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Maratha Protest: भूख हड़ताल से कोर्ट के आदेश तक, पुलिस के संयम से बेकाबू नहीं हुई भीड़; आखिर खत्म हुआ आंदोलन
Wed, 03 Sep 2025 09:59 AM IST
निर्मल कांत
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मुंबई।
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मुंबई।
Published by: निर्मल कांत
Updated Wed, 03 Sep 2025 09:59 AM IST
सार
मराठा आरक्षण की मांग को लेकर कार्यकर्ता मनोज जरांगे समर्थकों के साथ पांच दिनों तक मुंबई के आजाद मैदान में डटे रहे। इस दौरान राज्यभर से हजारों लोग समर्थन में पहुंचे और कई जगहों पर भीड़ के कारण जाम लगा। हाईकोर्ट के आदेश और मुंबई पुलिस की सूझबूझ से आंदोलन बेकाबू नहीं हो पाया। आखिरकार सरकार ने आठ में से छह मांगें मान लीं और जरांगे ने अपना अनशन समाप्त किया। पांच दिन कैसा चला मराठा आंदोलन, विस्तार से पढ़ें-
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मराठा आरक्षण आंदोलन
- फोटो : अमर उजाला ग्राफिक/पीटीआई
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विस्तार
मराठा आरक्षण की मांग को लेकर कार्यकर्ता मनोज जरांगे हजारों समर्थकों के साथ मुंबई पहुंचे थे, लेकिन मुंबई पुलिस के कौशल और समझदारी भरी तैयारी से यह पांच दिन लंबा आंदोलन शांतिपूर्ण तरीके से निपट गया। यह आंदोलन मुंबई के आजाद मैदान में हुआ, जो छ्त्रपति शिवाजी महाराज टर्मिनस (सीएसएमटी) और बीएमसी भवन के पास है। विरोध प्रदर्शन के दौरान कभी भी हालात पूरी तरह बेकाबू नहीं हुए।
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मराठा आरक्षण आंदोलन
- फोटो : पीटीआई (फाइल)
समर्थन के लिए राज्यभर से मुंबई पहुंचे लोग
जरांगे ने 29 अगस्त को भूख हड़ताल शुरू की थी, जिसमें मंगलवार को दोपहर उन्होंने खत्म कर दिया, जब राज्य सरकार ने अधिकांश मांगें मान लीं। जरांगे के अनशन के साथ ही राज्यभर से लोग समर्थन करने मुंबई पहुंचे। आंदोलनकारियों की भीड़ दक्षिण मुंबई के मु्ख्य चौराहों पर दिखी, जिससे सुबह के समय ट्रैफिक जाम हुआ। कुछ लोग सीएसएमटी परिसर में ही प्लेटफॉर्म पर चटाई बिछाककर सोते नजर आए। आंदोलन से पहले मुंबई पुलिस ने जरांगे की टीम के साथ बैठकें कीं और रणनीति बनाई। पुलिस ने आजाद मैदान पर 1,500 से ज्यादा जवान तैनात किए। साथ ही सीआरपीएफ, सीआईएसएफ, आरएएफ, एसआरपीएफ, दंगा नियंत्रण पुलिस और महाराष्ट्र सुरक्षा बल की एक-एक इकाई भी तैनात की गई।
ये भी पढ़ें: दिल्ली पहुंचे जर्मन विदेश मंत्री वेडफुल, आज एस जयशंकर और पीयूष गोयल से करेंगे मुलाकात
जरांगे ने 29 अगस्त को भूख हड़ताल शुरू की थी, जिसमें मंगलवार को दोपहर उन्होंने खत्म कर दिया, जब राज्य सरकार ने अधिकांश मांगें मान लीं। जरांगे के अनशन के साथ ही राज्यभर से लोग समर्थन करने मुंबई पहुंचे। आंदोलनकारियों की भीड़ दक्षिण मुंबई के मु्ख्य चौराहों पर दिखी, जिससे सुबह के समय ट्रैफिक जाम हुआ। कुछ लोग सीएसएमटी परिसर में ही प्लेटफॉर्म पर चटाई बिछाककर सोते नजर आए। आंदोलन से पहले मुंबई पुलिस ने जरांगे की टीम के साथ बैठकें कीं और रणनीति बनाई। पुलिस ने आजाद मैदान पर 1,500 से ज्यादा जवान तैनात किए। साथ ही सीआरपीएफ, सीआईएसएफ, आरएएफ, एसआरपीएफ, दंगा नियंत्रण पुलिस और महाराष्ट्र सुरक्षा बल की एक-एक इकाई भी तैनात की गई।
