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अमृतसर ट्रेन हादसाः मानवाधिकार आयोग ने पंजाब सरकार को भेजा नोटिस, अफसरों की लापरवाही से हुआ हादसा
डिजिटल ब्यूरो, नई दिल्ली
Updated Mon, 22 Oct 2018 07:20 PM IST
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Amritsar rail accident
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राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने अमृतसर ट्रेन हादसे पर पंजाब सरकार और रेलवे बोर्ड के चेयरमैन को नोटिस जारी किया है। आयोग ने इस मामले में चार हफ्तों में विस्तृत रिपोर्ट मांगी है। आयोग का मानना है कि स्थानीय अधिकारियों की लापरवाही के चलते यह गंभीर हादसा हुआ है।
राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने अमृतसर रेल हादसे पर मीडिया रिपोर्ट्स पर स्वतः संज्ञान लेते हुए पंजाब सरकार के मुख्य सचिव और रेल मंत्रालय के अधीन आने वाले रेलवे बोर्ड के चेयरमैन अश्विनी लोहानी को नोटिस जारी कर चार हफ्ते में विस्तृत रिपोर्ट सौंपने को कहा है। आयोग ने राज्य सरकार से कहा है कि हादसे में पीड़ित परिवारों को राहत और पुनर्वास की जानकारी सौंपी जाए, साथ ही अमृतसर के अस्पतालों में घायलों के इलाज से संबंधित जानकारी भी उपलब्ध कराई जाए।
आयोग इस निष्कर्ष पर पहुंचा है कि रेल की पटरियों पर बैठ कर लोगों ने कोई गंभीर गलती नहीं की है। आयोग के मुताबिक स्थानीय अधिकारियों की लापरवाही के चलते ही यह भयानक हादसा हुआ है। आयोग का मानना है कि स्थानीय अधिकारियों और आयोजकों ने दशहरा मेला देखने आए लोगों की भीड़ का उचित तरीके से प्रबंधन नहीं किया। यह राज्य सरकार की जिम्मेदारी थी कि कार्यक्रम के दौरान नागरिकों की सुरक्षा का ध्यान रखा जाना चाहिए था। आयोग ने उन मीडिया रिपोर्ट्स का हवाला दिया जिसमें कहा गया था कि रेलवे को कार्यक्रम की जानकारी ही नहीं थी और इसे गंभीर चूक मानते हुए मानवाधिकारों का उल्लंघन माना है।
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गौरतलब है कि अमृतसर में 19 अक्टूबर को रावण दहन के दौरान ट्रेन की चपेट में आने से 59 लोगों की मौत हो गई और 50 से ज्यादा लोग घायल हो गए थे। जिनमें से कुछ की हालत गंभीर बनी हुई है। गर्वनमेंट रेलवे पुलिस ने इसे गैर-इरादतन हत्या का मामला मानते हुए अज्ञात लोगों के खिलाफ केस दर्ज किया है। रेलवे अधिकारियों का कहना है कि उन्हें इस मामले में दोषी नहीं ठहराया जा सकता, क्योंकि उन्हें कार्यक्रम की जानकारी ही उपलब्ध नहीं कराई गई थी।
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राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने अमृतसर रेल हादसे पर मीडिया रिपोर्ट्स पर स्वतः संज्ञान लेते हुए पंजाब सरकार के मुख्य सचिव और रेल मंत्रालय के अधीन आने वाले रेलवे बोर्ड के चेयरमैन अश्विनी लोहानी को नोटिस जारी कर चार हफ्ते में विस्तृत रिपोर्ट सौंपने को कहा है। आयोग ने राज्य सरकार से कहा है कि हादसे में पीड़ित परिवारों को राहत और पुनर्वास की जानकारी सौंपी जाए, साथ ही अमृतसर के अस्पतालों में घायलों के इलाज से संबंधित जानकारी भी उपलब्ध कराई जाए।
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आयोग इस निष्कर्ष पर पहुंचा है कि रेल की पटरियों पर बैठ कर लोगों ने कोई गंभीर गलती नहीं की है। आयोग के मुताबिक स्थानीय अधिकारियों की लापरवाही के चलते ही यह भयानक हादसा हुआ है। आयोग का मानना है कि स्थानीय अधिकारियों और आयोजकों ने दशहरा मेला देखने आए लोगों की भीड़ का उचित तरीके से प्रबंधन नहीं किया। यह राज्य सरकार की जिम्मेदारी थी कि कार्यक्रम के दौरान नागरिकों की सुरक्षा का ध्यान रखा जाना चाहिए था। आयोग ने उन मीडिया रिपोर्ट्स का हवाला दिया जिसमें कहा गया था कि रेलवे को कार्यक्रम की जानकारी ही नहीं थी और इसे गंभीर चूक मानते हुए मानवाधिकारों का उल्लंघन माना है।
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गौरतलब है कि अमृतसर में 19 अक्टूबर को रावण दहन के दौरान ट्रेन की चपेट में आने से 59 लोगों की मौत हो गई और 50 से ज्यादा लोग घायल हो गए थे। जिनमें से कुछ की हालत गंभीर बनी हुई है। गर्वनमेंट रेलवे पुलिस ने इसे गैर-इरादतन हत्या का मामला मानते हुए अज्ञात लोगों के खिलाफ केस दर्ज किया है। रेलवे अधिकारियों का कहना है कि उन्हें इस मामले में दोषी नहीं ठहराया जा सकता, क्योंकि उन्हें कार्यक्रम की जानकारी ही उपलब्ध नहीं कराई गई थी।