मानवाधिकार दिवस: तिनका तिनका इंडिया अवॉर्ड्स, इस साल 17 बंदी और जेल स्टाफ चयनित
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मानवाधिकार दिवस पर दिए जाने वाले तिनका तिनका इंडिया अवॉर्ड्स आज हरियाणा की फरीदाबाद स्थित जिला जेल से वीडियो के जरिए जारी किए गए। ये पुरस्कार जेलों में सृजन करने वाले बंदियों और विशेष काम कर रहे जेल अधिकारियों व कर्मचारियों को सम्मान स्वरूप दिए जाते हैं। भारत की जानी-मानी जेल सुधारक डॉ. वर्तिका नन्दा ने तिनका तिनका अवार्ड्स की परिकल्पना की है।
यह पुरस्कारों का छठवां वर्ष है। हर वर्ष इस वर्ष 3 श्रेणियां रहीं- पेंटिंग, विशेष प्रतिभा और जेल प्रशासकों के लिए पुरस्कार। पेंटिंग की श्रेणी में 7 बंदियों को पुरस्कार दिया गया। जेल में विशेष काम के लिए 6 बंदियों, जबकि जेल में विशेष सेवा के लिए 4 जेलकर्मियों को सम्मानित किया गया।
दिल्ली की तिहाड़ जेल में बंद नरेंद्र नाथ सरकार (42) ने इस वर्ष पेंटिंग श्रेणी में प्रथम पुरस्कार जीता। नरेंद्र नाथ सरकार जेल में आने से पहले बीएसएफ में कार्यरत थे। द्वितीय पुरस्कार उत्तर प्रदेश की मिर्जापुर जेल में बंद रज्जू कोल (74) को मिला है। वहीं इसी श्रेणी में तृतीय पुरस्कार पश्चिम बंगाल की दार्जलिंग डिस्ट्रिक्ट करेक्शनल होम में बंद फिरोज राय (41) को मिला है। फिरोज राय जेल में आने से पहले चाय के बगीचे में काम करते थे।
इस वर्ष पेंटिग श्रेणी में 2 सांत्वना पुरस्कार भी दिए गए हैं। दिल्ली की केंद्रीय जेल नंबर 16, मंडोली में बंद वैशाली कौशल (21) और केंद्रीय जेल कोयम्बटूर के बंदी माधवन (36) को संयुक्त रूप से यह पुरस्कार दिया गया है। पेंटिंग में उत्तर प्रदेश की बिजनौर जिला जेल के 2 बंदियों रफीक अहमद और परवेज को भी पुरस्कार दिया गया है।
इस वर्ष विशेष प्रतिभा की श्रेणी में 6 बंदियों को पुरस्कार दिए गए हैं
- उत्तर प्रदेश की मैनपुरी जेल में 53 वर्षीय अजय चौहान पिछले 4 वर्ष से बंद हैं। अजय जेल में रेडियो का संचालन करते हैं। महामारी के चलते बंदियों से उनके परिजनों की होने वाले मुलाकातों को रद्द कर दिया गया था। लेकिन अजय ने रेडियो प्रोग्राम कर इस बात को सुनिश्चित किया कि कोई बंदी इस कठिन समय में अपने आप को अकेला महसूस न करे।
- उत्तर प्रदेश की फिरोजाबाद जिला जेल में 40 वर्षीय अमिताभ बच्चन नामक बंदी 2009 से बंद हैं। वह सजायाफ्ता बंदी हैं। महामारी कोविड-19 के दौर में बच्चन ने जेल के भीतर सैनिटाइजिंग का कार्य करने में जेल प्रशासन की सरहानीय मदद की।
- 37 वर्षीय चिराग किशोरभाई राणा गुजरात की अहमदाबाद जेल में पिछले 11 साल से सजायाफ्ता बंदी हैं। जेल में रहते हुए राणा ने 35 से अधिक कोर्सों में प्रशिक्षण प्राप्त किया है। राणा, फिलहाल बंदियों को डिप्रेशन जैसी बीमारी से उबरने के लिए मदद कर रहे हैं। वह जेल की साइकोलॉजिकल सेल का संचालन कर रहे हैं।
- चंडीगढ़ की मॉडल जेल के 36 वर्षीय बंदी अशोक कुमार ने महामारी कोविड-19 से निपटने के लिए इस वर्ष मास्क और ग्रॉउंस बनाने में जेल प्रशासन की मदद की। अशोक व्यावसायिक रूप से टेलर हैं।
- छत्तीसगढ़ की बिलासपुर जेल में 33 वर्षीय माधवी दास सजायाफ्ता बंदी हैं। उन्हें अभी जेल में 20 वर्ष की सजा और पूरी करनी है। माधवी जेल के हेल्थ वॉरियर हैं। जेल में अस्पताल के संचालन में वह अपनी सेवाएं दे रही हैं।
- 24 वर्षीय रजत संजय उत्तर प्रदेश की आगरा जेल के बंदी हैं। जेल में रेडियो की शुरुआत से लेकर अब तक वह इसके सक्रिय सदस्य रहे हैं। महामारी के दौर में रजत ने इस बात का ध्यान रखा कि कोई भी बंदी डिप्रेशन में न जाए। रजत में इस समय बंदियों के लिए रेडियो पर मोटिवेशनल प्रोग्राम्स बनाए।
इस वर्ष 4 जेल अधिकारियों व कर्मचारियों को तिनका तिनका अवॉर्ड्स दिए गए हैं
- इनमें, मध्य प्रदेश की छिंदवाड़ा जेल के डिप्टी सुपरिटेंडेंट स्व. राजकुमार त्रिपाठी (56), महाराष्ट्र की यरवडा जेल, पुणे के डीआईजी (जेल) योगेश दत्तात्रेय देसाई (50), हरियाणा की फरीदाबाद जिला जेल के हेड वॉर्डर शमशेर सिंह (47) और दिल्ली की केंद्रीय जेल नंबर 16, मंडोली की गायत्री भास्कर का नाम शामिल हैं। इस बार जेल अधिकारियों के सम्मान स्व. राजकुमार त्रिपाठी के नाम किए गए हैं।
- 57 वर्षीय राजकुमार त्रिपाठी, मध्य प्रदेश की छिंदवाड़ा जेल में डिप्टी सुपरिंटेंडेंट के पद पर तैनात थे। ड्यूटी के दौरान कोविड-19 से संक्रमित हो गए थे। लेकिन इसके बावजूद अंतिम समय तक वह जेल में अपनी सेवाएं देते रहे। आखिर में इलाज के दौरान त्रिपाठी का निधन हो गया। त्रिपाठी को मरणोपरांत अवॉर्ड दिया गया, जिसे उनकी पत्नी और बेटे ने स्वीकार किया।
बता दें कि वर्तिका नन्दा जेल सुधारक हैं और तिनका तिनका भारतीय जेलों पर उनकी श्रृंखला है। वे 2014 में भारत के राष्ट्रपति से स्त्री शक्ति पुरस्कार से सम्मानित हो चुकी हैं। जेलों पर उनके काम को दो बार लिम्का बुक ऑफ रिकॉर्ड्स में भी जगह मिली है। 'तिनका तिनका डासना' और 'तिनका तिनका मध्य प्रदेश' जेलों की जिंदगी का दस्तावेज देती उनकी लिखी किताबें हैं।