फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   India News ›   How will the Yogi government agree to this plan of Arvind Kejriwal Traders also expressed their opposition Latest News Update

प्रदूषण से जंग: केजरीवाल के इस प्लान से कैसे सहमत होगी योगी सरकार, व्यापारियों ने भी जताया विरोध

Wed, 17 Nov 2021 09:49 PM IST
अमित शर्मा डिजिटल ब्यूरो, अमर उजाला, नई दिल्ली
डिजिटल ब्यूरो, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: अमित शर्मा Updated Wed, 17 Nov 2021 09:49 PM IST
सार

दरअसल, नोएडा-ग्रेटर नोएडा में लगभग 10 हजार मध्यम और लघु इकाइयां काम कर रही हैं। इसी तरह गाजियाबाद में भी हजारों फैक्ट्रियां उत्पादन कर रही हैं। गुरूग्राम और फरीदाबाद भी कोरोना काल से उबरते हुए धीरे-धीरे सामान्य हालात की ओर बढ़ रहे हैं। यदि एनसीआर एरिया में भी लॉकडाउन लगाया जाता है तो इससे पूरे क्षेत्र में कामकाज ठप पड़ जाएगा।

विज्ञापन
How will the Yogi government agree to this plan of Arvind Kejriwal Traders also expressed their opposition Latest News Update
pollution in delhi ncr - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

सुप्रीम कोर्ट की फटकार के बाद केजरीवाल सरकार ने राजधानी को प्रदूषण से बचाने के लिए दिल्ली-एनसीआर एरिया में लॉकडाउन लगाने का प्रस्ताव रखा है। दिल्ली सरकार का कहना है कि केवल राजधानी में लॉकडाउन लगाने से प्रदूषण से बचाव संभव नहीं होगा। इसके लिए पूरे एनसीआर में लॉकडाउन लगाया जाना चाहिए। लेकिन दिल्ली सरकार के प्रस्ताव से आम आदमी पार्टी के ही लोग सहमत नहीं हैं। लोगों का कहना है कि लॉकडाउन लगाना प्रदूषण से लड़ाई का सही और स्थाई उपाय नहीं है। इससे आर्थिक नुकसान भी होगा जिसे उठाने की स्थिति में व्यापारी वर्ग नहीं है।

विज्ञापन


दरअसल, नोएडा-ग्रेटर नोएडा में लगभग 10 हजार मध्यम और लघु इकाइयां काम कर रही हैं। इसी तरह गाजियाबाद में भी हजारों फैक्ट्रियां उत्पादन कर रही हैं। गुरूग्राम और फरीदाबाद भी कोरोना काल से उबरते हुए धीरे-धीरे सामान्य हालात की ओर बढ़ रहे हैं। यदि एनसीआर एरिया में भी लॉकडाउन लगाया जाता है तो इससे पूरे क्षेत्र में कामकाज ठप पड़ जाएगा। इन क्षेत्रों से माल ले जाकर देश के दूसरे हिस्सों में आर्थिक गतिविधियों में तेजी आती है। लेकिन इस क्षेत्र में लॉक डाउन लगाने से देश के दूसरे हिस्सों में भी सीधे असर पड़ सकता है। इससे देश के आर्थिक मोर्चे पर संकट एक बार फिर गहरा सकता है।
विज्ञापन


बेरोजगारी का संकट भी बढ़ेगा
कोरोना काल ने देश के असंगठित क्षेत्र के मजदूरों को लगभग भुखमरी के कगार पर लाकर खड़ा कर दिया था। आशंका है कि यदि प्रदूषण के नाम पर लॉकडाउन लगाने का एक और जोखिम उठाया जाता है तो इससे उन मजदूरों को दुबारा भारी संकट झेलना पड़ सकता है। वहीं, लॉकडाउन होने से कंपनियां एक बार फिर मजदूरों की छंटनी करने की ओर बढ़ सकती हैं जिससे मजदूरों का पलायन बढ़ सकता है। यदि ऐसा होता है तो पूरे देश की आर्थिक परेशानी बढ़ सकती है। इसलिए विशेषज्ञों का सुझाव है कि कोई भी फैसला लेने से पहले सभी पक्षों पर विचार विमर्श कर लेना चाहिए। सुझाव है कि लॉकडाउन की बजाय अन्य विकल्पों पर विचार करना चाहिए।    
विज्ञापन
विज्ञापन


