विजय माल्या: 7000 करोड़ का बकाया न चुकाकर निकल लिए विदेश
विजय माल्या का सरकारी और निजी बैंकों पर करीब 7,000 करोड़ रुपए का बाकाया
सबसे ज्यादा 1600 करोड़ रुपए का बाकाया भारतीय स्टेट बैंक का
वर्ष 2005 में ही विजय माल्या ने किंगफिशर एयरलांइस को लांच किया
विजय माल्या 2 मार्च, 2016 को ही देश छोड़कर जा चुके
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किंगफिशर के मालिक(यूनाइटेड ब्रेवरीस समूह) विजय माल्या जिनके सितारे कभी बुलंदी पर थे वो आज खुद को ही बचाते फिर रहे हैं। भारत के सबसे हाईप्रोफाइल उद्योगपतियों में से एक विजय माल्या देश के प्रमुख बैंकों की देनदारियों को लेकर विवादों में हैं। विजय माल्या पर बैंकों का करोड़ों रुपया का बकाया है। पर बैंकों को यह नहीं पता है कि उनका करोड़ों रुपया का लोन वापस भी हो पाएगा या नहीं।
न्यूज एजेंसी पीटीआई के मुताबिक विजय माल्या का देश के 14 सरकारी और निजी बैंकों पर करीब 7,000 करोड़ रुपए का बाकाया है। वहीं बैंक अभी करोड़ों रुपए के लोन में से सिर्फ 1200 करोड़ रुपए की रिकवरी कर पाए हैं। विजय माल्या के ऊपर सबसे ज्यादा 1600 करोड़ रुपए का बकाया भारतीय स्टेट बैंक का है। इसी तरह पीएनबी, आईडीबीआई, बैंक ऑफ इंडिया, बैंक ऑफ बड़ौदा, यूनाइटेड बैंक ऑफ इंडिया, सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया, यूको बैंक, कॉरपोरेशन बैंक, स्टेट बैंक ऑफ मैसूर, इंडियन ओवरसीज बैंक, फेडरल बैंक, पंजाब एंड सिंध बैंक, एक्सिस बैंक का करोड़ों रुपए का कर्जा चुकाना है।
विजय माल्या अपने खर्चीले आयोजनों के लिए जाने जाते हैं। साथ ही उनके महंगे शौक उनके खर्चों को और ज्यादा ही बढ़ाते हैं। विजय माल्या के खर्चों को आप इसी तरह से जान सकते हैं कि उनके पास 200 विंटेज कारों का एक काफिला है। कारों के शौकीन रहे विजय माल्या ने एक फॉर्मूला वन टीम भी खरीदी है।
विजय माल्या को इतना बड़ा उद्योग विरासत में मिला है। विजय माल्या अपने पिता विट्टल माल्या के निधन के बाद वर्ष 1983 में यूबी समूह के चेयरमैन बन गए। विजय माल्या जब कंपनी के चेयरमैन बने, तब उनकी उम्र सिर्फ 28 साल थी।
अपने पिता के बिजनेस को विजय माल्या ने धीरे-धीरे बढ़ाया और अपनी योजनाओं को आगे पेश किया। इसी के चलते वर्ष 1999 में विजय माल्या के अपनी किंगफिशर स्ट्रांग को बाजार में पेश किया। आज यह देश में सबसे ज्यादा बिकने वाली बियर बन गई है। बाद में भाजपा और जेडीएस के समर्थन से 2002 में विजय माल्या राज्ससभा सांसद बन गए।
कैसे बनाया साम्राज्य और कैसे हुआ तबाह?
धीरे-धीरे विजय माल्या ने अपने बिजनेस के साम्राज्य को आगे बढ़ाने में लग गए। वर्ष 2005 में ही विजय माल्या ने किंगफिशर एयरलांइस को लांच किया। वहीं विदेशी व्हिस्की ब्रांड शॉ वॉलेस को खरीदा जो आज रॉयल चैलेंजर्स के नाम से जानी जाती है। वर्ष 2006 में हर्बर्टरसंस को खरीदा जो व्हिस्की ब्रांड बैगपाइपर और रोमानोव वोदका को बनाती थी।
वर्ष 2007 में फॉर्मूला वन टीम स्पाइकर को खरीदा जिसका बाद में नाम बदलकर फोर्स इंडिया कर दिया। बाद में एयर डेक्कन का अधिग्रहण किया। ब्रिटिश व्हिस्की बनाने वाली फर्म वाइटे एंड मैक्के को 595 मिलियन पौंड में खरीदा। वहीं वर्ष 2008 में आईपीएल की टीम रॉयल चैलेंजर्स को करीब 800 करोड़ रुपए में खरीदा।
विजय माल्या एक तरफ नई कंपानियों खरीदते गए और दूसरी तरफ बैंकों से लोन लेते गए। पर बैंकों ने इस बात की सुध नहीं ली कि क्या विजय माल्या वो पैसा कैसे वापस करेंगे? फिर धीरे-धीरे विजय माल्या के ऊपर बढ़ते कर्जे की पोल खुलती गई और वर्ष 2012 की शुरुआत से ही माल्या का साम्राज्य बिखरने लगा।
