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दाभोलकर और पंसारे हत्याकांड के ट्रायल में देरी से हाईकोर्ट नाराज, सीबीआई-सीआईडी को लगाई फटकार

Fri, 14 Feb 2020 03:09 AM IST
योगेश साहू न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मुंबई।
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मुंबई। Published by: योगेश साहू Updated Fri, 14 Feb 2020 03:09 AM IST
सार

  • दाभोलकर हत्याकांड के ट्रायल में देरी के लिए सीबीआई को फटकार
  • पंसारे हत्याकांड में सीआईडी के भी ढीलेपन से नाराज हुआ हाईकोर्ट

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High court angry over delay in trial of Dabholkar and Pansare murder case, reprimanded CBI and CID
प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Pixabay

विस्तार

बांबे हाईकोर्ट ने बृहस्पतिवार को बुद्धिजीवी नरेंद्र दाभोलकर और सामाजिक कार्यकर्ता गोविंद पंसारे की हत्याओं के मामलों में ट्रायल शुरू किए जाने को लेकर की जा रही देरी पर चिंता जताई। हाईकोर्ट ने इसके लिए सीबीआई और सीआईडी को जमकर फटकार लगाते हुए कहा, दोनों मृतकों और उनके परिवारों और गिरफ्तार किए गए आरोपियों, किसी को भी न्याय देने में ‘विफलता’ नहीं होनी चाहिए।

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अदालत ने कहा, इन लोगों के भी कुछ मूल अधिकार होते हैं। पीठ ने दोनों जांच एजेंसियों को 24 मार्च को यह बताने का आदेश दिया है कि दोनों मामलों में ट्रायल कब शुरू किया जाएगा। जस्टिस एससी धर्माधिकारी और जस्टिस आरआई चागला की खंडपीठ ने कहा, दाभोलकर की गोली मारकर हत्या किए जाने को सात साल और पंसारे की हत्या को पांच साल हो चुके हैं।
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पीठ ने गौर किया कि जांच एजेंसियां अभी भी पंसारे मामले में भगोड़े हत्यारों और दाभोलकर हत्याकांड में शामिल हथियार की बरामदगी के मामले में जांच कर रही है। पीठ ने कहा कि इन लोगों के खिलाफ जल्द से जल्द मुकदमा शुरू होना चाहिए। पीठ ने यह निर्णय दाभोलकर और पंसारे के परिजनों की याचिकाओं पर सुनवाई के दौरान दिया। दोनों के परिजनों ने अदालत से इन हत्याकांडों की जांच की न्यायिक निगरानी किए जाने की मांग की थी।  
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‘लोगों का सिस्टम से विश्वास खत्म नहीं होना चाहिए’
पीठ ने सीबीआई और सीआईडी को फटकारते हुए कहा, यहां क्रिमिनल जस्टिस डिलीवरी सिस्टम की अति विश्वसनीयता दांव पर है। लोगों का सिस्टम में से पूरा विश्वास खत्म नहीं होना चाहिए। पीठ ने कहा, अपराध 2013 और 2015 में अंजाम दिए गए थे। 

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