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Hindi News ›   India News ›   Hotels tender Scam: panel says, Don’t recall anything about BNR Puri and BNR Ranchi deal

लालू के इशारे पर होटलों का टेंडर देने वाली कमेटी निकली भुलक्कड़, कुछ नहीं याद!

Tue, 01 Aug 2017 11:29 AM IST
amarujala.com, Presented by: श्रवण शुक्ला
amarujala.com, Presented by: श्रवण शुक्ला Updated Tue, 01 Aug 2017 11:29 AM IST
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Hotels tender Scam: panel says, Don’t recall anything about BNR Puri and BNR Ranchi deal
लालू प्रसाद यादव - फोटो : social media
लालू प्रसाद यादव के रेलवे मंत्री रहते हुए साल 2006 आईआरसीटीसी के दो होटलों के टेंडर देने के मामले में सीबीआई ने एफआईआर दर्ज की है। इस मामले की जांच जारी है। हालांकि बीएनआर-पुरी और बीएनआर-रांची नाम के इन दोनों होटलों का टेंडर देने वाली कमेटी के सदस्य सबकुछ भूल चुके हैं। उन्हें कुछ याद ही नहीं। 
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इंडियन एक्सप्रेस ने दोनों होटलों का टेंडर देने वाली आईआरसीटीसी की कमेटी के तीनों सदस्यों बी के अग्रवाल, विनोद अस्थाना और राकेश गोगिया से बातचीत की। तीनों ने ही उस टेंडर से संबंधित किसी भी बात की जानकारी होने से इनकार कर दिया। उनका कहना है कि मामला दस साल से ज्यादा पुराना है और उस समय हम हर रोज टेंडर का ही काम देखते थे। ऐसे में उन्हें किसी खास टेंडर के बारे में कुछ याद नहीं। हां, अगर कागजात सामने रखे जाएं तो भले ही याद आए। पर कागजात के आधार पर भी पुरानी बातों के याद आने की बात सिर्फ एक ही सदस्य ने कही। 
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इस टेंडर और इसके पीछे की लेन-देन की जांच सीबीआई के साथ ही ईडी भी कर रही है। दिसंबर-2006 में इस टेंडर को जारी करने वाली कमेटी के सदस्य बी के अग्रवाल मौजूदा समय में रेलवे में सीनियर पोस्ट पर हैं। विनोद अस्थाना अब रिटायर हो चुके हैं, तो राकेश गोगिया प्राइवेट सेक्टर की नौकरी कर रहे हैं। राकेश गोगिया उस कमेटी में इकलौते रेलवे से बाहर के सदस्य थे। 

तीनों अधिकारियों को कुछ नहीं याद

Hotels tender Scam: panel says, Don’t recall anything about BNR Puri and BNR Ranchi deal
लालू प्रसाद यादव
बी के अग्रवाल ने कहा कि मुझे दो होटलों की डील के बारे में कुछ भी याद नहीं। काफी लंबा समय बीत चुका है। अगर मेरे सामने कागजात रखे जाएं, तो भी मुश्किल से ही कुछ याद आएगा। अग्रवाल रेलवे मकेनिकल सर्विस के अधिकारी हैं। वो उस समय आईआरसीटीसी के ग्रुप जनरल मैनेजर(टूरिज्म सर्विस) थे।

इस कमेटी के दूसरे सदस्य विनोद अस्थाना रेलवे ट्रैफिक सर्विस अधिकारी थे। वो उस समय आईआरसीटीसी में जनरल मैनेजर(ऑपरेशन) थे। उन्होंने कहा कि इस बात को दशक भर से भी ज्यादा समय बीत चुका है। उन दिनों हम रोज ही टेंडर के काम दखते थे। वैसे भी, मैं कैटरिंग का काम देखते था और ये मामला मुझसे जुड़ा नहीं था। मैं तो सिर्फ उस टेंडर कमेटी का सदस्य भर था। इसी तरह राकेश गोगिया ने भी कुछ भी याद होने से मना कर दिया।

गौरतलब है कि लालू यादव के रेल मंत्री रहते हुए दिए गए कुछ टेंडरों को भ्रष्टाचार से भी जोड़कर देखा जा रहा है। ऐसे में एक मामले में बीएनआर-पुरी और बीएनआर-रांची के दो होटल सुजाता होटल्स ग्रुप को दिए गए थे। ये दोनों होटल टेंडर के जरिए दिए गए थे, पर माना जा रहा है कि दोनों होटलों को तत्कालीन रेलवे मंत्री लालू प्रसाद यादव के हस्तक्षेप की वजह से मिला था और इसके बदले लालू यादव के परिवार को बिहार की राजधानी पटना में प्लॉट मिले थे। इस मामले में सीबीआई एफआईआर दर्ज कराकर जांच कर रही है और उस समय टेंडर जारी करने वाले अधिकारियों से भी पूछताछ कर रही है।
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