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Bofors Deal case: मामले की दुबारा जांच की अनुमति संबंधी याचिका पर सुनवाई टली
अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली
Updated Sun, 18 Feb 2018 01:03 AM IST
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बोफोर्स
- फोटो : SELF
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बोफोर्स तोप दलाली मामले में नए सिरे से जांच करने का निर्देश दिया जाए या नहीं, इस मुद्दे पर अदालत में दस्तावेज के अभाव में सुनवाई नहीं हो पाई। अब सुनवाई 7 अप्रैल को होगी।
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बिना समुचित दस्तावेज सुनवाई असंभव : कोर्ट
शनिवार को सीबीआई की ओर से दायर याचिका पर तीस हजारी अदालत स्थित मुख्य मैट्रोपॉलिटन मजिस्ट्रेट आशु गर्ग के समक्ष सुनवाई हुई। उन्होंने कहा कि केस से संबंधित पूरे दस्तावेज नहीं हैं। ऐसे में वे सुनवाई करने में असमर्थ हैं। अदालत ने सीबीआई को पूरे दस्तावेज मुहैया कराने का निर्देश दिया है।
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तीस हजारी कोर्ट में सीबीआई ने एक फरवरी को यह याचिका दाखिल की थी। एजेंसी ने इस मामले में 2005 में दिल्ली हाईकोर्ट के केस बंद करने के आदेश को भी सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है। यह इसलिए भी महत्वपूर्ण है, क्योंकि सीबीआई ने ऐसा अटॉर्नी जनरल के.के. वेणुगोपाल की उस सलाह के बाद किया है, जिसमें उन्होंने 13 साल पहले बंद मामले को फिर से शुरू करना सीबीआई की साख के लिए घातक होने की बात कही थी।
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सीबीआई ने तीस हजारी कोर्ट में अंतरराष्ट्रीय प्राइवेट इन्वेस्टिगेशन एजेंसी के प्रमुख माइकल हर्शमैन के नए खुलासों के बाद यह याचिका दायर की है। इस एजेंसी को वीपी सिंह सरकार ने बोफोर्स घोटाले की जांच की जिम्मेदारी दी थी।
बोफोर्स तोप बनाने वाली स्वीडन की कंपनी पर आरोप था कि उसने 1473 करोड़ रुपये के इस सौदे को पाने के लिए 1986 में राजीव गांधी सरकार के दौरान 64 करोड़ की घूस दी थी। हर्शमैन ने दावा किया कि उसके पास स्विस अकाउंट मॉन्ट ब्लैंक की जानकारी है, जिसमें घूस की रकम को जमा किया गया था।