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प्लास्टिक के बर्तनों से बनता है हर महीने 22,000 टन कचरा

Wed, 12 Sep 2018 03:03 PM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Updated Wed, 12 Sep 2018 03:03 PM IST
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Home delivered meals creates 22 thousand tonnes of plastic waste every month

अकसर वीकेंड पर लोग बाहर से खाना मंगाकर खाना ज्यादा पसंद करते हैं। बिना ये बात जाने की जिन प्लास्टिक के बर्तनों में उनका खाना आता है उससे कितना नुकसान हो सकता है।

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ऐसे ही लोगों में से एक है आरती। आरती भी शनिवार को बाहर से खाना मंगाकर खाना पसंद करती हैं। उनका कहना है कि फूड डिलिवरी ऐप्स से वह अपने और अपने दोस्तों के लिए खाना मंगाती हैं, जो कि प्लास्टिक के डिब्बों में पैक होकर आता है।
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आरती का कहना है कि उनमें से प्लास्टिक के चम्मच और फोर्क को तो कुछ समय के लिए इस्तेमाल किया जा सकता है लेकिन प्लास्टिक की कटलरी (कटोरी जैसे आकार का बर्तन) को इस्तेमाल में नहीं लाया जा सकता।
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आप हैरान हो जाएंगे ये जानकर कि इतनी सारी प्लास्टिक से बड़ी संख्या में कचरा बनता है। आंकड़े बताते हैं कि हर महीने इससे 22,000 टन कचरा बनता है।

Home delivered meals creates 22 thousand tonnes of plastic waste every month

फूड ऐप के बिजनेस में इस तरह के प्लास्टिक के बर्तनों का बड़ी संख्या में इस्तेमाल होता है। बिना इस बात की परवाह किए कि ये पर्यावरण के लिए कितना खतरनाक हो सकता है।

भविष्य में बढ़ते इस खतरे से बचने के लिए खाना पहुंचाने वाली कुछ कंपनियां अब जागरुक हो रही हैं। उन्होंने प्लास्टिक के बर्तनों के विकल्प खोजने का फैसला किया है। अब इन कंपनियों द्वारा इको फ्रेंडली फूड ट्रे का इस्तेमाल किया जा रहा है।

माना जाता है कि खाना उपलब्ध कराने वाली सभी कंपनियों के पास महीने भर में 3-4 करोड़ ऑर्डर आते हैं। वह जिन प्लास्टिक के बर्तनों में खाना उपलब्ध कराते हैं उनसे महीने भर में 22,000 टन कचरा बनता है।

इसी कारण से कंपनियां अब दूसरे विकल्पों पर काम कर रही हैं। लोगों को विकल्प दिए जाते हैं कि वह प्लास्टिक के बर्तनों में खाना मंगाना चाहते हैं या नहीं।

इसके साथ ही तमिलनाडु में भी कुछ होटल उन लोगों को डिस्काउंट दे रहे हैं जो प्लास्टिक के बर्तनों में खाना नहीं मंगवाते और फूड पार्सल के बाद अपने ही बर्तनों का इस्तामल करते हैं।  

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