Karnataka: सीएम सिद्धारमैया को जेल में डालना चाहता है केंद्र, स्वास्थ्य मंत्री बोले- यह सरकार गिराने की साजिश
कर्नाटक में मुदा जमीन आवंटन घोटाले में सीएम सिद्धारमैया को राज्यपाल थावरचंद गहलोत ने कारण बताओ नोटिस जारी किया है। इसे लेकर कर्नाटक के स्वास्थ्य मंत्री दिनेश गुंडू राव ने कहा कि राज्यपाल को नोटिस जारी करने से पहले यह सत्यापन करना चाहिए था कि मुख्यमंत्री मुदा आवंटन में शामिल हैं या नहीं।
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कर्नाटक के स्वास्थ्य मंत्री दिनेश गुंडू राव ने आरोप लगाया है कि केंद्र सरकार कर्नाटक के मुख्यमंत्री सिद्धारमैया को जेल में डालना चाहती है। यह सब सरकार को गिराने की साजिश है। इसलिए हमारे खिलाफ छोटी-छोटी बातें निकाली जा रही हैं। जबकि अपराध में शामिल बड़े और अपने लोगों को संरक्षण दिया जा रहा है। स्वास्थ्य मंत्री ने कहा कि भाजपा सरकार को गिराने के लिए राज्यपाल, आयकर (विभाग), प्रवर्तन निदेशालय का दुरुपयोग कर रही है। उन्होंने तमिलनाडु, महाराष्ट्र, झारखंड, दिल्ली, पश्चिम बंगाल और केरल में भी यही किया।
दरअसल, कर्नाटक में मुदा जमीन आवंटन घोटाले में सीएम सिद्धारमैया को राज्यपाल थावरचंद गहलोत ने कारण बताओ नोटिस जारी किया है। इसे लेकर कर्नाटक के स्वास्थ्य मंत्री दिनेश गुंडू राव ने कहा कि राज्यपाल को नोटिस जारी करने से पहले यह सत्यापन करना चाहिए था कि मुख्यमंत्री मुदा आवंटन में शामिल हैं या नहीं। उन्होंने कहा कि केंद्र गैर भाजपा शासित राज्यों में सरकार गिराने के लिए सरकारी तंत्र का दुरुपयोग करता है। झूठे आरोप लगाकर और दबाव डालकर सरकार के भीतर भ्रम पैदा करता है।
राव ने यह भी कहा कि देश में अघोषित आपातकाल चल रहा है। भाजपा नेतृत्व वाली केंद्र सरकार ने झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन, कर्नाटक के उप मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार और पूर्व केंद्रीय मंत्री पी चिदंबरम को जेल में डाल दिया। ये केंद्रीय एजेंसियां कभी भाजपा नेताओं को नहीं छूतीं, बल्कि उन्हें संरक्षण दिया जाता है। अगर दूसरे लोग छोटी सी भी गलती करते हैं तो बीजेपी उनके पीछे पड़ जाती है। सिद्धारमैया के मामले में भी भाजपा चाहती है कि उन्हें जेल हो।
क्या है मामला
सीएम सिद्धारमैया की पत्नी को मैसूर के एक महंगे इलाके में मुआवजा देने के लिए जगह आवंटित की गई थी, जिसकी संपत्ति का मूल्य उनकी उस जमीन की तुलना में अधिक था जिसे मुदा ने अधिग्रहित किया था। बता दें कि मुदा ने सीएम सिद्धारमैया की पत्नी पार्वती को उनकी 3.16 एकड़ जमीन के बदले 50:50 अनुपात योजना के तहत प्लॉट आवंटित किए थे, जहां मुदा ने आवासीय खाका बनाया था। विवादास्पद योजना में खाका बनाने के लिए अधिग्रहित अविकसित भूमि के बदले में भूमि खोने वाले को 50 प्रतिशत विकसित भूमि आवंटित करने की परिकल्पना की गई है।