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तीसरी लहर कितनी दूर: नीति आयोग ने कहा- अगले 100 से 125 दिन भारत के लिए सबसे कठिन

Fri, 16 Jul 2021 06:14 PM IST
योगेश साहू न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली।
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली। Published by: योगेश साहू Updated Fri, 16 Jul 2021 06:14 PM IST
सार

नीति आयोग के सदस्य डॉ. वीके पॉल ने बताया कि डब्ल्यूएचओ ने तीसरी लहर का जिक्र करते हुए दरअसल दुनियाभर में मौजूद हकीकत पर जोर दिया है।

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How far is the third wave: NITI Aayog members said Prime Minister Modi gave us the target that the third wave should not come in the country
नीति आयोग के सदस्य स्वास्थ्य डॉ. वीके पॉल। - फोटो : ANI

विस्तार

कोरोना वायरस की लड़ाई में आगामी 100 से 125 दिन भारत के लिए सबसे कठिन हैं। इन्हीं दिनों में न सिर्फ देश को दूसरी लहर से बाहर निकालना है बल्कि नई लहर को आने से भी रोकना है। इस अवधि के दौरान टीकाकरण को इस गति पर लेकर आना है कि अगर संक्रमण बढ़ता भी है तो यह अधिक गंभीर या फिर जानलेवा न हो सके।

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यह जानकारी देते हुए नीति आयोग के सदस्य डॉ. वीके पॉल ने कहा कि अभी देश के 73 जिलों में रोजाना 100-100 से अधिक मामले मिल रहे हैं। जबकि 47 जिले ऐसे हैं जहां कोरोना की संक्रमण दर रोजाना 10 फीसदी से अधिक मिल रही है। मणिपुर में नौ, केरल में आठ, राजस्थान में छह और मेघालय-मिजोरम में पांच-पांच जिलों में सबसे ज्यादा सैंपल कोरोना संक्रमित पाए जा रहे हैं।
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डॉ. पॉल ने कहा कि सरकार एक तरफ फॉर्मा कंपनियों का हर क्षेत्र में सहयोग करते हुए वैक्सीन उत्पादन बढ़ा रही है और दूसरी ओर टीकाकरण भी तेजी से करवा रही है। यह वक्त जनता, सरकार और प्रशासन के लिए चुनौतियों से भरा हुआ है। जमीनी स्तर पर कार्य करने वाला हर कोरोना योद्घा राष्ट्रीय सम्मान के लायक है।
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प्रेस कान्फ्रेंस में डॉ. वीके पॉल ने तमिलनाडु पुलिस पर हुए आईसीएमआर के अध्ययन की जानकारी भी दी। बीते 24 जून को अमर उजाला ने इस अध्ययन को प्रकाशित किया था जिसके अनुसार कोरोना महामारी की लड़ाई लड़ रहे पुलिस जवानों का अलग अलग समूह लेकर यह जानने का प्रयास किया गया था कि वैक्सीन न देने, एक खुराक या फिर दो खुराक देने के बाद क्या असर पड़ता है। इसमें पता चला कि एक खुराक देने के बाद मृत्यु दर को 82 फीसदी तक कम किया जा सकता है। जबकि दोनों खुराक लेने वालों में यह मृत्युदर 95 फीसदी तक कम हो सकती है।
कोरोना वायरस की लड़ाई में आगामी 100 से 125 दिन भारत के लिए सबसे कठिन हैं। इन्हीं दिनों में न सिर्फ देश को दूसरी लहर से बाहर निकालना है बल्कि नई लहर को आने से भी रोकना है। इस अवधि के दौरान टीकाकरण को इस गति पर लेकर आना है कि अगर संक्रमण बढ़ता भी है तो यह अधिक गंभीर या फिर जानलेवा न हो सके।
यह जानकारी देते हुए नीति आयोग के सदस्य डॉ. वीके पॉल ने कहा कि अभी देश के 73 जिलों में रोजाना 100-100 से अधिक मामले मिल रहे हैं। जबकि 47 जिले ऐसे हैं जहां कोरोना की संक्रमण दर रोजाना 10 फीसदी से अधिक मिल रही है। मणिपुर में नौ, केरल में आठ, राजस्थान में छह और मेघालय-मिजोरम में पांच-पांच जिलों में सबसे ज्यादा सैंपल कोरोना संक्त्रस्मित पाए जा रहे हैं।


डॉ. पॉल ने कहा कि सरकार एक तरफ फॉर्मा कंपनियों का हर क्षेत्र में सहयोग करते हुए वैक्सीन उत्पादन बढ़ा रही है और दूसरी ओर टीकाकरण भी तेजी से करवा रही है। यह वक्त जनता, सरकार और प्रशासन के लिए चुनौतियों से भरा हुआ है। जमीनी स्तर पर कार्य करने वाला हर कोरोना योद्घा राष्ट्रीय सम्मान के लायक है।

प्रेस कान्फ्रेंस में डॉ. वीके पॉल ने तमिलनाडु पुलिस पर हुए आईसीएमआर के अध्ययन की जानकारी भी दी। बीते 24 जून को अमर उजाला ने इस अध्ययन को प्रकाशित किया था जिसके अनुसार कोरोना महामारी की लड़ाई लड़ रहे पुलिस जवानों का अलग अलग समूह लेकर यह जानने का प्रयास किया गया था कि वैक्सीन न देने, एक खुराक या फिर दो खुराक देने के बाद क्या असर पड़ता है। इसमें पता चला कि एक खुराक देने के बाद मृत्यु दर को 82 फीसदी तक कम किया जा सकता है। जबकि दोनों खुराक लेने वालों में यह मृत्युदर 95 फीसदी तक कम हो सकती है।

