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Explained: भारत कब तक बनेगा दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था, पीएम नरेंद्र मोदी की गारंटी में कितना दम?

Fri, 28 Jul 2023 03:28 PM IST
हिमांशु मिश्रा स्पेशल डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
स्पेशल डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: हिमांशु मिश्रा Updated Fri, 28 Jul 2023 03:28 PM IST
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सार
सवाल ये है कि भारत कब तक दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन सकता है? बीते नौ साल में देश की अर्थव्यवस्था कहां से कहां पहुंची? आइए समझते हैं... 
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How long will India become the world's third largest economy, how much power in PM Narendra Modi's guarantee?
भारतीय अर्थव्यवस्था - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा है कि इस सरकार के तीसरे कार्यकाल में भारत में दुनिया की टॉप तीन अर्थव्यवस्थाओं में शामिल होगा। उन्होंने बुधवार को कहा कि यह मोदी की गारंटी है। प्रधानमंत्री के इस बयान पर विशेषज्ञों की अलग-अलग राय है। ऐसे में सवाल ये है कि भारत कब तक दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन सकता है? बीते नौ साल में देश की अर्थव्यवस्था कहां से कहां पहुंची? आइए समझते हैं... 

 

पहले जानिए पीएम मोदी का पूरा बयान 
दिल्ली के प्रगति मैदान में बुधवार को पुनर्विकसित अंतरराष्ट्रीय प्रदर्शनी और सम्मेलन केंद्र (IECC)  ‘भारत मंडपम’ का उद्घाटन करते हुए पीएम मोदी ने कहा कि 2014 में सत्ता में आने के बाद से पूरा देश उनकी सरकार की ओर से किए गए कामों का परिणाम देख रहा है। हमारे पहले कार्यकाल की शुरुआत में भारत वैश्विक अर्थव्यवस्थाओं में 10वें स्थान पर था। दूसरे कार्यकाल में आज भारत दुनिया की पांचवीं सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था है। ट्रैक रिकॉर्ड के आधार पर मैं देश को ये भी विश्वास दिलाता हूं कि हमारे तीसरे कार्यकाल में भारत शीर्ष तीन अर्थव्यवस्था में पहुंच कर रहेगा और ये मोदी की गारंटी है।
 

2014 से अब तक क्या-क्या बदला? 
2014 में जब नरेंद्र मोदी सरकार सत्ता में आई, उस वक्त भारत अर्थव्यवस्था के मामले में दुनिया का दसवां देश था। तब देश की जीडीपी दो ट्रिलियन डॉलर के करीब था। 2023 के आंकड़ें देखें तो ये बढ़कर 3.75 ट्रिलियन डॉलर पहुंच चुका है। अब भारत दुनिया की पांचवीं सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था है। केंद्र सरकार ने 2025 तक पांच ट्रिलियन डॉलर तक जीडीपी पहुंचाने का लक्ष्य रखा था। हालांकि, कोरोना, रूस-यूक्रेन युद्ध और वैश्विक बाजार में मंदी के चलते जीडीपी ग्रोथ के रफ्तार में कमी आ गई है। 

मोदी सरकार के नौ साल के कार्यकाल में भारत ने दुनिया के पांच बड़े देशों को पीछे छोड़ा है। अब भारत दुनिया की पांचवीं सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था है। भारत ने इन नौ वर्षों में ब्रिटेन, रूस, फ्रांस, कनाडा और इटली को पीछे छोड़ दिया है। अब भारत से आगे पहले नंबर पर अमेरिका, दूसरे नंबर पर चीन, तीसरे नंबर पर जापान और चौथे नंबर पर जर्मनी है। 
 

भारत कब तक दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन सकता है? 
इसको लेकर कई रिपोर्ट्स आ चुकी हैं। अमेरिकी इन्वेस्टमेंट बैंक मॉर्गन स्टेनली के मुताबिक 2027 तक जापान और जर्मनी को पीछे छोड़कर भारत दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था हो जाएगा। 2031 तक भारत की जीडीपी आज की 3.75 ट्रिलियन से दोगुनी से ज्यादा यानी 7.5 ट्रिलियन डॉलर की हो जाएगी। 

आईएमएफ की रिपोर्ट भी कुछ इसी तरह की बात करती है। आईएमएफ का अनुमान है 2027 तक भारत की जीडीपी 5.4 ट्रिलियन डॉलर हो जाएगी। अमेरिकी इन्वेस्टमेंट बैंक गोल्डमैन सैक की भी एक रिपोर्ट आई है। इसके अनुसार, साल 2075 तक अमेरिका को पीछे छोड़कर भारत दुनिया की दूसरी सबसे बड़ी अर्थयवस्था हो जाएगी। तब चीन दुनिया की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था वाला देश होगा।  
 

क्या कहते हैं विशेषज्ञ? 
आर्थिक मामलों के जानकार प्रो. प्रह्लाद ने कहा, 'पिछले कुछ वर्षों में आर्थिक सुस्ती बढ़ी है। कोरोना, रूस-यूक्रेन युद्ध के चलते मंदी भी वैश्विक बाजार में देखने को मिली। इसके चलते कई देशों की अर्थव्यवस्था या तो बढ़ नहीं रहीं, या नीचे जाने लगी है। आंकड़े देखें तो ब्रिटेन की तीन फीसदी, फ्रांस की दो और रूस की एक फीसदी जीडीपी ही ग्रो कर पाई। ब्राजील की जीडीपी तो 15 फीसदी तक घट गई। ऐसे समय जब दुनिया के कई बड़े देशों की जीडीपी बदहाल थी, तब भी हमारा देश आगे बढ़ा। ये एक अच्छा संकेत है। भारत में उत्पादन की क्षमता बढ़ी है।'

प्रो. प्रह्लाद आगे कहते हैं, 'जीडीपी का आकार बड़ा होना अच्छी बात है, लेकिन हमें दूसरे पहलुओं पर भी फोकस करना चाहिए। खासतौर पर प्रति व्यक्ति आय बढ़ाने पर फोकस करना चाहिए। अभी भारत इस मामले में दुनिया के 125वें स्थान पर है। अगर प्रति व्यक्ति आय बढ़ेगी तो इसका असर देश की अर्थव्यवस्था पर भी होगी।'

उन्होंने कहा, '2014 के मुकाबले इसमें बढ़ोतरी हुई है, लेकिन अभी भी हम काफी पीछे हैं। 2014 में प्रति व्यक्ति आय करीब 80 हजार रुपये सालाना थी, जो अब बढ़कर 1.70 लाख रुपये से ज्यादा हो चुकी है। हालांकि, अभी भी 80 करोड़ लोग ऐसे हैं, जिन्हें सरकार गरीब मानती है।' प्रो. प्रह्लाद के अनुसार, 'भारत की आबादी भी तेजी से बढ़ रही है। ऐसी स्थिति में मजबूत जीडीपी के साथ-साथ प्रति व्यक्ति आय का बढ़ना जरूरी है।'
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