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Maratha Reservation: महाराष्ट्र में फिर क्यों उठी मराठा आरक्षण की मांग, कौन हैं आंदोलन के चेहरे मनोज जरांगे?
Mon, 04 Sep 2023 07:33 PM IST
शिवेंद्र तिवारी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: शिवेंद्र तिवारी
Updated Mon, 04 Sep 2023 07:33 PM IST
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मराठा आरक्षण
- फोटो :
AMAR UJALA
विस्तार
महाराष्ट्र में मराठा आरक्षण का मुद्दा एक बार फिर चर्चा में है। बीते एक हफ्ते से समुदाय के लोग आरक्षण की मांग को लेकर भूख हड़ताल पर हैं। शुक्रवार को जालना जिले में आंदोलन हिंसक हो गया। पुलिस लाठीचार्ज के बाद भड़की हिंसा में दर्जनों लोग घायल हो गए। अब इस मामले में उप-मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने पीड़ितों से माफी मांगी है।सरकार की ओर से सोमवार दोपहर कैबिनेट उप-समिति की बैठक हुई। बैठक में मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे समेत अन्य मंत्री शामिल हुए। आखिर मराठा आरक्षण पर अभी क्या हो रहा है? प्रदर्शनकारियों की मांग क्या है? इस पर सरकार का क्या कहना है? मराठा आरक्षण को लेकर पहले क्या हुआ है? आइये समझते हैं...
मराठा आरक्षण
- फोटो :
ANI
मराठा आरक्षण पर अभी क्या हो रहा है?
मनोज जरांगे के नेतृत्व में आंदोलनकारी 29 अगस्त से जालना जिले में मराठा समुदाय के लिए आरक्षण की मांग को लेकर भूख हड़ताल कर रहे थे। स्थिति तब बिगड़ी जब डॉक्टरों की सलाह पर पुलिस ने जरांगे को अस्पताल में भर्ती कराने की कोशिश की। लेकिन उन्होंने मना कर दिया।
इसके बाद, एक सितंबर को आंदोलन हिंसक हो गया। अंबाड तहसील में धुले-सोलापुर रोड पर अंतरवाली सराटी गांव में हिंसक भीड़ को तितर-बितर करने के लिए पुलिस ने लाठीचार्ज किया और आंसू गैस के गोले छोड़े थे। पुलिस ने घटना को लेकर कई लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किया है। पुलिस ने हिंसा में शामिल 16 प्रदर्शनकारियों की पहचान की है। करीब 350 अन्य लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किया गया है। हिंसा के बाद भी आंदोलनकारी अपनी मांग पर अड़े हैं। उनका कहना है कि जब तक सरकार समुदाय को आरक्षण नहीं देती तब तक वे आंदोलन जारी रखेंगे।
मनोज जरांगे के नेतृत्व में आंदोलनकारी 29 अगस्त से जालना जिले में मराठा समुदाय के लिए आरक्षण की मांग को लेकर भूख हड़ताल कर रहे थे। स्थिति तब बिगड़ी जब डॉक्टरों की सलाह पर पुलिस ने जरांगे को अस्पताल में भर्ती कराने की कोशिश की। लेकिन उन्होंने मना कर दिया।
इसके बाद, एक सितंबर को आंदोलन हिंसक हो गया। अंबाड तहसील में धुले-सोलापुर रोड पर अंतरवाली सराटी गांव में हिंसक भीड़ को तितर-बितर करने के लिए पुलिस ने लाठीचार्ज किया और आंसू गैस के गोले छोड़े थे। पुलिस ने घटना को लेकर कई लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किया है। पुलिस ने हिंसा में शामिल 16 प्रदर्शनकारियों की पहचान की है। करीब 350 अन्य लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किया गया है। हिंसा के बाद भी आंदोलनकारी अपनी मांग पर अड़े हैं। उनका कहना है कि जब तक सरकार समुदाय को आरक्षण नहीं देती तब तक वे आंदोलन जारी रखेंगे।
आंदोलन की अगुवाई कर रहे मनोज जारांगे
- फोटो :
AMAR UJALA
कौन हैं मनोज जरांगे?