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मराठा आरक्षण आंदोलन
- फोटो : पीटीआई
आजाद मैदान से हटने को तैयार नहीं थे आंदोलनकारी
पुलिस ने 29 अगस्तो को एक दिन के प्रदर्शन की अनुमति दी थी और केवल पांच हजार लोगों के ही एकत्र होने की मंजूरी दी थी। लेकिन आंदोलन शुरू होते ही 8,000 वाहनों में सवार 60 हजार से ज्यादा लोग मुंबई पहुंच गए, जिससे आजाद मैदान तक जाने वाले सारे रास्ते जाम हो गए। भीड़ की निगरानी के लिए पुलिस ने सीसीटीवी और ड्रोन का इस्तेमाल किया। प्रदर्शनकारी तब तक आजाद मैदान से हटने को तैयार नहीं थे, जब तक उनकी मांगें पूरी न हो जाएं। कुछ लोग सड़कों पर खाना बनाते, खेलते और नाचते नजर आए।
पुलिस ने 29 अगस्तो को एक दिन के प्रदर्शन की अनुमति दी थी और केवल पांच हजार लोगों के ही एकत्र होने की मंजूरी दी थी। लेकिन आंदोलन शुरू होते ही 8,000 वाहनों में सवार 60 हजार से ज्यादा लोग मुंबई पहुंच गए, जिससे आजाद मैदान तक जाने वाले सारे रास्ते जाम हो गए। भीड़ की निगरानी के लिए पुलिस ने सीसीटीवी और ड्रोन का इस्तेमाल किया। प्रदर्शनकारी तब तक आजाद मैदान से हटने को तैयार नहीं थे, जब तक उनकी मांगें पूरी न हो जाएं। कुछ लोग सड़कों पर खाना बनाते, खेलते और नाचते नजर आए।
मनोज जरांगे
- फोटो : पीटीआई
जरांगे को वीडियो कॉल के बाद ही हटा रास्ते से जाम
कई बार ऐसा हुआ कि प्रदर्शनकारियों ने रास्ता जाम किया और पुलिस अधिकारियों के कहने के बाद भी नहीं हटे। लेकिन जब पुलिस उपायुक्त प्रवीण मुंडे ने जरांगे को वीडियो कॉल किया और उन्होंने खुद समर्थकों से सहयोग करने को कहा, तब प्रदर्शनकारी हट गए। पांच दिनों में कई प्रदर्शनकारी समूह मंत्रालय, बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (बीएसई), मरीन ड्राइव, जहांगीर आर्ट गैलरी, गिरगांव चौपाटी और गेटवे ऑफ इंडिया तक पहुंच गए। हालांकि, पुलिस ने संयम के साथ सभी को नियंत्रण में रखा। सीएसएमटी स्टेशन भी एक अस्थायी शिविर जैसा बन गया था, जहां सैकड़ों आंदोलनकारी ठहरे हुए थे। इस पर रेलवे पुलिस ने भी सुरक्षा व्यवस्था कड़ी की।
ये भी पढ़ें: मराठा आरक्षण आंदोलन खत्म; फूट-फूट कर रोए मनोज जरांगे, बोले- आज हमारे लिए दिवाली
कई बार ऐसा हुआ कि प्रदर्शनकारियों ने रास्ता जाम किया और पुलिस अधिकारियों के कहने के बाद भी नहीं हटे। लेकिन जब पुलिस उपायुक्त प्रवीण मुंडे ने जरांगे को वीडियो कॉल किया और उन्होंने खुद समर्थकों से सहयोग करने को कहा, तब प्रदर्शनकारी हट गए। पांच दिनों में कई प्रदर्शनकारी समूह मंत्रालय, बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (बीएसई), मरीन ड्राइव, जहांगीर आर्ट गैलरी, गिरगांव चौपाटी और गेटवे ऑफ इंडिया तक पहुंच गए। हालांकि, पुलिस ने संयम के साथ सभी को नियंत्रण में रखा। सीएसएमटी स्टेशन भी एक अस्थायी शिविर जैसा बन गया था, जहां सैकड़ों आंदोलनकारी ठहरे हुए थे। इस पर रेलवे पुलिस ने भी सुरक्षा व्यवस्था कड़ी की।
