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'मैं भगवान नहीं, तुकाराम मुंढे हूं': बॉम्बे हाईकोर्ट की फटकार पर बोले एफडीए कमिश्नर, यूं किया अपना बचाव

Thu, 03 Sep 2026 08:06 PM IST
Sunil Mehrotra सुनील मेहरोत्रा
Updated Thu, 03 Sep 2026 08:06 PM IST
सार

महाराष्ट्र के एफडीए प्रमुख तुकाराम मुढे अपनी कार्रवाईयों के चलते लगातार सुर्खियों में हैं। उनके कई एक्शन पर बॉम्बे हाईकोर्ट ने भी आपत्ति जताई है। कोर्ट की ओर से हाल में पड़ी फटकार के बाद तुकराम की ओर से अहम टिप्पणी की गई है। 

 

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‘I Am Not God, I Am Tukaram Mundhe’: FDA Commissioner After Bombay HC Rebuke
एफडीए आयुक्त तुकाराम मुंढे - फोटो : एएनआई

विस्तार

बॉम्बे हाईकोर्ट द्वारा अन्न एवं औषधि प्रशासन (एफडीए) के 'अति-उत्साही' और 'तानाशाही' रवैये पर लगाई गई कड़ी फटकार के बाद विभाग ने पुणे स्थित 'सिप्ला फार्मा एंड लाइफ साइंसेज लिमिटेड' की 'कैरी एंड फॉरवर्डिंग' यूनिट का दवा बिक्री लाइसेंस रद्द करने का फैसला वापस ले लिया है। अदालत ने इस मामले में एफडीए की कार्रवाई को प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों के खिलाफ करार दिया था। इसी पृष्ठभूमि में आयोजित एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान एफडीए आयुक्त तुकाराम मुंढे ने अदालत की सख्त टिप्पणियों पर अपना रुख स्पष्ट किया।

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प्रेस कॉन्फ्रेंस में जब पत्रकारों ने उच्च न्यायालय की 'क्या आप खुद को भगवान समझते हैं?' जैसी तल्ख टिप्पणी का हवाला देते हुए सवाल पूछा कि क्या कार्रवाई करने में जल्दबाजी की जा रही है, तो आयुक्त मुंढे ने कहा कि वह भगवान नहीं हैं, बल्कि तुकाराम मुंढे हैं और एक लोकसेवक के रूप में अपना काम कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि इस बारे में उनके मन में कोई संदेह या अस्पष्टता नहीं है। इसके साथ ही उन्होंने अपना प्रशासनिक रुख दोहराते हुए आश्वासन दिया कि कार्रवाई के दौरान यदि कोई त्रुटियां या गलतियां हुई होंगी और अदालत ने उन्हें ध्यान में लाया है, तो विभाग उन पर गंभीरता से काम करेगा और सुधार करेगा।
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गौरतलब है कि सुनवाई के दौरान उच्च न्यायालय ने एफडीए की अति-सख्त कार्रवाई पर गहरी नाराजगी व्यक्त की थी। अदालत ने टिप्पणी करते हुए कहा था कि छोटी-मोटी गलतियों के लिए सीधे व्यवसाय बंद कर देना या लाइसेंस रद्द कर देना मच्छर मारने के लिए तलवार का इस्तेमाल करने जैसा है। अदालत ने आरोप लगाया था कि नियमों का पालन कराते वक्त व्यावहारिक दृष्टिकोण अपनाने के बजाय एफडीए जल्दबाजी में कठोर निर्णय ले रहा है।

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