{"_id":"57f402014f1c1b9232270cce","slug":"hrd-seeks-prez-nod-for-inquiry-into-complaints-against-amu-vc","type":"story","status":"publish","title_hn":"एएमयू वीसी के खिलाफ होगी जांच, शिक्षा मंत्रालय ने राष्ट्रपति से मांगी मंजूरी","category":{"title":"India News","title_hn":"भारत","slug":"india-news"}}
एएमयू वीसी के खिलाफ होगी जांच, शिक्षा मंत्रालय ने राष्ट्रपति से मांगी मंजूरी
एजेंसी/ नई दिल्ली
Updated Wed, 05 Oct 2016 12:54 AM IST
विज्ञापन
अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
केंद्रीय मानव संसाधन विकास मंत्रालय (एचआरडी) ने राष्ट्रपति से अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी (एएमयू) के वाइस चांसलर के खिलाफ जांच की अनुमति मांगी है। वीसी पर अनियमितता के आरोप हैं। सूत्रों ने बताया कि एएमयू के वीसी लेफ्टिनेंट जनरल (रिटायर्ड) जमीरूद्दीन शाह के खिलाफ मंत्रालय को वित्तीय और प्रशासनिक अनियमितता की शिकायत मिली है। इसे राष्ट्रपति के पास भेज दिया गया है और उनसे मामले की जांच कराने के लिए अनुमति मांगी गई है।
शाह की नियुक्ति 2012 में यूपीए सरकार ने की थी। उनका कार्यकाल अगले साल समाप्त हो रहा है। मंत्रालय के सूत्रों ने बताया कि एक अन्य मामले में इलाहाबाद विश्वविद्यालय के वीसी के खिलाफ भी अनियमितता की शिकायत मिली है। इस मामले में भी जांच के लिए राष्ट्रपति की अनुमति मांगी गई है।
इस बीच, शाह ने अपने ऊपर लगे सभी आरोपों को गलत करार दिया है। उन्होंने कहा है कि वह किसी भी तरह की जांच का सामना करने को तैयार हैं। शाह ने कहा है कि उनके ऊपर वित्तीय और प्रशासनिक अनियमितता के आरोप निहित स्वार्थ के तहत उनकी छवि खराब करने के लिए लगाए गए हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन
शाह की नियुक्ति 2012 में यूपीए सरकार ने की थी। उनका कार्यकाल अगले साल समाप्त हो रहा है। मंत्रालय के सूत्रों ने बताया कि एक अन्य मामले में इलाहाबाद विश्वविद्यालय के वीसी के खिलाफ भी अनियमितता की शिकायत मिली है। इस मामले में भी जांच के लिए राष्ट्रपति की अनुमति मांगी गई है।
विज्ञापन
इस बीच, शाह ने अपने ऊपर लगे सभी आरोपों को गलत करार दिया है। उन्होंने कहा है कि वह किसी भी तरह की जांच का सामना करने को तैयार हैं। शाह ने कहा है कि उनके ऊपर वित्तीय और प्रशासनिक अनियमितता के आरोप निहित स्वार्थ के तहत उनकी छवि खराब करने के लिए लगाए गए हैं।
विज्ञापन