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कोरोना वायरस से संक्रमित पहला मरीज कौन था, जैविक हथियार का दावा सच तो नहीं?
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- फोटो : PTI
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कोरोना वायरस चीन के वुहान शहर में सबसे पहले फैला, इसकी जानकारी पूरी दुनिया को है, लेकिन इस बात की जानकारी अभी तक किसी को नहीं है कि आखिर कोरोना फैला कैसे? कोरोना वायरस फैलने के बाद चीन के वुहान के वेट बाजार को बंद कर दिया गया। वुहान के जिस वेट मार्केट बंद कर दिया गया, उस बाजार में जिंदा जानवर से लेकर अनेक प्रजाति के जानवरों और पक्षियों के मांस बिकते थे।
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शुरुआत में माना गया कि कोरोना वायरस चमगादड़ से इंसानों में फैला। बाद में कहा गया कि दवाई या खाना के जरिए इंसानों में कोरोना पहुंचा, क्योंकि चीन कई जंगली जानवरों का इस्तेमाल दवाई बनाने और खाने में करता है। कुछ दिन पहले एक शोध हुआ है जिसमें दावा किया गया कि कोरोना वायरस पैंगोलिन के जरिए इंसानों में पहुंचा, क्योंकि पैंगोलिन में ऐसे वायरस मिले हैं जो कोरोना वायरस से मेल खाते हैं।
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चीन का जैविक हथियार है कोरोना वायरस?
कई रिपोर्ट में दावा किया गया है कि कोरोना वायरस का जानवरों से इंसान में फैलना बस एक अफवाह है, जबकि सच्चाई यह है कि चीन ने ही इस वायरस को लैब में तैयार किया। ऐसे में कोरोना वायरस चीन का एक जैविक हथियार हो सकता है। इसके अलावा कई रिपोर्ट्स में यह भी कहा गया कि इस वायरस को अमेरिकी सैनिक चीन के वुहान शहर में लाए, हालांकि अभी पूरी दुनिया के दर्जनों वायरस विशेषज्ञ यह मानकर चल रहे हैं कि कोरोना वायरस चमगादड़ के जरिए पैंगोलिन में पहुंचा और पैंगोलिन से इंसान में पहुंचा। वैज्ञानिकों का कहना है कि इस बात का कोई सबूत नहीं है कि चीनी या अमेरिकी सरकार ने अपने मकसद के लिए कोरोना वायरस को फैलाया, हालांकि सीएनएन की रिपोर्ट के मुताबिक अधिकतर एक्सपर्ट इसी बात पर सहमत हैं कि कोरोना वायरस लैब से लीक हुआ है।
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वेट बाजार को लेकर अलग-अलग हैं राय
कोलंबिया विश्वविद्यालय के पब्लिक हेल्थ ग्रेड स्कूल में प्रोफेसर डॉक्टर साइमन एंथोनी ने जैविक हथियार के दावे को खारिज कर दिया है। साइमन एंथोनी प्रिडिक्ट (PREDICT) के सदस्य भी हैं। बता दें कि प्रिडिक्ट एक वैश्विक प्रोग्राम है जो जानवरों में वायरस को लेकर रिसर्च करता है। प्रिडिक्ट प्रोग्राम के तहत अभी तक कोरोना जैसे 180 वायरस खोज हुई है। दुनियाभर के तमाम विशेषज्ञों का अभी तक यह मानना है कि चीन के वुहान के वेट बाजार से ही कोरोना वायरस फैला है, हालांकि रिसर्च में यह भी बात सामने आई है कि जिस इंसान में सबसे पहले कोरोना वायरस की पुष्टि हुई थी उसका वेट बाजार से सीधा कोई संबंध नहीं था।
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फॉक्स न्यूज ने 31 मार्च को एक सनसनीखेज जानकारी दी थी कि वेट बाजार के पास ही दो लैब हैं जो चमगादड़ को लेकर रिसर्च काम करते हैं, हालांकि चीन की सरकार ने वेट बाजार के पास इस तरह के किसी लैब के होने से इनकार कर दिया। रटगर्स विश्वविद्यालय में जीव विज्ञान के प्रोफेसर और जैविक हथियार के एक्सपर्ट डॉक्टर रिचर्ड एब्राइट ने सीएनएन को एक ई-मेल के जरिए बताया है कि लैब में कोरोना वायरस को तैयार करने की रिपोर्ट में सच्चाई हो सकती है। उन्होंने कहा कि यह संभव है कि लैब से किसी गलती के कारण वायरस इंसानों में आ गया। इस दावे को खारिज करना उचित नहीं है।ॉ
एक किसान कारण बाजार में पहुंचा कोरोना?
सीएनएन की रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि किसी किसान की वजह से भी कोरोना फैल सकता है। रिपोर्ट में कहा गया है कि यदि चमगादड़ वाले सिद्धांत पर भरोसा करें तो कई किसान अपने खेतों में चमगादड़ के मल गुआनो का इस्तेमाल खाद के रूप में करते हैं। ऐसे किसान गुआनो के लिए चमगादड़ों के ठिकाने पर जाते हैं और गुआनो को इकट्ठा करके लाते हैं और खेतों में डालते हैं। ऐसे में हो सकता है कि चमगादड़ के मल से ही किसान में कोरोना वायरस फैला और किसान के जरिए वेट बाजार तक पहुंचा।
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चीन में कोरोना वायरस से संक्रमण का पहला मामला
साइंसडायरेक्ट डॉट कॉम पर छपी एक रिपोर्ट के मुताबिक कोरोना वायरस से संक्रमित पहले 41 मरीजों में से एक तिहाई का वुहान के वेट बाजार से कोई सीधा संबंध नहीं था। इनमें से पहले मरीज में कोरोना के संक्रमण के लक्षण एक दिसंबर से दिखने शुरू हो गए थे, लेकिन पहले मरीज में महामारी का कोई लक्षण नहीं मिला। इस मामले के सामने आने के बाद वुहान के अधिकारियों ने सार्वजनिक स्वास्थ्य चेतावनी जारी की और उसके दो दिन बाद यानी 1 जनवरी को वेट बाजार बंद कर दिया।
17 नवंबर को मिला कोरोना का पहला मामला
दक्षिण चीन मॉर्निंग पोस्ट के मुताबिक चीन में कोरोना का पहला मामला 17 नवंबर को ही मिला था। कोरोना वायरस से संक्रमित पहले शख्स की उम्र 55 साल थी, हालांकि शख्स कोरोना मुक्त हुआ या नहीं। इसकी कोई जानकारी उपलब्ध नहीं है। कोलंबिया विश्वविद्यालय में माइक्रो बायोलॉजी के प्रोफेसर विंसेंट रैनिएलो के मुताबिक वुहान के वेट मछली बाजार में जाने वाले लोग पहले से ही संक्रमित थे। ऐसे में कोरोना के लिए वेट बाजार को जिम्मेदार बनाना उचित नहीं है। 17 नवंबर के बाद हर रोज पांच नाए मामले सामने लगे और 15 दिसंबर तक संक्रमितों की संख्या 27 पहुंच गई, जबकि 20 दिसंबर तक यही संख्या 60 के आंकड़े को पार कर गई।