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अस्पताल की घोर लापरवाही: मरीज जीवित, घरवालों को सौंप दिया शव
अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई
Updated Thu, 21 Jun 2018 11:32 AM IST
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रोगी
महाराष्ट्र के सांगली जिला अस्पताल में एक रोगी और जीवित व्यक्ति को मृत घोषित कर अज्ञात शव घरवालों को सौंपने का अनोखा मामला सामने आया है।जो सरकारी अस्पतालों की संवेदनहीनता को दर्शाता है। लेकिन, जब सच्चाई सामने आई तो अस्पताल प्रशासन ने दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की बात कहकर पल्ला झाड़ लिया है।
जानकारी के अनुसार, सांगली जिले के तासगांव के अविनाश उर्फ चिल्लू दादासाहेब बागवडे बीते 8 जून को जिला अस्पताल में भर्ती हुए थे। उनका उपचार शुरू था। इसी दौरान मंगलवार को सुबह अस्पताल से अविनाश के परिजनों को बताया गया कि उसकी मौत हो चुकी है। शव ले जाएं और अंतिम संस्कार करें। अस्पताल से यह सूचना मिलने पर परिजन स्तब्ध रह गए। परिजन अविनाश का शव लेने अस्पताल पहुंचे। परिजनों ने शव देखकर उसे लेने से मना कर दिया। परिजनों का कहना था कि यह शव अविनाश का नहीं है, लेकिन अस्पताल के अधिकारियों ने मृत्यु प्रमाण पत्र थमाया और कहा कि यह अविनाश का ही शव है इसे यहां से ले जाएं।
परिजनों की जब नहीं सुनी गई तो वो अविनाश का शव समझकर उसको अपने जिला अस्पताल से 25 किमी. दूर अपने घर ले आए। अविनाश की मौत की खबर सुनकर गांववाले और रिश्तेदार भी इकट्ठा हो गए। शव का अंतिम दर्शन करते समय सभी यही कह रहे थे कि यह अविनाश का शव नहीं है। लेकिन, मृत्यु प्रमाण पत्र देखकर सभी भौंचक्के रह गए। फिर भी, रिश्तेदारों ने तय किया कि पहले यह पता लगाएंगे कि यह शव किसका है। इसके बाद शव को फिर से जिला अस्पताल लाकर पूछताछ शुरू की गई। अंतत: सच्चाई सामने आई कि अस्पताल प्रशासन ने जिसे अविनाश का शव बताया था वह दरअसल किसी और का है।
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वहीं, अस्पताल में अविनाश जीवित पाया गया। इस घटनाक्रम पर परिजनों ने कड़ी नाराजगी जताई और अस्पताल प्रशासन से जवाब मांगा। हालांकि, अविनाश तो जीवित मिल गया लेकिन अज्ञात शव किसका था यह पता नहीं चल पाया।
दोषियों पर होगी कार्रवाई
सांगली जिला अस्पताल की अधिष्ठाता डॉ. पल्लवी सापले ने इस घटनाक्रम पर हैरानी जताई है। उन्होंने कहा कि जीवित व्यक्ति को मृत घोषित करना अक्षम्य अपराध है। इस मामले की जांच होगी और जो भी दोषी होगा उसे बख्शा नहीं जाएगा।
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जानकारी के अनुसार, सांगली जिले के तासगांव के अविनाश उर्फ चिल्लू दादासाहेब बागवडे बीते 8 जून को जिला अस्पताल में भर्ती हुए थे। उनका उपचार शुरू था। इसी दौरान मंगलवार को सुबह अस्पताल से अविनाश के परिजनों को बताया गया कि उसकी मौत हो चुकी है। शव ले जाएं और अंतिम संस्कार करें। अस्पताल से यह सूचना मिलने पर परिजन स्तब्ध रह गए। परिजन अविनाश का शव लेने अस्पताल पहुंचे। परिजनों ने शव देखकर उसे लेने से मना कर दिया। परिजनों का कहना था कि यह शव अविनाश का नहीं है, लेकिन अस्पताल के अधिकारियों ने मृत्यु प्रमाण पत्र थमाया और कहा कि यह अविनाश का ही शव है इसे यहां से ले जाएं।
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परिजनों की जब नहीं सुनी गई तो वो अविनाश का शव समझकर उसको अपने जिला अस्पताल से 25 किमी. दूर अपने घर ले आए। अविनाश की मौत की खबर सुनकर गांववाले और रिश्तेदार भी इकट्ठा हो गए। शव का अंतिम दर्शन करते समय सभी यही कह रहे थे कि यह अविनाश का शव नहीं है। लेकिन, मृत्यु प्रमाण पत्र देखकर सभी भौंचक्के रह गए। फिर भी, रिश्तेदारों ने तय किया कि पहले यह पता लगाएंगे कि यह शव किसका है। इसके बाद शव को फिर से जिला अस्पताल लाकर पूछताछ शुरू की गई। अंतत: सच्चाई सामने आई कि अस्पताल प्रशासन ने जिसे अविनाश का शव बताया था वह दरअसल किसी और का है।
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वहीं, अस्पताल में अविनाश जीवित पाया गया। इस घटनाक्रम पर परिजनों ने कड़ी नाराजगी जताई और अस्पताल प्रशासन से जवाब मांगा। हालांकि, अविनाश तो जीवित मिल गया लेकिन अज्ञात शव किसका था यह पता नहीं चल पाया।
दोषियों पर होगी कार्रवाई
सांगली जिला अस्पताल की अधिष्ठाता डॉ. पल्लवी सापले ने इस घटनाक्रम पर हैरानी जताई है। उन्होंने कहा कि जीवित व्यक्ति को मृत घोषित करना अक्षम्य अपराध है। इस मामले की जांच होगी और जो भी दोषी होगा उसे बख्शा नहीं जाएगा।