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बंबई उच्च न्यायालय
- फोटो : एएनआई (फाइल)
हाईकोर्ट ने सभी सड़कों को खाली करने का दिया आदेश
सोमवार को बॉम्बे हाईकोर्ट ने टिप्पणी की कि मराठा आंदोलन की वजह से मुंबई ठप हो गई है और आंदोलनकारियों ने तय शर्तों का उल्लंघन किया है। हाईकोर्ट ने जरांगे और प्रदर्शनकारियों को मंगलवार दोपहर तीन बजे तक सभी सड़कों को खाली करने का आदेश दिया। हाईकोर्ट ने चेतावनी दी थी कि अगर प्रदर्शन स्थल को दोपहर तीन बजे तक खाली नहीं किया गया, तो कार्रवाई की जाएगी। साथ ही सरकार और पुलिस को भी आंदोलन की शर्तों के उल्लंघन के लिए जरांगे और उनके समर्थकों पर कार्रवाई करने के निर्देश भी दिए।
सोमवार को बॉम्बे हाईकोर्ट ने टिप्पणी की कि मराठा आंदोलन की वजह से मुंबई ठप हो गई है और आंदोलनकारियों ने तय शर्तों का उल्लंघन किया है। हाईकोर्ट ने जरांगे और प्रदर्शनकारियों को मंगलवार दोपहर तीन बजे तक सभी सड़कों को खाली करने का आदेश दिया। हाईकोर्ट ने चेतावनी दी थी कि अगर प्रदर्शन स्थल को दोपहर तीन बजे तक खाली नहीं किया गया, तो कार्रवाई की जाएगी। साथ ही सरकार और पुलिस को भी आंदोलन की शर्तों के उल्लंघन के लिए जरांगे और उनके समर्थकों पर कार्रवाई करने के निर्देश भी दिए।
मराठा आरक्षण आंदोलन
- फोटो : पीटीआई
संयुक्त पुलिस आयुक्त ने की पुलिसकर्मियों की सराहना
इसके बाद मुंबई पुलिस ने आंदोलन की अवधि बढ़ाने की इजाजत देने से इनकार कर दिया और आंदोलनकारियों से जल्द आजाद मैदान खाली करने को कहा। जैसे-जैसे मंगलवार को समय नजदीक आया, वरिष्ठ अधिकारी प्रदर्शनकारियों से अपने वाहन हटाने की अपील करने नजर आए।आखिरकार जब भीड़ छंटी और पूरा आजाद मैदान खाली हो गया, तब संयुक्त पुलिस आयुक्त सत्य नारायण चौधरी मौके पर पहुंचे और उन्होंने पुलिसकर्मियों की सराहना की। उन्होंने कहा, आप सभी ने बेहतरीन काम किया, स्थिति को बहुत अच्छे से संभाला। मुझे आप सभी पर गर्व है। एक अन्य वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने पीटीआई से कहा, इतनी बड़ी संख्या में प्रदर्शनकारियों के एक साथ जमा होने के बावजूद हालात कभी बेकाबू नहीं हुए। पुलिस ने बहुत ही सधे हुए तरीके से हालात संभाले, जिससे कोई टकराव नहीं हुआ। सरकार ने जरांगे की आठ में छह मांगों को स्वीकार किया है जबकि दो मांगें अधूरी हैं।
