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ये है नेपाल के जनकपुर का ऐतिहासिक महत्व, प्रधानमंत्री की यात्रा से फिर आया चर्चा में

Fri, 11 May 2018 03:11 PM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Updated Fri, 11 May 2018 03:11 PM IST
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Historical importance of Janakpur in Nepal the appearance place of Goddess devi Sita
जनकपुर मंदिर - फोटो : holydham
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी नेपाल दौरे पर हैं। इस यात्रा के दौरान दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय वार्ता होगी। माना जा रहा है कि पिछले दिनों मधेशी आंदोलन के दौरान भारत-नेपाल के संबंधों में आए रूखेपन में यह यात्रा गर्माहट भरेगी। साथ ही नेपाल में चीन के बढ़ते प्रभाव प्रभाव के मद्देनजर भारत नेपाल के साथ अपने प्रागैतिहासिक संबंधों को प्रगाढ़ करना चाहता है। इसके लिए यह यात्रा काफी अहम हो गई है। भारत ने रामायण सर्किट के तहत जनकपुरधाम और अयोध्या के बीच बस सेवा शुरू की है। प्रधानमंत्री नेपाल यात्रा के दौरान सबसे पहले जनकपुर पहुंचे और वहां जानकी मंदिर में देवी सीता के दर्शन और पूजन किया। आइए जानते हैं क्या महत्व है इस स्थान का। 
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जनकपुर नेपाल का एक प्रसिद्ध वैष्णव तीर्थ स्थान है और भगवान राम की पत्नी देवी सीता के जन्मस्थान के रूप में प्रसिद्ध है। पौराणिक ग्रंथों के अनुसार यह राजा जनक के राज्य मिथिला की राजधानी हुआ करता था। 
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जनकपुर भारत के बिहार राज्य के सीतामढ़ी या दरभंगा से 24 मील दूर नेपाल में स्थित है। यहां एक खूबसूरत संगमरमर का जानकी (सीता) जी का मंदिर है जो नौलखा मंदिर के नाम से मशहूर है। विवाहा पंचमी और राम नवमी के पावन दिनों में यहां धार्मिक उत्सव, तीर्थयात्राएं, व्यापार मेले और अन्य उत्सव आयोजित किए जाते हैं। 
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जनकपुर वह स्थान है जहां धन की देवी- देवी सीता प्रकट हुई थीं। इसी जगह पर जब राजा जनक खेत में हल चला रहे थे, तब उन्हें धरती से सोने का एक सुंदर संदूक मिला जिसमें देवी सीता थीं।  

जनकपुर के नजदीक धार्मिक स्थान 

जनकपुर के चारों ओर शिलानाथ, कपिलेश्वर, कूपेश्वर, कल्याणेश्वर, जलेश्वर, क्षीरेश्वर और मिथिलेश्वर रक्षक देवताओं के रूप में शिव मंदिर अभी भी मौजूद हैं। साथ ही इस प्राचीन धार्मिक तीर्थ के चारों ओर विश्वामित्र, गौतम, वाल्मीकि और याज्ञवल्क्य ऋषि के आश्रम थे, जो अभी भी किसी न किसी रूप में मौजूद हैं। 

ऐतिहासिक धनुष मंदिर

Historical importance of Janakpur in Nepal the appearance place of Goddess devi Sita
धनुष मंदिर - फोटो : holydham
महान धार्मिक ग्रंथ रामायण में दो मुख्य चरित्र हैं- राम और सीता। रामायण की कथा के अनुसार राजा जनक के महल में शिव जी का धनुष था जो उन्होंने उनकी भक्ति से प्रसन्न हो कर दिया है। यह बहुत भारी धनुष था जिसे उठाना संभव नहीं था। लेकिन एक बार राजा जनक ने देखा कि सीता जी पूजा के दौरान एक हाथ से धनुष उठाकर पूजा स्थल की सफाई कर रही थीं। तभी राजा जनक से तय कर लिया था कि वह सीता के विवाह योग्य वर वही होगा जो शिव जी के इस धनुष पर प्रत्यंचा चढ़ा पाएगा। 

सीता जी के विवाह के लिए राजा जनक से धनुष यज्ञ करवाया। स्वंयवर में एक से बढ़कर एक राजा पधारे। लेकिन इनमें से कोई धनुष को हिला पाने में भी सक्षम नहीं हो पाया था। स्वयंवर में राम और लक्ष्मण अपने गुरू विश्वामित्र के साथ पहुंचे थे। जब सभी राजा विफल हो गए और इस बात से राजा जनक दुखी, तब गुरू की आज्ञा से भगवान राम ने शिव जी के धनुष पर प्रत्यंचा चढ़ाई वह तीन टुकड़ों में टूट गया। 

इस धनुष का एक हिस्सा उड़कर स्वर्ग पहुंचा। दूसरा हिस्सा पाताल में जा गिरा, जिसके ठीक उपर विशाल धनुष सागर है। और तीसरा हिस्सा आज के धनुषधाम में जा गिरा जो जनकपुर से 40 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। श्रद्धालु और पर्यटक विशाल यहां विशाल धनुष के आकार के पत्थर देख सकते हैं। 

इसके बाद देवी सीता ने भगवान राम को अपने वर के रूप में स्वीकार किया। अयोध्या से बारात आई और माघ शीर्ष शुक्ल पंचमी को जनकपुर में राजा राम और देवी सीता का विवाह संपन्न हुआ। 

बताते हैं कि काल के बीतने के साथ-साथ त्रेता युग के इस जनकपुर विलीन हो गया। करीब साढ़े तीन सौ साल पहले महात्मा सूरकिशोर दास ने जानकी जी के जन्मस्थान का पता लगाया और मूर्ति स्थापना कर पूजा शुरू की। इसके बाद ही आज के जनकपुर का विकास हुआ। 
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