वर्ष 2012 में किंगफिशर एयरलाइंस में काम करने वाले लोगों ने सैलरी न मिलने के कारण हड़ताल कर दी। इसके के बाद आयकर टैक्स ने किंगफिशर एयरलाइंस के खातों को फ्रीज कर दिया। कुछ समय बाद सरकार ने किंगफिशर एयरलाइंस का लाइसेंस भी निरस्त कर दिया। विजय माल्या की हालत खराब थी और वो अपने हिस्सेदारी बेचकर अपना कर्जा चुकाने का ख्याल सजाने लगे। इसके बाद ब्रिटिश एल्कोहल्कि ब्रेवजर्स फर्म डियाजियो ने यूनाइटेड स्पिरिट में हिस्सेदारी खरीदी।
वर्ष 2013 में डिजाजियो ने यूनाइटेड स्पिरिट लिमिटेड में 27 फीसदी हिस्सेदारी 6500 करोड़ रुपए में खरीद ली थी। पर किंगफिशर एयरलांइस को लोन देने वालों को कोई भी पैसा नहीं मिला। बाद में वर्ष 2014 में यूनाइटेड बैंक ने यूनाइटेड ब्रेवरीस होल्डिंग्स को विलफुल डिफॉल्टर घोषित कर दिया। धीरे-धीरे विजय माल्या का अपने ही बिजनेस पर नियंत्रण कम होने लगा।
माल्या के बिजनेस की हालत को देखकर वर्ष 2015 में विदेशी कंपनी डियाजियो ने विजय माल्या से कंपनी का चेयरमेन का पद छोड़ने के लिए कहा। पर उस समय विजय माल्या ने ऐसा करने से मना कर दिया। एक साल के अंदर ही विजय माल्या की हालत और ज्यादा खराब होने लगी। वर्ष 2016 में विजय माल्या कंपनी का चेयरमैन का पद छोड़ने के लिए तैयार हो गए। इसके लिए उन्होंने डियाजियों से 515 करोड़ रुपए लिए थे। जब रिकवरी ट्रिब्यूनल को इस बात की जानकारी हुई तो माल्या से लोन की रिकवरी करने के लिए आगे बढ़ी। पर तब तक देर हो चुकी थी।
कर्मचारियों ने पीएम मोदी से मांगी मदद
अपने रुपए की रिकवरी के लिए देश के 13 बैंक सुप्रीम कोर्ट पहुंचे। तब जाकर पता चला कि विजय माल्या 2 मार्च, 2016 को ही देश छोड़कर जा चुके हैं। सुप्रीम कोर्ट में यह जानकारी 9 मार्च, 2016 को अटॉर्नी जनरल मुकुल रोहतगी ने दी। किंगफिशर के मालिक विजय माल्या आज कहां और किस देश में हैं, इस बात का किसी को पता नहीं है। इससे पहले किंगफिशर के 1500 कर्मचारी अपने पैसों के लिए माल्या को एक खुला पत्र भी लिख चुके हैं।
कर्मचारियों ने विजय माल्या के लिए लिखा है कि 'तुम्हारा दिल साफ नहीं है और तुम्हारा हाथों में हमारा खून हैं। कर्मचारियों ने अपने पैसे के भुगतान के लिए पीएम मोदी से भी मदद मांगी है। कुछ दिनों पहले अपने ऊपर लगे आरोपों पर बोलते हुए विजय माल्या ने कहा था कि " आज मुझे इस बात का दुख है कि तेल की कीमतें इतनी कम होने के बावजूद भी आज किंगफिशर अपनी उड़ान नहीं भर पा रही है। पिछले कुछ दिनों से मीडिया में एक अभियान चल रहा है।
उन्होंने मुझको निशाने पर ले रखा है। इन सबके के बावजूद में यह कह सकता हूं कि टीआरपी के चक्कर सच को ज्यादा दिन तक बंधक बना कर नहीं रखा जा सकता है। विजय माल्या की सिर्फ देश के अंदर ही नहीं बल्कि विदेशों में भी संपतियां हैं। न्यूयॉर्क सिटी के ट्रंप टॉवर्स और सेन फ्रांसिसको में घर है। दक्षिण अफ्रीका में एक गेम रिसोर्ट है और गोवा में समुद्र के सामने आलीशान विला है। 200 लक्जरी विंटेज कारों का काफिला और एक गल्फस्ट्रीम प्राइवेट जेट है।
किंगफिशर के मालिक विजय माल्या को देश से बाहर जाने से रोकने के लिए 13 बड़े बैंकों की याचिका पर बुधवार को सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हुई। आज सुप्रीम कोर्ट ने विजय माल्या को नोटिस जारी किया है।
किस बैंक का कितना बकाया
स्टेट बैंक ऑफ इंडिया-1600 करोड़
पीएनबी-800 करोड़ रुपए
आईडीबीआई-800 करोड़ रुपए
बैंक ऑफ इंडिया-650 करोड़ रुपए
बैंक ऑफ बड़ौदा-550 करोड़ रुपए
यूनाइटेड बैंक ऑफ इंडिया-430 करोड़ रुपए
सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया-410 करोड़ रुपए
यूको बैंक-320 करोड़ रुपए
कॉरपोरेशन बैंक-310 करोड़
स्टेट बैंक ऑफ मैसूर-150 करोड़
इंडियन ओवरसीज बैंक-140 करोड़
फेडरल बैंक-90 करोड़
पंजाब एंड सिंध बैंक-60 करोड़
एक्सिस बैंक-50 करोड़