इसके बाद मुंबई पुलिस ने आंदोलन की अवधि बढ़ाने की इजाजत देने से इनकार कर दिया और आंदोलनकारियों से जल्द आजाद मैदान खाली करने को कहा। जैसे-जैसे मंगलवार को समय नजदीक आया, वरिष्ठ अधिकारी प्रदर्शनकारियों से अपने वाहन हटाने की अपील करने नजर आए।आखिरकार जब भीड़ छंटी और पूरा आजाद मैदान खाली हो गया, तब संयुक्त पुलिस आयुक्त सत्य नारायण चौधरी मौके पर पहुंचे और उन्होंने पुलिसकर्मियों की सराहना की। उन्होंने कहा, आप सभी ने बेहतरीन काम किया, स्थिति को बहुत अच्छे से संभाला। मुझे आप सभी पर गर्व है। एक अन्य वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने पीटीआई से कहा, इतनी बड़ी संख्या में प्रदर्शनकारियों के एक साथ जमा होने के बावजूद हालात कभी बेकाबू नहीं हुए। पुलिस ने बहुत ही सधे हुए तरीके से हालात संभाले, जिससे कोई टकराव नहीं हुआ। सरकार ने जरांगे की आठ में छह मांगों को स्वीकार किया है जबकि दो मांगें अधूरी हैं।
मराठा आरक्षण आंदोलनकारी
- फोटो : पीटीआई
मनोज जरांगे की आठ प्रमुख मांगें
- सभी मराठा समाज के लोगों को सरलता से कुनबी प्रमाणपत्र (सगे-सोयरे कुनबी प्रमाणपत्र) उपलब्ध कराया जाए।
- हैदराबाद, सतारा और औंध गजट को तुरंत लागू किया जाए।
- मराठा आंदोलन से जुड़े कार्यकर्ताओं पर दर्ज सभी आपराधिक मामले वापस लिए जाएं।
- आंदोलन में जान गंवाने वालों के परिजनों को तत्काल आर्थिक मदद और सरकारी नौकरी दी जाए।
- 58 लाख से अधिक कुनबी नोंदी ग्राम पंचायत स्तर पर सार्वजनिक की जाएं, ताकि मराठा समाज की पहचान स्पष्ट हो।
- वंशवली (शिंदे) समिति को स्वतंत्र कार्यालय और अतिरिक्त समय दिया जाए।
- सरकार मराठा-कुनबी एक का आधिकारिक आदेश (जीआर) जारी करे।
- सगे-सोयरे प्रमाणपत्र की सत्यापन और मान्यता प्रक्रिया तत्काल शुरू की जाए।
- सभी मराठा समाज के लोगों को सरलता से कुनबी प्रमाणपत्र (सगे-सोयरे कुनबी प्रमाणपत्र) उपलब्ध कराया जाए।
- हैदराबाद, सतारा और औंध गजट को तुरंत लागू किया जाए।
- मराठा आंदोलन से जुड़े कार्यकर्ताओं पर दर्ज सभी आपराधिक मामले वापस लिए जाएं।
- आंदोलन में जान गंवाने वालों के परिजनों को तत्काल आर्थिक मदद और सरकारी नौकरी दी जाए।
- 58 लाख से अधिक कुनबी नोंदी ग्राम पंचायत स्तर पर सार्वजनिक की जाएं, ताकि मराठा समाज की पहचान स्पष्ट हो।
- वंशवली (शिंदे) समिति को स्वतंत्र कार्यालय और अतिरिक्त समय दिया जाए।
- सरकार मराठा-कुनबी एक का आधिकारिक आदेश (जीआर) जारी करे।
- सगे-सोयरे प्रमाणपत्र की सत्यापन और मान्यता प्रक्रिया तत्काल शुरू की जाए।
मनोज जरांगे
- फोटो : पीटीआई
सरकार ने जो छह मांगें स्वीकार की
- मराठा-कुनबी एक का जीआर अभी प्रक्रिया में है, लेकिन लागू नहीं हुआ।
- सगे-सोयरे प्रमाणपत्र की जांच की प्रक्रिया शुरू है, पर अंतिम फैसला लंबित है।
- हैदराबाद गजट लागू करने का निर्णय लिया गया।
- सातारा और औंध गजट को लागू करने की प्रक्रिया शुरू, 15 दिनों में कानूनी दिक्कतें दूर होंगी।
- आंदोलनकारियों पर दर्ज सभी मुकदमे वापस लेने का आश्वासन।
- आंदोलन के दौरान मारे गए लोगों के परिजनों को 15 करोड़ रुपये की आर्थिक मदद और योग्यता अनुसार नौकरी।
- 58 लाख कुनबी नोंदी पंचायत स्तर पर सार्वजनिक की जाएगी।
- वंशवली (शिंदे) समिति को कार्यालय और कार्यकाल विस्तार मिलेगा।
- मराठा-कुनबी एक का जीआर अभी प्रक्रिया में है, लेकिन लागू नहीं हुआ।
- सगे-सोयरे प्रमाणपत्र की जांच की प्रक्रिया शुरू है, पर अंतिम फैसला लंबित है।