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IAF: वायु योद्धा के लिए भगवान बनी भारतीय वायुसेना, मात्र डेढ़ घंटे में नागपुर से पुणे पहुंचाया दिल
Wed, 26 Jul 2023 07:13 PM IST
शिवेंद्र तिवारी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: शिवेंद्र तिवारी
Updated Wed, 26 Jul 2023 07:13 PM IST
सार
मानव हृदय को आर्मी इंस्टीट्यूट ऑफ कार्डियो थोरेसिक साइंसेज में भर्ती वायु योद्धा में प्रत्यारोपित करने के लिए बुधवार सुबह नागपुर से पुणे भेजा गया। शरीर के महत्वपूर्ण अंग को भारतीय वायु सेना के एएन-32 विमान पर 700 किलोमीटर से अधिक दूर पुणे ले जाया गया।
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हृदय
- फोटो : istock
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विस्तार
महाराष्ट्र के पुणे में एक वायु योद्धा दिल की बीमारी की वजह से अपनी जिंदगी की कठिन जंग लड़ रहा था। डॉक्टरों ने जल्द से जल्द उसके हृदय प्रत्यारोपण की जरूरत बताई थी लेकिन कम समय में इसकी उपलब्धता की चुनौती थी। इस चुनौती को स्वीकार करते हुए बुधवार को भारतीय वायुसेना का एक विमान महज 90 मिनट में मानव हृदय को नागपुर से पुणे लाया।
700 किलोमीटर से अधिक दूर ले जाया गया हृदय
मानव हृदय को आर्मी इंस्टीट्यूट ऑफ कार्डियो थोरेसिक साइंसेज में भर्ती वायु योद्धा में प्रत्यारोपित करने के लिए बुधवार सुबह नागपुर से पुणे भेजा गया। शरीर के महत्वपूर्ण अंग को भारतीय वायु सेना के एएन-32 विमान पर 700 किलोमीटर से अधिक दूर पुणे ले जाया गया। इससे पहले अंग को प्रशासन द्वारा बनाए गए ग्रीन कॉरिडोर के माध्यम से भेजा गया था।
क्या है ग्रीन कॉरिडोर?
एक रक्षा अधिकारी ने बताया कि उड़ान का समय लगभग 90 मिनट था। बता दें कि अंग प्रत्यारोपण में तेजी लाने और जीवन बचाने के उद्देश्य से ग्रीन कॉरिडोर बनाया गया है। ग्रीन कॉरिडोर के लिए, यातायात विभाग एक महत्वपूर्ण अंग को एक स्थान से दूसरे स्थान तक जाने में लगने वाले समय के 60 से 70 प्रतिशत से भी कम समय में एक स्थान से दूसरे स्थान ले जाने में मदद करता है।
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700 किलोमीटर से अधिक दूर ले जाया गया हृदय
मानव हृदय को आर्मी इंस्टीट्यूट ऑफ कार्डियो थोरेसिक साइंसेज में भर्ती वायु योद्धा में प्रत्यारोपित करने के लिए बुधवार सुबह नागपुर से पुणे भेजा गया। शरीर के महत्वपूर्ण अंग को भारतीय वायु सेना के एएन-32 विमान पर 700 किलोमीटर से अधिक दूर पुणे ले जाया गया। इससे पहले अंग को प्रशासन द्वारा बनाए गए ग्रीन कॉरिडोर के माध्यम से भेजा गया था।
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क्या है ग्रीन कॉरिडोर?
एक रक्षा अधिकारी ने बताया कि उड़ान का समय लगभग 90 मिनट था। बता दें कि अंग प्रत्यारोपण में तेजी लाने और जीवन बचाने के उद्देश्य से ग्रीन कॉरिडोर बनाया गया है। ग्रीन कॉरिडोर के लिए, यातायात विभाग एक महत्वपूर्ण अंग को एक स्थान से दूसरे स्थान तक जाने में लगने वाले समय के 60 से 70 प्रतिशत से भी कम समय में एक स्थान से दूसरे स्थान ले जाने में मदद करता है।
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