आंदोलन की अगुवाई कर रहे मनोज जारांगे पाटिल मूलत: बीड जिले के रहने वाले हैं। मटोरी गांव में जन्मे मनोज ने 12वीं तक पढ़ाई की है। आजीविका के लिए बीड से जालना आ गए। यहां एक होटल में काम करते हुए उन्होंने सामाजिक कार्य शुरू किए। इसी दौरान शिवबा नामक संगठन की स्थापना की।
मनोज 2011 से मराठा आरक्षण के आंदोलन में सक्रिय हैं। 2014 में उन्होंने छत्रपति संभाजीनगर में डिविजनल कमिश्नरेट के खिलाफ अपने मार्च से सभी का ध्यान खीचा था। 2015 से 2023 के बीच उन्होंने 30 से ज्यादा आंदोलन किये। 2021 में उन्होंने जालना जिले के साष्टा पिंपलगांव में 90 दिनों की हड़ताल की थी।
बताया जाता है कि मनोज जारांगे की आर्थिक स्थिति खराब है, लेकिन उन्होंने खुद को मराठा समुदाय के लिए समर्पित कर दिया है। उनके पास चार एकड़ जमीन थी जिसमें से दो एकड़ जमीन उन्होंने मराठा समुदाय के आंदोलन के लिए बेच दी थी।
आंदोलन की अगुवाई कर रहे मनोज जारांगे पाटिल मूलत: बीड जिले के रहने वाले हैं। मटोरी गांव में जन्मे मनोज ने 12वीं तक पढ़ाई की है। आजीविका के लिए बीड से जालना आ गए। यहां एक होटल में काम करते हुए उन्होंने सामाजिक कार्य शुरू किए। इसी दौरान शिवबा नामक संगठन की स्थापना की।
मनोज 2011 से मराठा आरक्षण के आंदोलन में सक्रिय हैं। 2014 में उन्होंने छत्रपति संभाजीनगर में डिविजनल कमिश्नरेट के खिलाफ अपने मार्च से सभी का ध्यान खीचा था। 2015 से 2023 के बीच उन्होंने 30 से ज्यादा आंदोलन किये। 2021 में उन्होंने जालना जिले के साष्टा पिंपलगांव में 90 दिनों की हड़ताल की थी।
बताया जाता है कि मनोज जारांगे की आर्थिक स्थिति खराब है, लेकिन उन्होंने खुद को मराठा समुदाय के लिए समर्पित कर दिया है। उनके पास चार एकड़ जमीन थी जिसमें से दो एकड़ जमीन उन्होंने मराठा समुदाय के आंदोलन के लिए बेच दी थी।
मराठा आरक्षण आंदोलन
- फोटो :
AMAR UJALA
मराठा आरक्षण का मुद्दा क्या है?
