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Andhra Pradesh Liquor sale: आंध्र प्रदेश में शराब की बिक्री में भारी उछाल, राजस्व में हो रहा जबरदस्त इजाफा
Tue, 15 Nov 2022 09:28 PM IST
Amit Mandal
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, हैदराबाद
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, हैदराबाद
Published by: Amit Mandal
Updated Tue, 15 Nov 2022 09:28 PM IST
सार
कोविड-19 के नाम पर सरकार ने मई 2020 में शराब के दाम 75 फीसदी बढ़ाए ताकि पिछले वर्ष 25 प्रतिशत की वृद्धि के अलावा कुल राजस्व में कमी को बढ़ाया जा सके।
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Liquor consumption
- फोटो : social media
विस्तार
आंध्र प्रदेश में शराब की बिक्री का कारोबार तेजी से आगे बढ़ रहा है और राजस्व में भारी इजाफा हो रहा है। एपी बेवरेजेज कारपोरेशन लिमिटेड यानी APBCL द्वारा संकलित आंकड़ों के अनुसार, पिछले साल की इसी अवधि में 2022-23 वित्तीय वर्ष के पहले सात महीनों में औसत राजस्व 2,085 करोड़ रुपये से 2,370 करोड़ रुपये प्रति माह तक पहुंच गया।
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सीएम जगनमोहन ने शराब निषेध का फैसला पलट दिया
आंकड़ों के मुताबिक, 2021-22 में भारतीय निर्मित शराब (IML) और बीयर के 347.75 लाख पेटी बेचे गए, इस साल अप्रैल और अक्टूबर के बीच यह संख्या 274.71 लाख पेटी तक पहुंच गई। एपीबीसीएल को 2021-22 में 25,023.44 करोड़ रुपये से चालू वित्त वर्ष के अंत तक रिकार्ड 28,440 करोड़ रुपये की कमाई की उम्मीद है। 2019 से तीन चरणों में पूर्ण शराब निषेध का वादा करने के बाद वाई एस जगन मोहन रेड्डी सरकार ने पिछले साल नीति को उलट दिया और इसे केवल प्रतिबंध तक सीमित कर दिया।
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कोविड-19 के नाम पर सरकार ने मई 2020 में शराब के दाम 75 फीसदी बढ़ाए ताकि पिछले वर्ष 25 प्रतिशत की वृद्धि के अलावा कुल राजस्व में कमी को बढ़ाया जा सके। लेकिन 2021 में उसने पड़ोसी राज्यों से तस्करी को रोकने के लिए कीमत में लगभग 40 प्रतिशत की कमी की, शराब सस्ती थी और गुणवत्ता वाले ब्रांड थे। इसने पिछले कुछ वर्षों में आईएमएल की बिक्री को बढ़ाने में योगदान दिया, जबकि बीयर की खपत 2019 की तुलना में कम हो गई।
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हालांकि, इस मुद्दे पर सरकार का रुख बिल्कुल अलग है। मुख्यमंत्री वाई एस जगन मोहन रेड्डी के हवाले से कहा गया कि कीमतों में बढ़ोतरी और अन्य उपायों के कारण बिक्री कम हुई है। राजस्व (आबकारी) के विशेष मुख्य सचिव रजत भार्गव ने बताया कि सरकार शराब की खपत में कमी की नीति के लिए प्रतिबद्ध है।