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Hydrogen: हाइड्रोजन बनेगा अक्षय ऊर्जा का भंडार, लेकिन कीमत कम रखने की कठिन चुनौती

Tue, 19 Aug 2025 07:40 PM IST
राहुल कुमार डिजिटल ब्यूरो, अमर उजाला, नई दिल्ली
डिजिटल ब्यूरो, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: राहुल कुमार Updated Tue, 19 Aug 2025 07:40 PM IST
सार

भारत का ध्यान अब हाइड्रोजन उत्पादन के क्षेत्र में एक वैश्विक शक्ति बनने की ओर है जिससे भविष्य के इस ईंधन को अपनी ताकत बनाया जा सके। देश ने 2030 तक दुनिया में कुल 10 करोड़ मीट्रिक टन के हाइड्रोजन उत्पादन में से कम से कम 10 फीसदी अपने स्तर पर हासिल करने का लक्ष्य निर्धारित किया है।      
 

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Hydrogen will become a store of renewable energy, but the difficult challenge is to keep the price low
फोटो- केंद्रीय मंत्री श्रीपद येसो नाइक हाइड्रोजन समिट में। - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

विभिन्न प्रकार के प्रदूषण से जिस तरह पर्यावरणीय असंतुलन बढ़ रहा है, दुनिया के सामने स्वच्छ ऊर्जा हासिल करने का दबाव बढ़ता जा रहा है। लेकिन भारत ने अपनी कुल ऊर्जा खपत का 50 फीसदी नवीकरणीय ऊर्जा क्षेत्र से हासिल करने का लक्ष्य समय से पांच वर्ष पहले हासिल कर लिया है। भारत का ध्यान अब हाइड्रोजन उत्पादन के क्षेत्र में एक वैश्विक शक्ति बनने की ओर है जिससे भविष्य के इस ईंधन को अपनी ताकत बनाया जा सके। देश ने 2030 तक दुनिया में कुल 10 करोड़ मीट्रिक टन के हाइड्रोजन उत्पादन में से कम से कम 10 फीसदी अपने स्तर पर हासिल करने का लक्ष्य निर्धारित किया है।      

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देश में जल्द ही ट्रेन, बसों से लेकर कारों तक को हाइड्रोजन से दौड़ाने की तैयारी है। लेकिन हाइड्रोजन सेक्टर के विशेषज्ञों के अनुसार इसमें सबसे बड़ी बाधा हाइड्रोजन के अधिक मूल्य की है। जनता की क्रय क्षमता में लाकर इसकी खपत बढ़ाने के लिए केंद्र-राज्य सरकारों को इस पर भारी सब्सिडी देनी पड़ेगी। इसके बाद ही हाइड्रोजन भविष्य का ईंधन बन सकता है। इसके लिए केंद्र-राज्य सरकारों को ईंधन से प्राप्त होने वाली आय से भी समझौता करना पड़ेगा। लेकिन पेट्रोल-डीजल पर भारी टैक्स लगाकर पैसा हासिल कर कल्याणकारी योजनाएं चलाने वाली सरकारें इससे कितना समझौता कर पाएंगी, यह देखने वाली बात होगी।   
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हाइड्रोजन क्षेत्र में आज यहां खड़ा है भारत
केंद्र सरकार ने दि नेशनल ग्रीन हाइड्रोजन मिशन (NGHM) चलाकर देश को हाइड्रोजन उत्पादन के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाने का लक्ष्य निर्धारित किया है। अब तक इस योजना के अंतर्गत देश की 19 कंपनियों को 8.62 लाख टन हाइड्रोजन प्रति वर्ष उत्पादन का ठेका दिया जा चुका है। 2030 तक दुनिया में हाइड्रोजन का उत्पादन 10 करोड़ मीट्रिक टन तक पहुंचने का अनुमान है। भारत इसका 10 प्रतिशत उत्पादन हासिल करने का लक्ष्य लेकर आगे बढ़ रहा है। 
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पांच साल पहले हासिल किया ये लक्ष्य
औद्योगिक संगठन फिक्की में मंगलवार को हाइड्रोजन पर आयोजित एक समिट में केंद्रीय मंत्री श्रीपद येसो नाइक ने कहा कि नवीकरणीय ऊर्जा उत्पादन के क्षेत्र में भारत बहुत आगे पहुंच गया है। देश ने कुल ऊर्जा खपत के 50 प्रतिशत से अधिक ऊर्जा नवीकरणीय ऊर्जा के क्षेत्र से प्राप्त करने के लक्ष्य को समय से पांच साल पहले ही हासिल कर लिया है।

श्रीपद येसो नाइक ने बताया कि इसी वर्ष के जून महीने में नवीकरणीय स्रोतों से कुल 237 गीगावाट ऊर्जा उत्पादित की गई। इसमें 119 गीगावाट सौर ऊर्जा से, 52 गीगावाट पवन ऊर्जा से, 8.78 नाभिकीय ऊर्जा से और 49 गीगावाट जलविद्युत ऊर्जा से हासिल किया गया है। यह कुल ऊर्जा खपत के 50 प्रतिशत से अधिक है। 


उन्होंने कहा कि स्वच्छ ऊर्जा हासिल करने के क्षेत्र में हाइड्रोजन ऊर्जा एक बड़ी उपलब्धि होगी और अब तक हासिल की गई नवीकरणीय ऊर्जा इसके लिए आधार का काम करेगी। भारत ने 2030 तक 500 गीगावाट ऊर्जा हरित ऊर्जा क्षेत्र से प्राप्त करने का लक्ष्य निर्धारित किया है। हाइड्रोजन इसमें बड़ी भूमिका निभा सकता है।

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