महाराष्ट्र में मराठा समुदाय के लिए सरकारी नौकरियों और शिक्षा में आरक्षण की मांग बहुत पुरानी है। साल 1997 में मराठा संघ और मराठा सेवा संघ ने सरकारी नौकरियों और शैक्षणिक संस्थानों में आरक्षण के लिए पहला बड़ा मराठा आंदोलन किया। प्रदर्शनकारियों ने अक्सर कहा है कि मराठा उच्च जाति के नहीं बल्कि मूल रूप से कुनबी यानी कृषि समुदाय से जुड़े थे।
मौजूदा स्थिति की बात करें तो मराठा समुदाय महाराष्ट्र की आबादी का लगभग 31 प्रतिशत है। यह एक प्रमुख जाति समूह है लेकिन फिर भी समरूप यानी एक समान नहीं है। इसमें पूर्व सामंती अभिजात वर्ग और शासकों के साथ-साथ सबसे ज्यादा वंचित किसान शामिल हैं। राज्य में अक्सर कृषि संकट, नौकरियों की कमी और सरकारों के अधूरे वादों का हवाला देते हुए समाज ने आंदोलन किये हैं।
2018 में महाराष्ट्र विधानमंडल से मराठा समुदाय के लिए शिक्षा और सरकारी नौकरियों में 16% आरक्षण का प्रस्ताव वाला एक विधेयक पारित किया गया। विधेयक में मराठा समुदाय को सरकार ने सामाजिक और शैक्षणिक रूप से पिछड़ा वर्ग घोषित किया।
विधानमंडल में पारित होने के बाद मराठा आरक्षण का मामला अदालती हो गया। जून 2019 में बम्बई उच्च न्यायालय ने मराठा आरक्षण की संवैधानिकता को बरकरार रखा, लेकिन सरकार से इसे राज्य पिछड़ा वर्ग आयोग की सिफारिश के अनुसार 16% से घटाकर 12 से 13% करने को कहा।
इस आरक्षण को बड़ा झटका तब लगा जब मई 2021 को जब सुप्रीम कोर्ट ने मराठा आरक्षण को असंवैधानिक ठहराया और कानून को रद्द कर दिया। अदालत ने माना कि मराठा आरक्षण 50 फीसदी सीलिंग का उल्लंघन कर दिया गया था।
इसके बाद तत्कालीन उद्धव सरकार ने मराठों को आर्थिक कमजोर वर्ग (ईडब्ल्यूएस) कोटा में समायोजित करने का निर्णय लिया। हालांकि, मराठा क्रांति मोर्चा (एमकेएम) ने इसे अस्वीकार्य करार दिया। मराठा क्रांति मोर्चा, समुदाय के लिए आरक्षण की वकालत करने वाले विभिन्न मराठा समूहों का एक प्रमुख निकाय है।
महाराष्ट्र में मराठा समुदाय के लिए सरकारी नौकरियों और शिक्षा में आरक्षण की मांग बहुत पुरानी है। साल 1997 में मराठा संघ और मराठा सेवा संघ ने सरकारी नौकरियों और शैक्षणिक संस्थानों में आरक्षण के लिए पहला बड़ा मराठा आंदोलन किया। प्रदर्शनकारियों ने अक्सर कहा है कि मराठा उच्च जाति के नहीं बल्कि मूल रूप से कुनबी यानी कृषि समुदाय से जुड़े थे।
मौजूदा स्थिति की बात करें तो मराठा समुदाय महाराष्ट्र की आबादी का लगभग 31 प्रतिशत है। यह एक प्रमुख जाति समूह है लेकिन फिर भी समरूप यानी एक समान नहीं है। इसमें पूर्व सामंती अभिजात वर्ग और शासकों के साथ-साथ सबसे ज्यादा वंचित किसान शामिल हैं। राज्य में अक्सर कृषि संकट, नौकरियों की कमी और सरकारों के अधूरे वादों का हवाला देते हुए समाज ने आंदोलन किये हैं।
2018 में महाराष्ट्र विधानमंडल से मराठा समुदाय के लिए शिक्षा और सरकारी नौकरियों में 16% आरक्षण का प्रस्ताव वाला एक विधेयक पारित किया गया। विधेयक में मराठा समुदाय को सरकार ने सामाजिक और शैक्षणिक रूप से पिछड़ा वर्ग घोषित किया।
विधानमंडल में पारित होने के बाद मराठा आरक्षण का मामला अदालती हो गया। जून 2019 में बम्बई उच्च न्यायालय ने मराठा आरक्षण की संवैधानिकता को बरकरार रखा, लेकिन सरकार से इसे राज्य पिछड़ा वर्ग आयोग की सिफारिश के अनुसार 16% से घटाकर 12 से 13% करने को कहा।
इस आरक्षण को बड़ा झटका तब लगा जब मई 2021 को जब सुप्रीम कोर्ट ने मराठा आरक्षण को असंवैधानिक ठहराया और कानून को रद्द कर दिया। अदालत ने माना कि मराठा आरक्षण 50 फीसदी सीलिंग का उल्लंघन कर दिया गया था।
इसके बाद तत्कालीन उद्धव सरकार ने मराठों को आर्थिक कमजोर वर्ग (ईडब्ल्यूएस) कोटा में समायोजित करने का निर्णय लिया। हालांकि, मराठा क्रांति मोर्चा (एमकेएम) ने इसे अस्वीकार्य करार दिया। मराठा क्रांति मोर्चा, समुदाय के लिए आरक्षण की वकालत करने वाले विभिन्न मराठा समूहों का एक प्रमुख निकाय है।
देवेंद्र फडणवीस, एकनाथ शिंदे
- फोटो :
अमर उजाला
इस पर सरकार का क्या कहना है?
