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Dharam Sansad: सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली और उत्तराखंड सरकार से मांगा जवाब, हेट स्पीच पर क्या कार्रवाई की?

Mon, 10 Oct 2022 10:40 PM IST
Amit Mandal न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Amit Mandal Updated Mon, 10 Oct 2022 10:40 PM IST
सार

पीठ ने कहा कि इस स्तर पर वह अवमानना याचिका पर नोटिस जारी नहीं कर रही है, बल्कि केवल उत्तराखंड और दिल्ली से जवाब मांग रही है कि धर्म संसद में दिए गए अभद्र भाषा के संबंध में क्या कार्रवाई की गई है।

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Hate speeches at Dharam Sansads: SC seeks responses from U'khand, Delhi on action taken
सुप्रीम कोर्ट - फोटो : Social media

विस्तार

सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को उत्तराखंड और दिल्ली सरकारों से जवाब मांगा कि पिछले साल राज्य और राष्ट्रीय राजधानी में आयोजित धर्म संसद में नफरत भरा भाषण देने वालों के खिलाफ पुलिस ने क्या कार्रवाई की है। न्यायमूर्ति डी वाई चंद्रचूड़ और न्यायमूर्ति हिमा कोहली की पीठ ने कार्यकर्ता तुषार गांधी की याचिका पर सुनवाई करते हुए यह आदेश पारित किया। अपनी याचिका में कार्यकर्ता गांधी ने नफरत फैलाने वाले भाषणों और लिंचिंग को रोकने के लिए निर्धारित दिशा-निर्देशों के अनुसार इस मुद्दे पर कोई कदम नहीं उठाने के लिए वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों के खिलाफ अवमानना कार्रवाई की मांग की है।

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पीठ ने कहा कि इस स्तर पर वह अवमानना याचिका पर नोटिस जारी नहीं कर रही है, बल्कि केवल उत्तराखंड और दिल्ली से जवाब मांग रही है कि धर्म संसद में दिए गए अभद्र भाषा के संबंध में क्या कार्रवाई की गई है। इसमें कहा गया है कि उत्तराखंड और दिल्ली दोनों हलफनामे दाखिल करेंगे और तथ्यात्मक स्थिति और की गई कार्रवाई के बारे में बताएंगे। पीठ ने यह भी कहा कि नव नियुक्त अटॉर्नी जनरल आर वेंकटरमणि ने हाल ही में कार्यभार संभाला है और इस मुद्दे पर विचार करने के लिए कुछ समय लग सकता है। 
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गांधी की ओर से पेश अधिवक्ता शादान फरसात ने कहा कि वह अवमानना याचिका की प्रति उत्तराखंड और दिल्ली के स्थायी वकीलों को देंगे। उन्होंने कहा कि गांधी तहसीन एस पूनावाला बनाम भारत संघ (2018 के फैसले) में याचिकाकर्ताओं में से एक थे, जिसमें नफरत भरे भाषणों और लिंचिंग को रोकने के लिए दिशानिर्देश निर्धारित किए गए थे। फरसात ने कहा किया कि तुषार गांधी ने उत्तराखंड और राष्ट्रीय राजधानी में 'धर्म संसद' में अभद्र भाषा की घटनाओं के बाद कोई कार्रवाई नहीं करने के लिए पुलिस अधिकारियों के खिलाफ अवमानना कार्रवाई की मांग की है।
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उन्होंने कहा कि याचिका दायर करने के बाद अभद्र भाषा देने वाले दो लोगों को गिरफ्तार किया गया था लेकिन सात अन्य को पुलिस ने छुआ तक नहीं था। पीठ ने उत्तराखंड और दिल्ली से चार सप्ताह में जवाब मांगा। याचिका में कहा गया है कि घटनाओं के तुरंत बाद भाषण उपलब्ध कराए गए और सार्वजनिक डोमेन में थे लेकिन फिर भी उत्तराखंड पुलिस और दिल्ली पुलिस ने अपराधियों के खिलाफ कार्रवाई नहीं की। याचिका में आरोप लगाया गया है कि उत्तराखंड के हरिद्वार में पिछले साल 17 से 19 दिसंबर तक और दिल्ली में पिछले साल 19 दिसंबर को आयोजित धर्म संसद में भड़काऊ भाषण दिए गए थे।

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