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प्रवासी मजदूरों की सुरक्षा के सवाल पर सरकार बोली, अफवाहों की वजह से प्रवासियों में भगदड़ मची थी
Wed, 16 Sep 2020 10:20 AM IST
अनवर अंसारी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: अनवर अंसारी
Updated Wed, 16 Sep 2020 10:20 AM IST
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प्रवासी मजदूर (फाइल फोटो)
- फोटो : PTI
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कोरोना काल के दौर में उपजे प्रवासी मजदूरों का मुद्दा ठंडे बस्ते में चला गया था, हालांकि मानसून सत्र की शुरुआत के साथ ही एक बार फिर इस पर विपक्ष ने सरकार को घेरना शुरू कर दिया है। मानसून सत्र के पहले ही दिन प्रवासी मजदूरों को लेकर दिए गए बयान पर सरकार बैकफुट पर आ गई। विपक्ष के मजदूरों की मौत का आंकड़ा पूछने पर सरकार ने कहा कि उसके पास इससे संबंधित डाटा नहीं है।
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वहीं, मंगलवार को प्रवासी मजदूरों से जुड़े एक अन्य सवाल पर गृह मंत्रालय ने लोकसभा में कहा कि मार्च में कोरोना वायरस के चलते लागू किए गए लॉकडाउन के समय फेक न्यूज (अफवाहों वाली खबरें) की वजह से बड़ी संख्या में प्रवासियों की आवाजाही हुई।
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तृणमूल कांग्रेस की सांसद माला रॉय ने लोकसभा में लिखित में सवाल पूछा था कि लॉकडाउन की घोषणा से पहले सरकार ने प्रवासियों की सुरक्षा के लिए क्या कदम उठाए और हजारों मजदूर घरों को लौटने को मजबूर क्यों हुए? इसके जवाब में गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय ने कहा कि फेक न्यूज के चलते लोगों के मन में खाने-पाने की चीजों की सप्लाई और दूसरी जरूरी सुविधाओं को लेकर चिंता थी, इसलिए भगदड़ मची थी।
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गृह राज्य मंत्री ने कहा, केंद्र सरकार प्रवासी मजदूरों की चिंताओं के बारे में पूरी तरह से जागरूक थी और इसने यह सुनिश्चित करने के लिए उपाय किए थे कि लॉकडाउन के दौरान कोई भी नागरिक भोजन, पीने के पानी और चिकित्सा सुविधाओं से वंचित नहीं रहे।
सरकार ने सोमवार को संसद में बताया था कि लॉकडाउन के दौरान करीब 1.4 करोड़ प्रवासी मजदूर अपने मूल निवास पर लौटे। हालांकि, इसने इस बात की जानकारी नहीं दी कि महामारी के बाद कितने लोगों ने अपनी नौकरियां गंवाई है।
गृह मंत्रालय ने कहा, प्रवासी मजदूरों के सामने आने वाली समस्याओं को कम करने के लिए, केंद्र ने संयुक्त सचिव के स्तर के वरिष्ठ अधिकारियों की देखरेख में और केंद्रीय मंत्रालयों के प्रतिनिधियों की निगरानी में गृह मंत्रालय में नियंत्रण कक्ष स्थापित किए।