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32 बार हारने पर बोले श्यामबाबू, मैं हारूं या जीतूं पर भ्रष्टाचार के खिलाफ जंग जारी रखूंगा

Sun, 07 Apr 2019 10:37 AM IST
अजय सिंह न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भुवनेश्वर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भुवनेश्वर Published by: अजय सिंह Updated Sun, 07 Apr 2019 10:37 AM IST
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I fought elections 32 times, will continue the fight against corruption said Shyam Babu Subudhi
डॉ श्याबाबू सुबुद्धि - फोटो : ANI

ओडिशा में निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में ताल ठोक रहे डॉ श्यामबाबू सुबुद्धि 1962 से लगातार चुनाव लड़ रहे हैं। वो लगातार कई लोकसभा, विधानसभा और राज्यसभा का चुनाव लड़ चुके हैं जिसमें उन्हें काफी नुकसान भी उठाना पड़ा है। श्यामबाबू ने कहा कि मैं 32 बार चुनाव लड़ चुका हूं। मैं भ्रष्टाचार के खिलाफ जंग जारी रखूंगा। मेरा चुनाव चिह्न् क्रिकेट का बल्ला है जिसपर प्रधानमंत्री पद का उम्मीदवार लिखा हुआ है। 

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84 साल के डॉ श्यामबाबू ने आगे कहा कि मैं अस्का और बेरहमपुर से लोकसभा चुनाव लड़ रहा हूं। मैं ट्रेनों, बसों में और बाजार स्थानों पर अपना चुनाव प्रचार करता हूं। उन्होंने आगे कहा, इससे फर्क नहीं पड़ता कि मैं हारूं या जीतूं पर मैं लड़ता रहूंगा। 
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बता दें कि श्याबाबू सुबुद्धि 30 बार विभिन्न चुनावों में मैदान में उतर चुके हैं और हर बार उन्हें हार मिली है। ओडिशा के बेरहमपुर के रहने वाले 84 साल के श्यामबाबू एक बार फिर से चुनाव लड़ने को तैयार हैं। उन्हें उम्मीद है कि शायद आगामी लोकसभा चुनाव में उन्हें अपनी पहली जीत मिल जाएगी।

सुबुद्धि ने बताया, 'मैंने पहली बार 1962 में चुनाव लड़ा था और तब से अब तक कई चुनाव लड़ चुका हूं। जिसमें लोकसभा से लेकर ओडिशा विधानसभा का चुनाव भी शामिल है। मुझे कई राजनीतिक पार्टियों से प्रस्ताव मिले लेकिन मैंने हमेशा निर्दलीय उम्मीदवार के तौर पर चुनाव लड़ा है।' इस साल उन्होंने अस्का और बेरहमपुर सीट से अपना नामांकन दाखिल किया है।

उन्होंने गर्व से बताया, 'मैंने पीवी नरसिम्हा राव और बिजू पटनायक के खिलाफ चुनाव लड़ा है।' सुबुद्धि ने कहा कि वह राज्य की वर्तमान राजनीति से नाखुश हैं और इस बात से नाराज हैं कि कैसे मतदाताओं को लुभाने के लिए पैसों का इस्तेमाल होता है। उन्होंने पर्चे बांटकर लोकसभा चुनाव के लिए प्रचार करना शुरू कर दिया है। उन्होंने बताया कि चुनाव लड़ने के लिए उन्हें जनता से भी पैसा मिलता है।


सुबुद्धि पेशे से होम्योपैथी डॉक्टर हैं और वह अपनी कमाई का अधिकतर हिस्सा चुनाव में खर्च कर देते हैं। उनके दो बेटे और दो बेटियां हैं। दोनों की शादी हो गई है। पिछले साल उनकी पत्नी का निधन हो चुका है। उन्होंने कहा, 'मेरे परिवार के सदस्यों ने मुझे कभी भी चुनाव लड़ने से मना नहीं किया। मेरी पत्नी ने हमेशा मुझे चुनाव लड़ने के लिए प्रेरित किया है। मैं जब तक स्वस्थ हूं तब तक चुनाव लड़ता रहूंगा।' 

 

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