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सुप्रीम कोर्ट: सेब के बागों को हटाने के आदेश के खिलाफ याचिका पर आज सुनवाई; हाईकोर्ट के आदेश को दी गई है चुनौती
Mon, 28 Jul 2025 06:47 AM IST
शिव शुक्ला
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: शिव शुक्ला
Updated Mon, 28 Jul 2025 06:47 AM IST
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सुप्रीम कोर्ट।
- फोटो : अमर उजाला
सुप्रीम कोर्ट सोमवार को शिमला के पूर्व उपमहापौर की उस याचिका पर सुनवाई करेगा, जिसमें सरकार को अतिक्रमित वन भूमि से सेब के बागों को हटाने के लिए हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट से मिले आदेश को चुनौती दी गई है।
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मुख्य न्यायाधीश बीआर गवई, जस्टिस के विनोद चंद्रन और जस्टिस एन वी अंजारिया की पीठ पूर्व उपमहापौर टिकेन्द्र सिंह पंवार एवं कार्यकर्ता अधिवक्ता राजीव राय की याचिका पर सुनवाई करेगी। याचिका में कहा गया है कि हाईकोर्ट ने दो जुलाई को वन विभाग को सेब के बागों को हटाने और उनकी जगह वन प्रजातियां लगाने तथा अतिक्रमणकारियों से भू-राजस्व के बकाया के रूप में इसकी लागत वसूलने का आदेश दिया था।
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याचिकाकर्ताओं का कहना है कि उक्त आदेश मनमानापूर्ण एवं असंगत तथा संवैधानिक, वैधानिक और पर्यावरणीय सिद्धांतों के विरूद्ध है, जिसके कारण पारिस्थितिकी दृष्टि से नाजुक हिमाचल प्रदेश में अपरिवर्तनीय पारिस्थितिक एवं सामाजिक-आर्थिक नुकसान को रोकने के लिए शीर्ष अदालत के हस्तक्षेप की जरूरत है।
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याचिका में कहा गया है कि विशेष रूप से मानसून के मौसम के दौरान बड़े पैमाने पर पेड़ों की कटाई से हिमाचल प्रदेश में भूस्खलन और मिट्टी के कटाव का खतरा काफी बढ़ जाता है। हिमाचल प्रदेश भूकंपीय गतिविधि और पारिस्थितिक संवेदनशीलता वाला क्षेत्र है। याचिका में कहा गया है, सेब के बाग महज अतिक्रमण नहीं हैं, बल्कि ये मृदा स्थिरता में योगदान देते हैं, स्थानीय वन्यजीवों के लिए आवास उपलब्ध कराते हैं और राज्य की अर्थव्यवस्था की रीढ़ हैं तथा हजारों किसानों की आजीविका को सहारा देते हैं।