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Indian Navy: नौसेना प्रमुख बोले- होर्मुज में बाधाओं का क्षेत्र पर गंभीर आर्थिक असर, ऊर्जा अस्थिरता पैदा हुई

Thu, 02 Apr 2026 10:16 PM IST
Nirmal Kant न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मुंबई।
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मुंबई। Published by: Nirmal Kant Updated Thu, 02 Apr 2026 10:16 PM IST
सार

Indian Navy: नौसेना प्रमुख एडमिरल दिनेश कुमार त्रिपाठी ने कहा कि होर्मुज जलडमरूमध्य में बाधाओं के कारण क्षेत्र में गंभीर आर्थिक असर देखने को मिल रहा है और ऊर्जा अस्थिरता पैदा हुई है। उन्होंने कहा कि समुद्र में प्रतिस्पर्धा अब तेल के अलावा दुर्लभ खनिज, नए मछली पकड़ने के क्षेत्र और डाटा तक फैल गई है। पढ़िए रिपोर्ट-

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Hormuz Strait disruptions have caused huge economic impact, energy instability in region: Navy chief
वाइस एडमिरल दिनेश के. त्रिपाठी - फोटो : एएनआई

विस्तार

पश्चिम एशिया में जारी युद्ध के बीच भारतीय नौसेना प्रमुख एडमिरल दिनेश कुमार त्रिपाठी ने गुरुवार को कहा कि होर्मुज जलडमरूमध्य में बाधाओं का क्षेत्र पर गंभीर आर्थिक असर पड़ा है और ऊर्जा अस्थिरता पैदा हुई है।
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उन्होंने कहा कि समुद्र में प्रतिस्पर्धा अब केवल तेल और ऊर्जा तक सीमित नहीं रही है। उन्होंने कहा कि अब यह प्रतिस्पर्धा सिर्फ तेल तक सीमित नहीं है, बल्कि दुर्लभ खनिज, जरूरी खनिज, मछली पकड़ने के नए क्षेत्र और डाटा जैसे भविष्य के संसाधनों तक बढ़ गई है। एडमिरल त्रिपाठी मुंबई से आईएनएस सुनयना जहाज को 'सागर' नाम के साथ रवाना करने के अवसर पर बोल रहे थे। 
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पश्चिम एशिया में जंग से ऊर्जा आपूर्ति बाधित
पश्चिम एशिया का संकट 28 फरवरी को अमेरिका और इस्राइल की ओर से ईरान पर संयुक्त हमले के बाद शुरू हुआ था। ईरान के पड़ोसी देशों पर हमलों और होर्मुज जलडमरूमध्य पर उसके नियंत्रण के कारण वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति बाधित हुई है, जिसका असर पश्चिम एशिया से कहीं आगे तक जाता दिख रहा है। 
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एडमिरल डीके त्रिपाठी ने क्या कहा?
नौसेना प्रमुख ने कहा, पश्चिम एशिया में संघर्ष अब पांचवें हफ्ते में है और होर्मुज जलडमरूमध्य में बाधाओं के कारण क्षेत्र में गंभीर आर्थिक प्रभाव और ऊर्जा अस्थिरता उत्पन्न हुई है। उन्होंने कहा कि समुद्री सर्वेक्षण, गहरे समुद्र में शोध गतिविधियों और गैरकानूनी और बिना नियंत्रण वाली मछली पकड़ने (आईयूयू) की घटनाओं में काफी वृद्धि हुई है, जो तटीय देशों के अधिकारों का उल्लंघन कर रही हैं।


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उन्होंने यह भी कहा कि समुद्री डकैती, सशस्त्र लूट और मादक पदार्थों की तस्करी जैसी चुनौतियां भी बढ़ गई हैं, क्योंकि आपराधिक तत्वों को आधुनिक तकनीक तक आसानी से पहुंच मिल रही है, जिससे इनसे निपटना और मुश्किल हो गया है। उन्होंने बताया कि पिछले साल हिंद महासागर क्षेत्र में करीब 3,700 समुद्री घटनाएं दर्ज की गईं। इसके अलावा, 2025 में इस क्षेत्र में एक अरब डॉलर से अधिक की मादक पदार्थों की जब्ती हुई, जो दर्शाती हैं कि ये चुनौतियां लगातार बनी हुई हैं।

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