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Bombay High Court: सरकारी संपत्ति के बड़े पैमाने पर नुकसान का जिम्मेदार कौन? अदालत ने जरांगे से मांगा हलफनामा

Wed, 03 Sep 2025 03:11 PM IST
निर्मल कांत न्यूज डेस्क, अमर उजाला, छत्रपति संभाजीनगर।
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, छत्रपति संभाजीनगर। Published by: निर्मल कांत Updated Wed, 03 Sep 2025 03:11 PM IST
सार

Bombay High Court: मराठा आरक्षण आंदोलन का नेतृत्व करने वाले मनोज जरांगे ने बॉम्बे हाईकोर्ट को बताया कि आंदोलन खत्म हो चुका है क्योंकि सरकार से बात बन गई है। कोर्ट ने जरांगे से हलफनामा मांगा है कि वे किसी हिंसा या तोड़फोड़ के लिए जिम्मेदार नहीं हैं।  

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Have faith, our people in Marathwada and western Maharashtra will get reservation: Jarange
मनोज जरांगे - फोटो : पीटीआई (फाइल)

विस्तार

मराठा आरक्षण कार्यकर्ता मनोज जरांगे ने बुधवार को बॉम्बे हाईकोर्ट में बताया कि मराठा आरक्षण को लेकर उनका आंदोलन अब खत्म हो चुका है, क्योंकि मामला सरकार के साथ सुलझ गया है। कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश चंद्रशेखर और न्यायमूर्ति आरती साठे की खंडपीठ ने उनकी बात को स्वीकार किया, लेकिन यह भी कहा कि आंदोलन के दौरान हुई अन्य घटनाओं और शिकायतों पर जवाब देना जरूरी है।
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कोर्ट ने पूछा, सरकारी संपत्ति को बड़े पैमाने पर नुकसान पहुंचा है, उसका जिम्मेदार कौन है? जरांगे की ओर से पेश हुए वकील सतीश मानशिंदे और वी. एम. थोराट ने कोर्ट में दलील दी कि आंदोलन शांतिपूर्ण था और सिर्फ आम जनता को असुविधा हुई, संपत्ति को कोई नुकसान नहीं पहुंचाया गया। इस पर कोर्ट ने कहा कि जरांगे और आंदोलन से जुड़ी संस्थाओं को हलफनामा दाखिल करना होगा, जिसमें यह साफ लिखा हो कि वे किसी भी तरह की हिंसा या तोड़फोड़ के लिए जिम्मेदार नहीं हैं।
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पीठ ने कहा, अगर हलफनामे में इनकार नहीं किया गया, तो जरांगे और उनकी टीम को उपद्रव का भड़काने वाला माना जाएगा। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि अगर सही तरीके से हलफनामा दाखिल हो जाता है, तो कोई सख्त आदेश नहीं दिया जाएगा, बल्कि याचिकाएं निपटा दी जाएंगी। कोर्ट ने जरांगे और उनकी टीम को चार सप्ताह का समय दिया है ताकि वे हलफनामा दाखिल कर सकें।

'भरोसा रखें, मराठवाड़ा और पश्चिम महाराष्ट्र के मराठाओं को मिलेगा आरक्षण'
जरांगे ने कहा कि मराठवाड़ा और पश्चिम महाराष्ट्र के मराठा समाज को अब आरक्षण मिलेगा। उन्होंने अपने समर्थकों से शांति बनाए रखने और उनके फैसले पर भरोसा रखने की अपील की। मुंबई में पांच दिन की भूख हड़ताल खत्म करने के बाद छत्रपति संभाजीनगर लौटे जरांगे अब एक निजी अस्पताल में भर्ती हैं, जहां उन्हें डिहाइड्रेशन और कम ब्लड शुगर की वजह से उपचार मिल रहा है। उन्होंने कहा, यह हमारी जीत है और इसका पूरा श्रेय मराठा समाज को जाता है। मराठवाड़ा और पश्चिम महाराष्ट्र के मराठाओं को अब आरक्षण मिलेगा। मंगलवार को सराकर ने जरांगे की अधिकतर मांगे मान लीं, जिनमें मराठाओं को कुनबी जाति प्रमाण पत्र देने की बात भी शामिल है। इससे उन्हें ओबीसी आरक्षण के तहत शिक्षा और नौकरियों में लाभ मिलेगा। 


आजाद मैदान में भाजपा के वरिष्ठ मंत्री राधाकृष्ण विखे पाटिल और समिति के अन्य सदस्यों की मौजूदगी में जरांगे को जूस पिलाकर भूख हड़ताल खत्म की गई। जरांगे ने कहा, अब तक सरकार ने मराठाओं के पक्ष में एक लाइन भी नहीं लिखा था। जो लोग मेरे फैसले की आलोचना कर रहे हैं, उन्होंने मराठा समुदाय के लिए कुछ नहीं किया है। उन्होंने भरोसा जताया कि लोग उनके फैसले को समझेंगे। उन्होंने कहा, मराठवाड़ा का कोई भी मराठा आरक्षण से वंचित नहीं रहेगा। गांव-गांव समितियां बनाई जाएंगी जो मराठाओं की कुनबी वंशावली की पुष्टि करने में मदद करेंगी। 



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जरांगे ने कहा, मराठा समाज खुश है, मैं भी खुश हूं। उन्होंने लोगों से अपील की कि वे शांति बनाए रखें और उन्हें मिले आश्वासन पर भरोसा रखें। मंगलवार को सरकार ने हैदराबाद गजट पर आधारित एक सरकारी आदेश जारी किया और उन मराठाओं को कुनबी प्रमाणपत्र देने के लिए एक समिति गठित करने की घोषणा की, जो दस्तावेजों से अपने कुनबी होने का प्रमाण दे सकें। उन्होंने राज्य मंत्री छगन भुजबल के कैबिनेट बैठक में शामिल होने पर भी तंज कसा और कहा कि इसका मतलब है कि वह समझदार नेता हैं। इसका मतलब यह भी है कि मराठा समाज को आरक्षण मिलने में कामयाबी मिली है। जरांगे ने यह भी दावा किया कि सरकारी आदेशको कोर्ट में चुनौती नहीं दी जा सकती। जो याचिकाएं दाखिल की जाएंगी, वे खारिज हो जाएंगी, क्योंकि सरकारी आदेश सरकार के गजट पर आधारित है। 




 
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