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Disaster: आपदा शमन के लिए 3028 करोड़ रुपये को मंजूरी, गृह मंत्री शाह की अध्यक्षता वाली समिति ने लगाई मुहर
Wed, 29 Jan 2025 10:35 PM IST
शिव शुक्ला
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: शिव शुक्ला
Updated Wed, 29 Jan 2025 10:35 PM IST
सार
समिति ने 10 राज्यों के 50 जिलों में बिजली गिरने के जोखिम को कम करने के लिए बिजली सुरक्षा पर शमन परियोजना पर विचार किया। ये जिले बिजली गिरने की घटनाओं से सबसे अधिक प्रभावित हैं।
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केंद्रीय गृह और सहकारिता मंत्री अमित शाह।
- फोटो : ANI/वीडियो ग्रैब
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विस्तार
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की अध्यक्षता वाली उच्चस्तरीय समिति ने विभिन्न राज्यों में आपदा के निवारण के लिए 3027.86 करोड़ रुपये की मंजूरी दी है। गृहमंत्रालय ने इस बारे में बयान जारी किया है। इसमें कहा गया है कि समिति ने यूपी समेत सबसे अधिक सूखा प्रभावित 12 राज्यों को मदद के लिए 2022.16 करोड़ रुपये की लागत वाली परियोजना को भी स्वीकृति दी है। शाह के अलावा समिति में केंद्रीय वित्त मंत्री, कृषि मंत्री और नीति आयोग के उपाध्यक्ष शामिल हैं।
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समिति ने सबसे अधिक सूखा प्रभावित 12 राज्यों के 49 जिलों को उत्प्रेरक सहायता प्रदान करने के लिए राष्ट्रीय आपदा शमन निधि (एनडीएमएफ) से फंडिंग के प्रस्तावों पर भी विचार किया। समिति ने इन राज्यों की मदद के लिए 2022.16 करोड़ रुपये के कुल परिव्यय वाली परियोजना को मंजूरी दी है। इसमें केंद्र सरकार का हिस्सा 1200 करोड़ रुपये होगा। इन राज्यों में उत्तर प्रदेश, आंध्र प्रदेश, बिहार, गुजरात, झारखंड, कर्नाटक, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, ओडिशा, राजस्थान, तमिलनाडु और तेलंगाना शामिल हैं।
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बिजली गिरने के जोखिम को कम करने के लिए परियोजना पर विचार
समिति ने 10 राज्यों के 50 जिलों में बिजली गिरने के जोखिम को कम करने के लिए बिजली सुरक्षा पर शमन परियोजना पर विचार किया। ये जिले बिजली गिरने की घटनाओं से सबसे अधिक प्रभावित हैं। समिति ने इन राज्यों में कुल 186.78 करोड़ रुपये की लागत से परियोजना को मंजूरी दी। इन 10 राज्यों में उत्तर प्रदेश, आंध्र प्रदेश, बिहार, छत्तीसगढ़, झारखंड, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, मेघालय, ओडिशा और पश्चिम बंगाल शामिल हैं।
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819 करोड़ रुपये की वन अग्नि प्रबंधन शमन परियोजना को मंजूरी
गृह मंत्री ने 19 राज्यों के उच्च प्राथमिकता वाले 144 जिलों में 818.92 करोड़ रुपये के कुल व्यय के वन अग्नि प्रबंधन शमन परियोजना को भी मंजूरी दी। इसमें से राष्ट्रीय आपदा शमन निधि (एनडीएमएफ) और राष्ट्रीय आपदा मोचन कोष (एनडीआरएफ) का केंद्रीय हिस्सा 690.63 करोड़ रुपये होगा। परियोजना का प्राथमिक उद्देश्य देश में जंगलों में लगने वाली आग की घटनाओं के प्रबंधन के दृष्टिकोण को बदलने और ‘बेहतर तरीके से पुनर्निर्माण’ के प्रयासों के लिए शमन परियोजना को लागू करना है। आंध्र प्रदेश, अरुणाचल प्रदेश, असम, छत्तीसगढ़, गुजरात, हिमाचल प्रदेश, झारखंड, कर्नाटक, केरल, मणिपुर, महाराष्ट्र, मिजोरम, मध्य प्रदेश, मेघालय, नगालैंड, ओडिशा, तमिलनाडु, तेलंगाना और उत्तराखंड जंगलों में आग लगने की घटनाओं में कमी लाने, जंगलों में आग लगने पर उनसे निपटने की तैयारियों के साथ-साथ आग के बाद के आकलन और स्थिति को सामान्य बनाने के लिए आवश्यक गतिविधियों को अंजाम देने को लेकर अपने-अपने प्रस्ताव पेश करेंगे।
गृह मंत्रालय ने बयान में कही ये बात
गृह मंत्रालय से जारी एक बयान में कहा गया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘आपदा प्रतिरोधी’ भारत के संकल्प को पूरा करने के लिए गृह मंत्री अमित शाह के मार्गदर्शन में मंत्रालय ने देश में आपदाओं का प्रभावी प्रबंधन सुनिश्चित करने के लिए कई पहल की है। पीएम मोदी के नेतृत्व में सरकार ने भारत में आपदा जोखिम न्यूनीकरण प्रणाली को मजबूत कर आपदाओं के दौरान जानमाल और जैव विविधता के किसी भी बड़े नुकसान को रोकने के लिए कई कदम उठाए हैं।
एनडीएमएफ से वित्तीय सहायता को मंजूरी दी थी
इन प्रस्तावों को मंजूरी देने से पहले समिति ने अन्य परियोजनाओं के लिए एनडीएमएफ से वित्तीय सहायता को मंजूरी दी थी। इनमें सात शहरों में 3075.65 करोड़ रुपये के परिव्यय वाली शहरी बाढ़ जोखिम शमन परियोजनाएं 150 करोड़ रुपये के कुल व्यय से चार राज्यों में जीएलओएफ जोखिम प्रबंधन परियोजनाएं और 15 राज्यों में 1000 करोड़ रुपये के कुल व्यय की भूस्खलन जोखिम शमन परियोजनाएं शामिल हैं।
इतने रुपये पहले हुए जारी
चालू वित्त वर्ष के दौरान राज्यों को 24,981 करोड़ रुपये से अधिक की राशि पहले ही जारी की जा चुकी है। इसमें राज्य आपदा मोचन कोष (एसडीआरएफ) से 27 राज्यों को 17479.60 करोड़ रुपये, राष्ट्रीय आपदा मोचन कोष (एनडीआरएफ) से 18 राज्यों को 4808.30 करोड़ रुपये, राज्य आपदा न्यूनीकरण कोष (एसडीएफएफ) से 13 राज्यों को 1973.55 करोड़ रुपये तथा राष्ट्रीय आपदा न्यूनीकरण कोष (एनडीएफएफ) से 08 राज्यों को 719.72 करोड़ रुपये शामिल हैं।