प्रमुखता के साथ शुरू किया जाएगा।
राजनीतिक विश्लेषक सदाकांत पुंडीर कहते हैं कि विपक्षी दलों के बीच में जिस तरह दस दिन का टाइम फ्रेम सीट शेयरिंग का दिया गया है, उससे अंदाजा लगाना आसान है कि तकरीबन सब कुछ पहले से ही तय हो चुका है। रही सही चर्चा है सोमवार को हुई बैठक में राज्य इकाइयों के माध्यम से पूरी करने की शुरुआत कर दी गई। इसके अलावा जिस तरीके से जनवरी तक गठबंधन के नेताओं ने सभी तैयारी के साथ चुनावी मैदान में आने की योजना बनाई है, वह भी तकरीबन पहले से तय फॉर्मूले के आधार पर है। कांग्रेस पार्टी से जुड़े एक वरिष्ठ नेता कहते हैं कि गठबंधन में किसी भी तरीके की कोई समस्या न पहले थी न अब है। चुनाव के चलते सभी दल अपनी अपनी तैयारी में लगे थे। जो राजनीतिक दल इन पांच राज्यों में चुनावों की प्रक्रिया में नहीं थे, वह गठबंधन के तहत लोकसभा के चुनाव में आने की पूरी रणनीति बनाने में लगे हुए थे। इस रणनीति के आधार पर आगे की पूरी व्यवस्थाएं और तैयारियां की गई हैं।