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गांवों में मंडराया डिफ्थीरिया का खतरा, दो बच्चों की मौत- 11 में लक्षण
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मुरादाबाद
Updated Sat, 06 Oct 2018 02:16 AM IST
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मुरादाबाद के बाद अब कुंदरकी ब्लाक के गांवों में डिफ्थीरिया का खतरा मंडरा गया है। गले के संक्रमण से दो बच्चों की मौत और 11 बच्चों में डिफ्थीरिया जैसे के लक्षण मिले हैं। संक्रमण से मरने वाले एक बच्चे की मौत डिफ्थीरिया से हुई, विश्व स्वास्थ्य संगठन ने पुष्टि भी कर दी है। इससे स्वास्थ्य विभाग में खलबली है। स्वास्थ्य विभाग ने चिह्नित बच्चों के लार के सैंपल जांच के लिए भेजने के साथ गांवों में टीकाकरण शुरू करवा दिया है। ब्लाक के कई गांवों में बच्चे गले के संक्रमण से पीड़ित हैं।
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डिफ्थीरिया संक्रामक बैक्टीरिया है। इससे गले में झिल्ली बन जाती है। श्वास नली में सूजन आने से इलाज नहीं मिलने पर बच्चों की मौत हो जाती है। मुरादाबाद के एकता कालोनी में डिफ्थीरिया से एक बच्चे की मौत हो चुकी है। कुंदरकी ब्लाक के असदपुर और कूरी गांव में भी दर्जनों बच्चे गले के संक्रमण से पीड़ित हैं। लगभग 15 दिन पूर्व संक्रमण से दो बच्चों की मौत होने के बाद स्वास्थ्य विभाग ने गांवों का सर्वे कराकर 11 अन्य पीड़ित बच्चों को चिह्नित किया है। पीड़ित बच्चों ने डीपीटी के टीके नहीं लगाए हैं।
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असदपुर गांव के बच्चे की दिल्ली स्थित महर्षि वाल्मीकि अस्पताल में इलाज के दौरान मौत हुई है। बच्चे की उम्र तीन साल थी। स्वास्थ्य शिक्षा अधिकारी अनिल पाल के मुताबिक असदपुर के बच्चे की मौत डिफ्थीरिया से हुई है। विश्व स्वास्थ्य संगठन ने इसकी पुष्टि करते हुए सीएमओ को रिपोर्ट भेज दी है।
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प्रभारी चिकित्साधिकारी डा. राजपाल के मुताबिक चिह्नित बच्चों में भी डिफ्थीरिया जैसे लक्षण मिले हैं। एएनएम और आशा कार्यकत्रियों की मदद से सब्जीपुर, असदपुर, हुसैनपुर हमीर, पीतपुर, रसूलपुर हमीर, कूरी, बरैंठा, ललवारा, यूसुफपुर नगलिया समेत कई गांवों का सर्वे कराया गया है।
इन्हीं गांवों में गले के संक्रमण से सबसे अधिक बच्चे पीड़ित हैं। बच्चों के गले में सूजन है। सांस लेना तो दूर खानपान में दिक्कत हो रही है। चिकित्साधिकारी ने बताया जिन दो बच्चों की मौत हुई है उनमें भी डिफ्थीरिया जैसे लक्षण थे। चिकित्साधिकारी ने बताया कि एहतियातन गांवों में टीकाकरण अभियान शुरू करवा दिया है। मुरादाबाद स्वास्थ्य विभाग ने जिले भर में कई ब्लाकों से गले के संक्रमण से पीड़ित बच्चों के डिफ्थीरिया की आशंका को देखते हुए सैंपल जांच के लिए भेजे हैं। अभी तक इनकी रिपोर्ट नहीं आई है। जबकि सितंबर से पूर्व में भेजे सैंपलों में दो केस डिफ्थीरिया पाजिटिव आए थे।
- स्वास्थ्य विभाग बच्चों को सात जानलेवा बीमारियों से बचाव के लिए टीके लगाती है। इनमें डिफ्थीरिया, खसरा, टीबी, पोलियो, काली खांसी, हेपेटाइटिस बी, टिटनेस शामिल हैं। अभिभावकों की जागरूकता से ही बच्चों को टीके लगवाकर बच्चों को बचाया जा सकता है। - राजपाल, प्रभारी चिकित्साधिकारी कुंदरकी