मराठा आरक्षण पर सोमवार को महाराष्ट्र कैबिनेट उपसमिति की बैठक हुई। बैठक के बाद सीएम शिंदे ने कहा, ‘मैं पहले ही प्रदर्शनकारियों से बात कर चुका हूं और हम इस मुद्दे को व्यवस्थित तरीके से सुलझाएंगे। हमारी सरकार मराठा आरक्षण से जुड़े मुद्दों को सुलझाने के लिए गंभीर है। राज्यमंत्री गिरीश महाजन और अन्य मंत्री जालना गए हैं। वे वहां इस मुद्दे को शांत करने के लिए वार्ता करेंगे।’
महाराष्ट्र सरकार को पुलिस द्वारा बल प्रयोग पर खेद- फडणवीस
प्रदर्शनकारियों पर लाठीचार्ज को लेकर आलोचनाओं का सामना कर रहे उपमुख्यमंत्री देवेन्द्र फडणवीस ने बयान दिया है। उन्होंने सोमवार पुलिसिया कार्रवाई पर खेद जताया। उन्होंने कहा कि सरकार को पुलिस द्वारा बल प्रयोग पर खेद है।
सरकार ने मनोज जरांगे को बातचीत के लिए बुलाया
आरक्षण की मांग को लेकर भूख हड़ताल पर बैठे मनोज जरांगे पाटिल को महाराष्ट्र सरकार ने आमंत्रित किया है। डिप्टी सीएम देवेंद्र फडणवीस ने पाटिल से बात की और उन्हें चर्चा के लिए बुलाया। उपमुख्यमंत्री ने जरांगे पाटिल को आश्वासन दिया कि जालना घटना में न्याय होगा।
मराठा आरक्षण पर सोमवार को महाराष्ट्र कैबिनेट उपसमिति की बैठक हुई। बैठक के बाद सीएम शिंदे ने कहा, ‘मैं पहले ही प्रदर्शनकारियों से बात कर चुका हूं और हम इस मुद्दे को व्यवस्थित तरीके से सुलझाएंगे। हमारी सरकार मराठा आरक्षण से जुड़े मुद्दों को सुलझाने के लिए गंभीर है। राज्यमंत्री गिरीश महाजन और अन्य मंत्री जालना गए हैं। वे वहां इस मुद्दे को शांत करने के लिए वार्ता करेंगे।’
महाराष्ट्र सरकार को पुलिस द्वारा बल प्रयोग पर खेद- फडणवीस
प्रदर्शनकारियों पर लाठीचार्ज को लेकर आलोचनाओं का सामना कर रहे उपमुख्यमंत्री देवेन्द्र फडणवीस ने बयान दिया है। उन्होंने सोमवार पुलिसिया कार्रवाई पर खेद जताया। उन्होंने कहा कि सरकार को पुलिस द्वारा बल प्रयोग पर खेद है।
सरकार ने मनोज जरांगे को बातचीत के लिए बुलाया
आरक्षण की मांग को लेकर भूख हड़ताल पर बैठे मनोज जरांगे पाटिल को महाराष्ट्र सरकार ने आमंत्रित किया है। डिप्टी सीएम देवेंद्र फडणवीस ने पाटिल से बात की और उन्हें चर्चा के लिए बुलाया। उपमुख्यमंत्री ने जरांगे पाटिल को आश्वासन दिया कि जालना घटना में न्याय होगा।