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लॉकडाउन के दौरान कर्मचारियों को पूरी सैलरी देने के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई, केंद्र देगा दो हफ्तों में जवाब

Tue, 28 Apr 2020 04:45 PM IST
श्रीधर मिश्रा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: श्रीधर मिश्रा Updated Tue, 28 Apr 2020 04:45 PM IST
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Hearing in Supreme Court against giving full salary to employees during lockdown, Center goverment will reply in two weeks
फाइल फोटो - फोटो : PTI

लॉकडाउन के दौरान कर्मचारियों को पूरा वेतन देने के खिलाफ याचिकाओं पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हुई। दरअसल कोरोना वायरस के संक्रमण को फैलने से रोकने के लिए सरकार की तरफ से लॉकडाउन किया गया, जिससे ज्यादा तर कामकाज रुक गए। ऐसे में बंदी के दौरान कर्मचारियों को पूरा वेतन देने के सरकार के आदेश के खिलाफ कई याचिकाएं दायर की गई हैं, जिस पर सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र से जवाब मांगा है।

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न्यायमूर्ति एन वी रमण, न्यायमूर्ति संजय किशन कौल और न्यायमूर्ति बी आर गवई की पीठ ने सोमवार को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से इस मामले की सुनवाई की। इस दौरान बेंच ने केंद्र को दो सप्ताह के अंदर जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया। 
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बता दें कि लॉकडाउन के दौरान कर्मचारियों को पूरी सैलरी देने के मामले में गृह मंत्रालय की अधिसूचना को नागरीका एक्सपोर्ट्स और फिक्स पैक्स प्राइवेट लिमिटेड के साथ तीन निजी कंपनियों ने चुनौती दी है।
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तीन जजों वाली बेंच ने आदेश में कहा, ‘‘सॉलिसीटर जनरल (तुषार मेहता) इन याचिकाओं पर जवाब दाखिल करना चाहते हैं। दो सप्ताह बाद इसे लिस्टेड किया जाए।’’

सुप्रीम कोर्ट ने इन निजी फर्मों से कहा कि वे अपने आवेदनों की प्रति ई मेल के माध्यम से सॉलिसीटर जनरल को उपलब्ध कराएं।

इस मामले में टेक्सटाइल फर्म नागरीका एक्सपोर्ट्स लिमिटेड ने कारखानों के बंद होने के बावजूद अपने स्टाफ, ठेका मजदूरों, दिहाड़ी मजदूरों और अन्य श्रमिकों को पूरी सैलरी देने के सरकार के आदेश को खत्म करने की मांग की है। फर्म ने अपनी याचिका में कहा है कि लॉकडाउन की वजह से कारखानों में काम बंद हैं, जिससे अब तक करीब डेढ़ करोड़ रुपए का नुकसान हो चुका है। जबकि, सरकार ने 29 और 31 मार्च के आदेशों में सभी कर्मचारियों को पूरा वेतन देने का आदेश दिया है, जो करीब पौने दो करोड़ रुपए है।


याचिका में कर्मचारियों को पूरा वेतन देने के केन्द्र और महाराष्ट्र सरकार के आदेशों को खत्म करने की मांग की है। इसके अलावा, मामले का निबटारा होने तक कामगारों को 50 फीसदी वेतन का भुगतान करने की अनुमति मांगी है।

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