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Hindi News ›   India News ›   Here the fights in the name of cow and bull and their trafficking business crosses 50 billion

यहां गाय-बैल के नाम पर मारामारी और वहां इनकी तस्करी का कारोबार 50 अरब के पार पहुंच गया है 

Fri, 10 Aug 2018 12:08 AM IST
जितेंद्र भारद्वाज, डिजिटल ब्यूरो, नई दिल्ली
जितेंद्र भारद्वाज, डिजिटल ब्यूरो, नई दिल्ली Updated Fri, 10 Aug 2018 12:08 AM IST
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Here the fights in the name of cow and bull and their trafficking business crosses 50 billion
पशु तस्करी (फाइल फोटो)।

देश में गाय-बैल की सुरक्षा को लेकर मारामारी तक हो जाती है। एक तरफ सरकार इन्हें बचाने का दावा कर रही है तो दूसरी ओर कुछ सामाजिक संगठन खुद को इनके हमदर्द बताकर कानून तक को अपने हाथ में लेने से नहीं घबराते हैं।अब इसका दूसरा पहलू देखें।

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अलग-अलग राज्यों से गाय-बैल को तस्करी के जरिए बांग्लादेश तक पहुंचा दिया जाता है। यह अवैध कारोबार कोई हजारों में नहीं बल्कि अरबों में होता है। वर्तमान में यह धंधा करीब 50 अरब के पार पहुंच गया है। सालाना दस लाख से ज़्यादा गाय-बैल बॉर्डर के पार पहुंचा दिए जाते हैं। इनका केवल बीफ के लिए इस्तेमाल होता है। अब उत्तर-पूर्व के राज्यों में भी बीफ का प्रचलन बढ़ने लगा है।
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सरकार भी मानती है कि बड़े पैमाने पर गाय की तस्करी होती है

तीन वर्षों में भारत-बांग्लादेश सीमा पर गाय की तस्करी के मामले 
 
साल पशु तस्करी के मामले जब्त किए पशु गिरफ्तार तस्कर
2015 17537 153602 605
2016 20903 168801 670
2017 17919 119299 514
2018 4938 21617 99

                                         आंकड़े गृह मंत्रालय की रिपोर्ट के मुताबिक, इस साल 30 जून तक के  

इतनी एफआईआर दर्ज हुई हैं
 
साल एफआईआर आरोप पत्र दायर दोष सिद्ध मामले
2015 705 429 60
2016 652 327 48
2017 437 09 00
2018 84 00 00

                                                                                                              (इस साल मई तक) 

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इस बाबत गृह राज्यमंत्री किरेन रिजिजू क्या कहते हैं

Here the fights in the name of cow and bull and their trafficking business crosses 50 billion
किरण रिजिजू

गृह मंत्रालय ने एक समिति गठित की थी। इस समिति ने परिवहन, जांच-सुरक्षा एवं निगरानी तंत्र को लेकर कई तरह की सिफारिशें की हैं। इनके क्रियान्वयन के लिए संबंधित एजेंसियों को सूचित कर दिया गया है। इसके अलावा पशु तस्करी रोकने के लिए बीएसएफ ने भी कुछ ठोस कदम उठाए हैं।

  • सीमा पर 24 घंटे गश्त, नाकेबंदी और निगरानी चैकियों की स्थापना कर प्रभावशाली नियंत्रण करना 
  •  
  • सीमा चौकियों के सुरक्षा तंत्र की लगातार समीक्षा की जा रही है
  •  
  • बॉर्डर पर तेज रोशनी की व्यवस्था की गई है 
  •  
  • अंतरराष्ट्रीय सीमा पर नदी क्षेत्र में वाटर क्राफ्ट नौका व फ्लोटिंग बीओपी का इस्तेमाल करना 
  •  
  • सीमा पर बाॅर्डर गार्ड बांग्लादेश (बीजीबी) और सीमा सुरक्षा बल (बीएसएफ) द्वारा संयुक्त गश्त लगाना 
  •  
  • इंटेलीजेंस एजेंसियों की मदद लेना 

