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जांबाजी...गलवां में 350 चीनी सैनिकों पर भारी पड़े बिहार रेजिमेंट 100 जवान

Sun, 21 Jun 2020 08:39 PM IST
गौरव पाण्डेय न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: गौरव पाण्डेय Updated Sun, 21 Jun 2020 08:39 PM IST
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How Bihar Regiment soldiers removed Chinese observation post from PP-14 in Galwan valley
भारतीय-चीनी सेनाएं (फाइल फोटो) - फोटो : एएनआई

पूर्वी लद्दाख के श्योक और गलवां नदी पर वाई जंक्शन के पास 15 जून की शाम जहां तीन इंफेंट्री डिवीजन के कमांडर और अन्य अधिकारियों की चीनी अधिकारियों के साथ बातचीत होनी थी, वहां पर चीन की अवैध निगरानी चौकी थी। 16 बिहार रेजिमेंट की पहली टुकड़ी पर जब चीन के सैनिकों ने हमला किया तो कमांडिंग अफसर कर्नल संतोष बाबू की शहादत ने बाकी जवानाें को आपे से बाहर कर दिया। भारतीय सेना के करीब 100 जांबाजों ने चीन के 350 सैनिकों पर ऐसा धावा बोला कि हर तरफ लाशें बिछने लगीं। पेट्रोलिंग प्वाइंट-14 पर चीन के तंबुओं को उखाड़ दिया गया।

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चीनी चौकी को हटवाने के लिए एक छोटी टुकड़ी को वहां भेजा गया। उस चौकी पर 10-12 जवान तैनात थे। बिहार रेजिमेंट के जवानों ने चीनी सैनिकों से कहा कि वे वहां से दूर चले जाएं। हालांकि चीनी सैनिकों ने ऐसा करने से इनकार कर दिया। तब भारतीय टुकड़ी ने वहां से लौटकर अपनी यूनिट को सारा हाल बताया। उसके बाद 16 बिहार रेजिमेंट के कमांडिंग ऑफिसर कर्नल संतोष बाबू के नेतृत्व में 50 जवानों की टुकड़ी फिर उस जगह पहुंची और चीनी सैनिकों से कहा कि वह भारत का क्षेत्र और उसे खाली कर दे।
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इस बीच भारतीय गश्ती दल उस जगह से लौट गया, लेकिन चीनी सैनिकों ने अपने पीछे की चौकियों से करीब 350 जवानों को बुला लिया और अपनी स्थिति मजबूत कर ली। सूत्रों ने बताया कि उसके बाद जैसे ही भारतीय दल वहां पहुंचा, तो ऊंचे स्थान पर पत्थरों और हथियारों से लैस चीनी सैनिकों ने उन पर हमला कर दिया।

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बाबू के गिरते ही चीनियों पर टूट पड़े बिहारी

दोनो पक्षों में बातचीत शुरू ही हुई थी कि वह गरमागरमी में बदल गई। उसके बाद भारतीय जवानों ने उनके तंबुओं को उखाड़ना शुरू कर दिया। इस पर पहले से तैयार चीनी सैनिकों ने भारतीय दल पर धावा बोल दिया और उनके निशाने पर बिहार रेजिमेंट के कमांडर और हवलदार पलानी आ गए। जैसे ही कमांडिंग ऑफिसर नीचे गिरे, बिहारियों ने अपना आपा खो दिया और संख्या में कम होने के बावजूद उन्होंने चीनी सैनिकों को बेरहमी से पीटना शुरू किया। वह खूनी संघर्ष करीब तीन घंटे तक चला, जिसमें कई चीनी जवान या तो मारे गए, या बुरी तरह जख्मी हो गए।

भारतीय टुकड़ी ने सौंपे थे चीनियों के शव

झड़प की अगली सुबह जब हालात थोड़े सामान्य हुए, चीनी जवानों के शव जमीन पर पड़े थे, जिन्हें भारतीय दल ने दूसरे पक्ष के सुपुर्द कर दिया। सूत्रों ने बताया कि भारत की ओर से 100 जवान, जबकि चीन के 350 सैनिकों की भिड़ंत हुई थी। अंतत: बिहार रेजिमेंट को पेट्रोलिंग प्वाइंट 14 पर चीनी टेंट को उखाड़ने में कामयाबी मिल गई। उन्होंने बताया कि करार का उल्लंघन करते हुए चीनियों ने वहां तंबू गाड़े थे। बताया जाता है कि हालात को शांत करने के लिए अगले कुछ दिनों में फिर से पेट्रोलिंग प्वाइंट 14 पर दोनों देशों में लेफ्टिनेंट जनरल स्तर की वार्ता होगी।

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