राजनीतिक संकट भी
यदि पूरे एनसीआर क्षेत्र में लॉकडाउन लगाने का विचार किया भी जाता है तो उत्तर प्रदेश जैसे राज्य जिन्हें थोड़े ही समय में चुनाव में जाना है, इस फैसले को लागू करने से बचना चाहेंगे क्योंकि इसके कारण सरकार को व्यापारियों और मजदूरों की नाराजगी झेलनी पड़ सकती है जिसे उठाने के लिए सरकार कतई सहमत नहीं होगी। एनसीआर का सबसे बड़ा हिस्सा नोएडा, ग्रेटर नोएडा और गाजियाबाद उत्तर प्रदेश में ही आता है। इसी प्रकार एनसीआर के फरीदाबाद-गुरूग्राम वाला राज्य हरियाणा भी किसानों के आंदोलन के बीच इस फैसले के साथ नहीं जाना चाहेगा जो अभी भी किसानों की भारी नाराजगी झेल रहा है।  

आम आदमी पार्टी से जुड़े व्यापारिक संगठन चैंबर ऑफ ट्रेड एंड इंडस्ट्री (सीटीआई) ने कहा है कि दिल्ली के साथ-साथ पूरा देश दो साल तक कोरोना के कारण लॉकडाउन में रहा। इस दौरान आर्थिक गतिविधियां लगभग ठप पड़ी रहीं। इसके कारण पूरे देश को भारी आर्थिक नुकसान हुआ जिससे अब तक बाहर नहीं निकला जा सका है। संगठन ने कहा कि ऐसे हालात में एक और लॉकडाउन व्यापार की कमर तोड़ने वाला होगा। इसका भारी आर्थिक नुकसान होगा जिसे सहने की स्थिति में व्यापारी नहीं है। अन्य व्यापारिक संगठनों ने भी इसी तरह किसी संभावित लॉकडाउन के फैसले का विरोध किया है।    

भाजपा ने भी किया हमला

  • दिल्ली भाजपा प्रवक्ता खेमचंद शर्मा ने अमर उजाला से कहा कि अरविंद केजरीवाल सरकार अब तक कोई ऐसा काम नहीं कर पाई है जिसे प्रशासनिक दृष्टि से बेहतर कहा जा सके। उन्होंने कहा कि सरकार किसी समस्या का स्थाई और प्रभावी उपाय खोजने की बजाय केवल प्रचार करने और काम को टालने का रवैया अपनाती है जो प्रदूषण के मामले में भी दिखाई पड़ रहा है। यमुना की सफाई हो या कोरोना में इलाज का मुद्दा, केजरीवाल सरकार हर जगह असफल साबित हुई है।
  • भाजपा नेता ने कहा कि दिल्ली का सबसे ज्यादा प्रदूषण पीडब्ल्यूडी की खराब सड़कों के कारण होता है। सरकार को सड़कें ठीक कराना चाहिए जिससे सड़कों पर ज्यादा धूल न उड़े और धूल प्रदूषण को कम किया जा सके। सरकार को सार्वजनिक वाहनों को बढ़ाना चाहिए जिससे लोग हर समय सुलभ सार्वजनिक वाहन का विकल्प प्राप्त कर सकें और निजी वाहनों के प्रयोग से बचें।
  • खेमचंद शर्मा ने कहा कि दिल्ली सरकार ने 1400 करोड़ रूपये का पर्यावरण फंड एकत्र किया हुआ है, सरकार को इस पैसे से दिल्ली के सभी 272 वार्ड में स्म़ग टावर लगाना चाहिए जिससे लोगों को साफ हवा उपलब्ध कराई जा सके। सड़कों के दोनों किनारों पर पेड़ लगाना भी प्रदूषण से लड़ाई में मदद कर सकता है। दिल्ली को केवल सीएनजी और इलेक्ट्रिक वाहनों वाला क्षेत्र घोषित करने के विकल्पों पर विचार करना चाहिए और पुराने वाहनों को सड़क पर उतारने पर गंभीरता से कार्रवाई करनी चाहिए। सरकार को इन स्थाई उपायों को अपना कर प्रदूषण को कम करने की कोशिश करनी चाहिए।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News apps, iOS Hindi News apps और Amarujala Hindi News apps अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed