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नागा शांति वार्ता को लेकर मणिपुर और नगालैंड में हाई अलर्ट, अलग झंडे और संविधान पर नहीं बनी थी बात

Sun, 27 Oct 2019 05:54 AM IST
संजीव कुमार झा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कोहिमा/इंफाल
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कोहिमा/इंफाल Published by: संजीव कुमार झा Updated Sun, 27 Oct 2019 05:54 AM IST
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High alert in Manipur, Nagaland in view of Naga peace talks
नागालैंड में छात्र संगठनों का विरोध - फोटो : PTI

केंद्र सरकार और नेशनल सोशलिस्ट काउंसिल ऑफ नगालैंड (आईएम) के बीच शांति वार्ता अपने आखिरी चरण में पहुंच गया है। 31 अक्तूबर को केंद्र और एनएससीएन (आईएन) के बीच एक समझौते पर हस्ताक्षर हो सकते हैं। किसी तरह की अप्रिय घटना की आशंका को देखते हुए नगालैंड और मणिपुर को हाई अलर्ट पर रखा गया है। दोनों राज्यों में पुलिसकर्मियों की छुट्टियां रद कर दी गई हैं।

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अधिकारियों को आशंका है कि बातचीत के नतीजे से नगालैंड के कुछ गुटों में नाराजगी पैदा हो सकती है। नगालैंड के डीजीपी टी जॉन लॉन्गकुमेर ने बताया कि करीब 60 साल से लटके नगा शांति समझौते पर दस्तखत किया जाना सबसे ज्यादा मुश्किल काम हो सकता है। सशस्त्र पुलिस की 7 रिजर्व बटालियन को स्टैंडबाई रखा गया है।

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दो महीने का राशन और ईंधन भी जमा कर लिया गया है

इसके अलावा दो महीने का राशन और ईंधन भी जमा कर लिया गया है। पड़ोसी राज्य मणिपुर के उखरूल जिले में प्रशासन ने नागरिक आपूर्ति विभाग से जरूरी सामान जमा करके रखने को कह दिया है ताकि किसी तरह की प्रतिकूल स्थिति पैदा होने पर आपूर्ति में बाधा न हो।

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क्षेत्रीय राजनीतिक दलों के साथ भाजपा का प्रतिनिधिमंडल इस संबंध में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृहमंत्री अमित शाह से मिलना चाहता है। नगालैंड के मुख्य सचिव टेमजेन टॉय ने बताया कि हालात सामान्य हैं। जनता को डरने की आवश्यकता नहीं है। नगालैंड के डीजीपी लॉन्गकुमेर ने कहा कि लोगों को खुश रहना चाहिए कि उनकी सुरक्षा के लिए राज्य की पुलिस हाई अलर्ट पर है।

 अलग झंडे और संविधान पर नहीं बनी बात

कई सामाजिक संगठनों छात्र संगठनों ने पहले ही बातचीत से बाहर रखे जाने पर नाराजगी जाहिर की है। प्रभावशाली नागा स्टूडेंट्स फेडरेशन ने प्रधानमंत्री को एक ज्ञापन भी दिया, जिसमें एक नागा राष्ट्रीय ध्वज के जरिए नागा पहचान को अस्तित्व दिए जाने की मांग की गई है। केंद्र और एनएससीएन (आईएन) के बीच हुई बातचीत के आखिरी चरण में अलग झंडे और संविधान को लेकर गतिरोध खत्म नहीं किया जा सका। हालांकि, दोनों पक्ष इस पर दोबारा बातचीत के लिए तैयार हैं। 

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