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उत्तर भारत में झमाझम बारिश: मैदानी इलाकों में ओलावृष्टि से फसलें बर्बाद, पारा भी गिरा; जानिए आपके राज्य का हाल

Wed, 08 Apr 2026 06:44 AM IST
Shubham Kumar अमर उजाला ब्यूरो
अमर उजाला ब्यूरो Published by: Shubham Kumar Updated Wed, 08 Apr 2026 06:44 AM IST
सार

उत्तर-पश्चिम भारत में पश्चिमी विक्षोभ की वजह से जम्मू-कश्मीर, हिमाचल और मैदानी इलाकों में भारी बारिश और ओलावृष्टि हुई। भूस्खलन से राजमार्ग बंद और सैकड़ों वाहन फंसे। दिल्ली-एनसीआर और यूपी में तापमान गिरा, फसलों को नुकसान भी। स्काईमेट ने चेतावनी दी है कि 2026 में सुपर अल नीनो के कारण गर्मी बढ़ेगी और मानसून कमजोर रहेगा।

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Heavy Rains Lash North India Crops Devastated by Hailstorms in the Plains Mercury Drops
सांकेतिक तस्वीर - फोटो : ANI

विस्तार

पश्चिमी विक्षोभ के प्रभाव से बदले मौसम से उत्तर-पश्चिम भारत में मंगलवार को झमाझम बारिश हुई। जम्मू-कश्मीर और हिमाचल प्रदेश में ऊंचाई वाले इलाकों में भारी हिमपात के साथ मूसलाधार बारिश हुई। कई जगह भूस्खलन होने से राजमार्ग समेत कई रास्ते बंद हो गए और सैकड़ों वाहन रास्तों में फंस गए। दिल्ली-एनसीआर यूपी समेत उत्तर भारत के मैदानी इलाकों में बारिश के साथ ओले गिरे, जिससे तापमान में गिरावट दर्ज की गई, हालांकि, कुछ क्षेत्रों में फसलों को नुकसान पहुंचने की भी सूचना है।

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भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी) के अनुसार, जम्मू-कश्मीर, हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड में हिमपात के साथ भारी बरसात हुई। पंजाब, हरियाणा, पश्चिमी उत्तर प्रदेश, पश्चिमी राजस्थान, पश्चिमी व पूर्वी मध्य प्रदेश, पश्चिम बंगाल के गंगा किनारे वाले मैदानी क्षेत्र, झारखंड और ओडिशा में कुछ स्थानों पर 30-70 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से हवाएं चलीं और बारिश हुई। ओडिशा में कई स्थानों और तटीय आंध्र प्रदेश में भारी वर्षा दर्ज की गई। झारखंड, तेलंगाना, बंगाल, उत्तराखंड और छत्तीसगढ़ में कुछ स्थानों पर ओलावृष्टि हुई। पूर्वोत्तर के सभी राज्यों, कोंकण और गोवा, गुजरात के सौराष्ट्र और कच्छ में भी कुछ स्थानों पर बारिश हुई।
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2026 में सूखे, भीषण गर्मी का खतरा
नई दिल्ली। पहले से ही जलवायु परिवर्तन की मार झेल रही दुनिया पर इस साल सुपर अल नीनो का खतरा मंडरा रहा है। निजी मौसम पूर्वानुमान एजेंसी स्काईमेट ने मंगलवार को चेतावनी जारी की है कि वर्ष 2026 में भारत को भीषण गर्मी और कमजोर मानसून का सामना करना पड़ सकता है। रिपोर्ट के अनुसार, भारत में अल नीनो के प्रभाव के कारण जून से सितंबर के बीच होने वाली मानसूनी बारिश औसत से कम रहने की आशंका है।
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स्काईमेट के अनुसार, 2026 में मानसून की बारिश दीर्घावधि औसत (868.6 मिमी) का केवल 94% रहने का अनुमान है। विशेष रूप से मानसून के दूसरे भाग में बारिश में बड़ी गिरावट देखी जा सकती है। हालांकि, आईएमडी अगले सप्ताह अपना आधिकारिक पूर्वानुमान जारी करेगा। वहीं, आईएंडा के प्रारंभिक संकेतों के अनुसार, अप्रैल में देश के अधिकांश हिस्सों में सामान्य से अधिक बारिश हो सकती है, लेकिन पूर्वोत्तर भारत में सूखे जैसी स्थिति बन सकती है।


द.-पूर्वी प्रायद्वीपीय क्षेत्रों में लू के दिनों की संख्या सामान्य से अधिक
मौसम विज्ञानियों का मानना है कि अप्रैल से जून के बीच उत्तर, मध्य और उत्तर-पश्चिम भारत के साथ-साथ दक्षिण-पूर्वी प्रायद्वीपीय क्षेत्रों में हीटवेव (लू) के दिनों की संख्या सामान्य से अधिक होगी। इस दौरान पूर्वी भारत, मध्य भारत के पूर्वी हिस्से और पूर्वोत्तर राज्यों में अधिकतम तापमान सामान्य से ऊपर रहने की संभावना है। यूरोपीय मध्यम अवधि मौसम पूर्वानुमान केंद्र (ईसीएमडब्व्ल्यूएफ) के डेटा से पता चलता है कि प्रशांत महासागर में सन्मार्गी पवनें कमजोर पड़ रही हैं।

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