नीति आयोग के सदस्य डॉ. वीके पॉल ने बताया कि डब्ल्यूएचओ ने तीसरी लहर का जिक्र करते हुए दरअसल दुनियाभर में मौजूद हकीकत पर जोर दिया है। दुनिया के कई हिस्सों में हालात अच्छे से बदतर होते जा रहे हैं। दुनिया तीसरी लहर की तरफ बढ़ रही है। प्रधानमंत्री ने भी कहा है कि यह हमारे लिए चेतावनी है। सजगता-सतर्कता जरूरी है। स्पेन में हर हफ्ते सामने आने वाले मामलों में 64 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है। यूरोप के नीदरलैंड में एक हफ्ते में कोरोना के मामले 300 फीसदी तक बढ़े हैं। प्रधानमंत्री ने हमें यही टारगेट दिया है कि देश में तीसरी लहर नहीं आनी चाहिए। 




स्वास्थ्य मंत्रालय के संयुक्त सचिव लव अग्रवाल ने कहा कि डब्ल्यूएचओ ने तीसरी लहर का अंदेशा जताया है, लेकिन तीसरी लहर से ज्यादा हमें यह समझना होगा कि वह कितनी असरदार होगी। समय के साथ अगर लोगों में एंटीबॉडी कम होती हैं और वायरस में म्यूटेशन होता है तो ज्यादा मामले सामने आएंगे। तीसरी और चौथी लहर भी आ सकती है। अभी भी देश में दूसरी लहर पूरी तरह खत्म नहीं हुई है। मामले कम हुए हैं, लेकिन ये सीमित क्षेत्रों में अब भी मौजूद है। 4 मई के हफ्ते में ऐसे 531 जिले थे, जहां रोज 100 से ज्यादा नए मामले सामने आ रहे थे। अब ऐसे सिर्फ 73 जिले रह गए हैं। हालांकि, एनालिसिस बताता है कि जैसे-जैसे गतिविधियां बढ़ रही हैं, मास्क का इस्तेमाल कम होता जा रहा है।

पुलिसकर्मियों को टीके की दो खुराक 95 फीसदी मौत रोकने में सफल
जोखिम का अधिक सामना करने वाले पुलिसकर्मियों को कोविड-19 टीके की दो खुराक देने से डेल्टा वेरिएंट के कारण दूसरी लहर में कोरोना वायरस से 95 प्रतिशत मौत रोकने में सफलता मिली है। यह जानकारी आईसीएमआर के अध्ययन में सामने आई। नीति आयोग के सदस्य (स्वास्थ्य) डॉ. वीके पॉल ने यह अध्ययन पेश किया जिसे तमिलनाडु में कराया गया था। कोविड-19 से होने वाली मौत को रोकने में टीके की प्रभाव क्षमता पता लगाने के लिए यह अध्ययन कराया गया था।

करीब 1,17,524 पुलिसकर्मियों पर अध्ययन किया गया जिनमें से 17,059 को टीका नहीं लगा था जबकि 32,792 को टीके की एक खुराक और 67,673 पुलिसकर्मियों को टीके की दोनों खुराक लग चुकी थी। अध्ययन में पता चला कि टीका नहीं लगवाने वाले पुलिसकर्मियों में कोविड-19 के कारण मौत का प्रतिशत 20 था, जबकि एक खुराक लेने वालों में यह सात फीसदी और दूसरा खुराक लेने वालों में चार प्रतिशत था।

हमारा टीका प्रभावी और काफी सुरक्षित है: पॉल

साथ ही जिन पुलिसकर्मियों ने टीके की पहली खुराक ली थी उनमें टीके की प्रभाव क्षमता 82 प्रतिशत थी और दोनों खुराक लेने वालों में यह 95 प्रतिशत थी। अध्ययन में कहा गया कि अधिक जोखिम वाले पुलिसकर्मियों को कोविड-19 टीके की दोनों खुराक देने से डेल्टा वेरिएंट के कारण आई दूसरी लहर में कोरोना वायरस से 95 फीसदी मौत रोकने में सफलता मिली।

अध्ययन के मुताबिक, टीका नहीं लेने वालों में प्रति एक हजार पर मौत का आंकड़ा 1.17, आंशिक रूप से टीकाकरण कराने वालों में 0.21 फीसदी और पूरी तरह टीकाकरण कराने वालों में यह 0.06 फीसदी था। पॉल ने अध्ययन को साझा करते हुए कहा कि गंभीर संक्रमण से बचने में कोविड-19 का टीका काफी महत्वपूर्ण है।

पॉल ने कहा कि हम कहना चाहते हैं कि हमारा टीका प्रभावी है और काफी सुरक्षित है। गर्भवती महिलाओं और बच्चों को दूध पिलाने वाली महिलाओं को भी इसे लेना चाहिए। कैंसर एवं मधुमेह पीड़ित रोगियों को इसकी ज्यादा जरूरत है। उन्होंने कहा कि हमें सिर्फ टीका ही नहीं लेना चाहिए बल्कि संक्रमण रोकने के लिए मास्क लगाना भी जरूरी है।

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