 

500 से 2000 में हर बाॅर्डर व चैक पोस्ट पार हो जाती है

Here the fights in the name of cow and bull and their trafficking business crosses 50 billion
पशु तस्करी (फाइल फोटो)।

सुरक्षा एजेंसियों के मुताबिक, गाय व बैल की तस्करी का सबसे बड़ा केंद्र पश्चिम बंगाल है। हरियाणा, राजस्थान, उत्तर प्रदेश, झारखंड, उतराखंड व पंजाब से पशुओं को सड़क के रास्ते पहले पश्चिम बंगाल लाया जाता है। यहां से उन्हें नदी-नालों और दूसरे कच्चे रास्तों के जरिए बांग्लादेश भेज देते हैं।

ऐसा नहीं है कि उत्तरी भारत के राज्यों से लेकर पश्चिम बंगाल, असम व मेघालय तक रास्ते में कोई चैक पोस्ट नहीं पड़ती। कई राज्यों के बॉर्डर आते हैं, लेकिन तस्करों की सेटिंग के आगे हर बॉर्डर व चैक पोस्ट इनके लिए आगे की राह खोल देते हैं।

राज्य की सीमा है तो पांच सौ रुपये से लेकर दो हजार रुपये तक की रिश्वत देनी पड़ती है। छोटी-मोटी चैक पोस्ट पार करने में सौ से पांच सौ रुपये लगते हैं। बीच में कई बार डीटीओ-आरटीओ या किसी दूसरे विभाग का कोई अधिकारी पशुओं से भरी गाड़ी रोक लेता है तो उसके साथ भी सेटिंग हो जाती है। असम सहित कई इलाकों में गायों को नदी में उतार दिया जाता है और बांग्लादेश में निकाल लेते हैं।

साउथ बंगाल में पशु तस्करी का मुख्य केंद्र मुर्शिदाबाद है
साउथ बंगाल में पशु तस्करी का मुख्य केंद्र मुर्शिदाबाद माना जाता है। 24 परगना नॉर्थ भी तस्करी का एक बड़ा अड्डा है। यहां से लोकल पुलिस और कस्टम विभाग की मिलीभगत से पशु बांग्लादेश की सीमा में धकेल दिए जाते हैं। कई जगह ऐसी हैं जहां पर बाड़ आदि नहीं है, वहां से भी तस्करी होती है। असम में ब्रहमपुत्र नदी के रास्ते गायों को बांग्लादेश पहुंचा देते हैं। नदी में तैरते वक्त गाय का केवल सिर दिखता है, बाकी हिस्सा पानी में रहता है। यह दूर बैठे सुरक्षा कर्मियों को गच्चा देने के लिए काफी होता है।

अब मेघालय में भी बड़े पैमाने पर बीफ की मांग बढ़ रही है.......
बांग्लादेश में तस्करी के बाद मेघालय अब बीफ का केद्र बनता जा रहा है। हालांकि यहां पश्चिम बंगाल की तरह बड़े स्तर पर पशु तस्करी नहीं होती, बल्कि छोटे छोटे समूहों में पहाड़ी रास्तों के ज़रिए गायों को यहां लाया जाता है। सुरक्षा दल पहाड़ पर तैनात रहते हैं, जबकि तस्कर नीचे से गायों को आगे बढ़ा देते हैं। गोवाहाटी के निकट खानापाड़ा को बीफ का हाट कहा जाने लगा है।

भारत से 5,000 से 10,000 में गाय खरीदते हैं और सीमा पार 50 हजार से 80 हजार रुपये में बेच देते हैं
पशु तस्कर भारतीय राज्यों से मामूली कीमत पर गाय खरीदते हैं। पांच से दस हजार रुपये में उन्हें गाय मिल जाती है। अगर बैल है तो वह और भी सस्ता मिलता है। अधिकांश गाय दूध देने वाली नहीं होती। इनकी उम्र भी ज्यादा होती है।

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