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हिट एंड रन: मुआवजा बढ़ाने पर विचार करे केंद्र, मुआवजे के नगण्य दावों से सुप्रीम कोर्ट चिंतित

Sat, 13 Jan 2024 05:54 AM IST
यशोधन शर्मा राजीव सिन्हा, नई दिल्ली
राजीव सिन्हा, नई दिल्ली Published by: यशोधन शर्मा Updated Sat, 13 Jan 2024 05:54 AM IST
सार

मोटर वाहन अधिनियम की धारा 161 की उपधारा (2) के तहत यह प्रावधान है कि हिट एंड रन मोटर दुर्घटना के परिणामस्वरूप किसी भी व्यक्ति की मृत्यु के मामले में परिजनों को दो लाख रुपये का मुआवजा या ऐसी उच्च राशि जो केंद्र सरकार द्वारा निर्धारित की जाए, का भुगतान करना चाहिए।

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Hit and Run Center should consider increasing compensation Supreme Court worried over negligible claim
सुप्रीम कोर्ट - फोटो : ANI

विस्तार

सुप्रीम कोर्ट ने हिट एंड रन मामलों में मुआवजे के लिए किए गए दावों की कम संख्या पर गंभीर चिंता जताई है। शीर्ष अदालत ने पाया कि हिट एंड रन के मामलों के मुकाबले मुआवजे का दावा करने वालों की संख्या नगण्य है। यह स्थिति तब है जबकि मुआवजा योजना को लागू हुए डेढ़ साल से अधिक हो चुका है। इसका एक कारण यह हो सकता है कि पीड़ित को योजना से अवगत ही नहीं कराया गया हो।

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योजना एक अप्रैल, 2022 से लागू है। सुप्रीम कोर्ट ने इस योजना के तहत मौत के मामले में दो लाख और घायलों के लिए 50 हजार मुआवजे की राशि में सालाना वृद्धि करने पर भी विचार करने के लिए केंद्र सरकार को निर्देश जारी किया। जस्टिस अभय एस ओका और जस्टिस पंकज मिथल की पीठ ने शुक्रवार को कहा, यदि पुलिस यह निष्कर्ष निकालती है कि यह हिट एंड रन दुर्घटना का मामला है तो उन्हें पीड़ित या उसके कानूनी प्रतिनिधियों को योजना की उपलब्धता के बारे में भी बताना चाहिए। पीठ ने कहा, केंद्र को इस प्रमुख चिंता का समाधान करना चाहिए कि योजना की उपलब्धता के बावजूद बहुत कम पात्र दावेदार योजना का लाभ उठा रहे हैं।
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यह है कानूनी प्रावधान
मोटर वाहन अधिनियम की धारा 161 की उपधारा (2) के तहत यह प्रावधान है कि हिट एंड रन मोटर दुर्घटना के परिणामस्वरूप किसी भी व्यक्ति की मृत्यु के मामले में परिजनों को दो लाख रुपये का मुआवजा या ऐसी उच्च राशि जो केंद्र सरकार द्वारा निर्धारित की जाए, का भुगतान करना चाहिए। गंभीर चोट की स्थिति में मुआवजा राशि 50 हजार रुपये है।  
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समय के साथ घटता है पैसे का मूल्य...शीर्ष कोर्ट ने कहा, समय के साथ पैसे का मूल्य कम होता जाता है। हम केंद्र सरकार को इस बात पर विचार करने का निर्देश देते हैं कि क्या मुआवजे की राशि को सालाना बढ़ाया जा सकता है।

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