I.N.D.I.A Alliance: विपक्षी गठबंधन की तैयारियों से चिंतित नहीं भाजपा, हर राज्य में खास प्लान बनाएगी पार्टी
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विस्तार
इंडिया गठबंधन ने दिल्ली में आयोजित अपनी चौथी बैठक में सभी राज्यों में आपसी सहयोग के जरिए लोकसभा चुनाव लड़ने का निर्णय कर लिया है। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने कहा है कि सभी राज्य इकाइयां स्थानीय स्तर पर सीटों की तालमेल करेंगी। कोई सहमति न बन पाने पर केंद्रीय इकाई हस्तक्षेप करेगी। वहीं, भाजपा विपक्ष की इस रणनीति को बेहद गंभीरता के साथ देख रही है। वह विपक्ष के इस प्लान से चिंतित नहीं है। उसे भरोसा है कि मोदी के सामने विपक्ष कोई चेहरा पेश नहीं कर पाएगा और उसके ट्रंप कार्ड मोदी के सामने विपक्षी दलों की एकता सफल नहीं होगी। कुछ राज्यों में इसका आंशिक असर हो सकता है। अलग-अलग राज्यों में विशेष चुनावी रणनीति बनाकर इसका मुकाबला किया जाएगा।
भाजपा के एक शीर्ष नेता ने अमर उजाला से कहा कि नेतृत्व के मुद्दे पर विपक्षी दलों के बीच जिस तरह खींचतान मची हुई है, उसे देखते हुए यह आसान नहीं लग रहा है कि विपक्षी गठबंधन किसी एक चेहरे पर सहमत हो पाएगा। मल्लिकार्जुन खरगे को गठबंधन का संयोजक या पीएम उम्मीदवार बनाने पर चर्चा हुई है, लेकिन इस पर कोई सहमति न बन पाना बताता है कि इस पर अंतिम रूप से सभी दलों का सहमत होना आसान नहीं होगा।
नीतीश कुमार के लोग उन्हें प्रधानमंत्री पद के दावेदार के रूप में देखना चाहते हैं, तो ममता बनर्जी ने अभी से यह कहना शुरू कर चुकी हैं कि नेतृत्व का चयन चुनावों के बाद कर लिया जाएगा। कांग्रेस राहुल गांधी के अलावा किसी दूसरे को नेता के रूप में स्वीकार नहीं कर पाएगी। ऐसे में इस बात की कोई संभावना नहीं है कि नेतृत्व के मुद्दे पर सभी विपक्षी दल एक नाम पर सहमत हो जाएं। यदि किसी तरह सहमति बना भी ली गई, तो प्रधानमंत्री मोदी की जनता के बीच लोकप्रियता के सामने विपक्ष चेहरा टिकने की स्थिति में नहीं है।
नेता के मुताबिक, जनता नकारात्मक विकल्प को कभी स्वीकार नहीं करती। इसके पहले इसी प्रकार एक बार पूरा विपक्ष इंदिरा गांधी को हटाने के लिए एकजुट हो गया था। इंदिरा गांधी ने चुनाव में यही मुद्दा बनाया। उन्होंने कहा कि वे गरीबी हटाओ की बात करती है, जबकि विपक्ष इंदिरा हटाओ की बात कहता है। इसका चुनाव परिणाम हुआ था कि कांग्रेस बहुमत के साथ सत्ता में आई और विपक्ष की कोशिशें सफल नहीं हुईं।
उसी प्रकार आज मोदी के पास देश को दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनाने का मजबूत सपना है, जनता के जीवन स्तर को सुधारने का मजबूत संकल्प है और 10 साल के जनहित के काम करने का विश्वसनीय ट्रैक रिकॉर्ड है। जबकि विपक्ष के पास केवल मोदी हटाओ का नारा है। जनता देख रही है कि किस प्रकार विपक्षी दल केवल अपना स्वार्थ और अपनी राजनीति बचाने के लिए एकजुट हो रहे हैं। ऐसे में उन्हें नहीं लगता कि जनता विपक्ष के इस तर्क को कभी स्वीकार करेगी।
स्वयं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ही यह मोर्चा संभाल लिया है। जानकारी के मुताबिक, मोदी ने भाजपा सांसदों की बैठक के दौरान यह कहा कि उनके पास देश को मजबूत करने का सपना है और वे दिन-रात इसके लिए काम कर रहे हैं, लेकिन विपक्ष के पास केवल एक मुद्दा है। वह उन्हें उखाड़ फेंकने की बात कह रहा है। स्पष्ट है कि भाजपा बाद में इसी लाइन को अपनाएगी और जनता के बीच इसे प्रचारित करेगी। माना जा रहा है कि उसे इसका लाभ मिल सकता है।
अलग-अलग राज्यों में बनेगी अलग रणनीति
विपक्षी दलों के बीच पूरे देश में एक साथ आकर चुनाव लड़ने पर सहमति बन भी जाए, तो भी इसका बहुत ज्यादा असर नहीं होगा। राजस्थान, मध्यप्रदेश, छत्तीसगढ़, हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड ऐसे राज्य हैं, जहां भाजपा का सीधा मुकाबला कांग्रेस से है। यहां कोई अन्य क्षेत्रीय दल उपस्थित नहीं हैं। ऐसे में कोई दल यहां अपना वोट गठबंधन को ट्रांसफर कराने की स्थिति में नहीं होगा।
इसी प्रकार तृणमूल कांग्रेस का तमिलनाडु या तेलंगाना में, या डीएमके का यूपी-बिहार में कोई जनाधार नहीं है। ऐसे में इनके साथ आने से भी वोट ट्रांसफर की स्थिति नहीं बनेगी और स्थिति लगभग उसी तरह की होगी जैसा कि पहले के चुनावों में रही है। यूपी-बिहार, जम्मू-कश्मीर, पंजाब, दिल्ली या ओडिशा-आंध्र प्रदेश में एक से अधिक गैरभाजपाई दल मौजूद हैं। यदि यहां पर गठबंधन की स्थिति जमीन पर उतरी, तो कुछ परिस्थिति में कुछ अंतर आ सकता है।
हालांकि भाजपा नेताओं का मानना है कि जिस तरह यूपी में सपा-बसपा-आरएलडी जैसे दलों के साथ आने के बाद भी कार्यकर्ताओं के स्तर पर गठबंधन नहीं बन पाया और विपक्ष का यह गठबंधन असरहीन रहा, उसी प्रकार पूरे देश में इसका बहुत ज्यादा असर नहीं होगा। लेकिन इसके बाद भी, भाजपा सभी राज्यों में गठबंधन के दलों की स्थिति को देखते हुए अलग-अलग रणनीति बनाएगी। भाजपा का अनुमान है कि उसके पास ज्यादा जमीनी नेता, संगठन और मुद्दे हैं। इसके सहारे वह विपक्ष की किसी भी चुनौती को बेहतर तरीके से मात देने में सफल रहेगी।