फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   India News ›   Hate speech increased by 500 percent in the country after 2014 only 20 percent cases reached the end Latest News Update

Hate Speech:2014 के बाद देश में 500 फीसदी बढ़े नफरत देने वाले बयान, अंजाम तक पहुंचे महज 20 प्रतिशत मामले

Thu, 07 Jul 2022 05:06 PM IST
Rahul Sampal राहुल संपाल
Updated Thu, 07 Jul 2022 05:06 PM IST
सार

भारतीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो के आंकड़ों के मुताबिक, भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) की धारा 153-ए (धर्म, जाति, जन्म स्थान, निवास स्थान, भाषा के आधार पर दो अलग समूहों के बीच शत्रुता को बढ़ावा देना) के अंतर्गत दर्ज होने वाले मामलों की संख्या साल 2014 से 2020 के बीच छह गुना हो गई है।

विज्ञापन
Hate speech increased by 500 percent in the country after 2014 only 20 percent cases reached the end Latest News Update
नुपुर शर्मा-महुआ मोइत्रा अपने-अपने बयानों के बाद विवादों में हैं। - फोटो : Amar Ujala

विस्तार

देश में इन दिनों भड़काऊ बयानबाजी को लेकर फिर सियासत शुरू हो गई है। भाजपा से निलंबित नेता नुपुर शर्मा के कथित बयान पर काफी हंगामा हुआ है। इसे लेकर देश के कई हिस्सों में हिंसा भी हुई थी। इतना ही नहीं कतर और ईरान जैसे मुस्लिम देशों ने भी भारत को निशाने पर ले लिया है। हाल ही में टीमएसी की लोकसभा सांसद महुआ मोइत्रा को लेकर भी बवाल मच गया है। कई राज्यों में उनके खिलाफ एफआईआर भी दर्ज हुई है। देश में 2014 से लेकर 2020 के बीच नफरत देने वालों बयानों की संख्या छह गुना बढ़ गई है। यानी इसमें 500 फीसदी बढ़ोतरी हुई है।

विज्ञापन


भारतीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो के आंकड़ों के मुताबिक, भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) की धारा 153-ए (धर्म, जाति, जन्म स्थान, निवास स्थान, भाषा के आधार पर दो अलग समूहों के बीच शत्रुता को बढ़ावा देना) के अंतर्गत दर्ज होने वाले मामलों की संख्या साल 2014 से 2020 के बीच छह गुना हो गई है। पिछले सात साल में इस तरह के सबसे कम मामले 2014 में आए थे, जब केवल 323 मामले दर्ज हुए। 2020 में ऐसे सबसे अधिक 1,804 मामले दर्ज किए गए। उस साल इस धारा के तहत सबसे अधिक 303 मामले तमिलनाडु में दर्ज किए गए। इसके बाद उत्तर प्रदेश में 243, तेलंगाना में 151, असम में 147 और आंध्र प्रदेश में 142 मामले दर्ज हुए। इसी तरह धारा 153 बी (देश की अखंडता को नुकसान पहुंचाने वाले अभियोग, बयान) के अंतर्गत मामलों की संख्या भी 2014 से 2020 के बीच छह गुना हो गई। 2014 में ऐसे 13 मामले दर्ज हुए थे और 2020 में 82 मामले आए।
विज्ञापन


नफरत फैलाने वाले बयानों की परिभाषा किसी भी भारतीय कानून में नहीं दी गई है। यह मामला देश भर में बहस का मुद्दा बना हुआ है। भारतीय विधि आयोग ने भी मार्च 2017 की अपनी रिपोर्ट में लिखा था कि नफरत फैलाने वाले बयान रोकने के लिए आईपीसी में नए प्रावधान शामिल करने की जरूरत है। नफरती बयानों को रोकने के प्रावधान बेशक नहीं हों मगर आईपीसी में ऐसी कुछ धाराएं हैं, जिनमें अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के अधिकार की रक्षा करते हुए कुछ खास तरीके के बयानों पर रोक लगाई जाती है। बहरहाल 2016 से 2020 के बीच आईपीसी की धारा 153 के तहत केवल 20 फीसदी मामलों में सजा दी गई। 2016 में केवल 15.5 फीसदी मामलों में सजा मिली और 2020 में 20.4 फीसदी मामलों में सजा दी गई।
विज्ञापन
विज्ञापन


नफरत वाली बयानबाजी पर यह है सजा का प्रावधान
देश में भड़काऊ भाषण देने पर आईपीसी की धारा 153ए और 153 एए के तहत केस दर्ज किया जाता है। कई मामलों में धारा 505 भी जोड़ी जाती है। यह धारा 153 ए कहती है, 'धर्म, जाति, जन्म स्थान, भाषा आदि के आधार पर दो समूहों के बीच दुश्मनी को बढ़ावा देना और सौहार्द्र बिगाड़ने पर 3 साल की कैद या जुर्माना या दोनों की सजा हो सकती है। ये धारा आगे कहती है,'अगर किसी धार्मिक स्थल या सभा में ऐसा किया जाता है तो 5 साल की कैद की सजा का प्रावधान है। धारा 505 में के तहत भड़काऊ बयान देना अपराध है। धारा 505(1) के तहत, अगर एक समुदाय को दूसरे समुदाय के खिलाफ अपराध करने के लिए उकसाया जाता है और शांति भंग होती है तो ऐसे में 3 साल की कैद की सजा का प्रावधान है। वहीं, 505(2) में प्रावधान है कि दो वर्गों के बीच दुश्मनी, घृणा या द्वेष पैदा करने वाले बयान देना अपराध है। इसकी उपधारा (3) में प्रावधान है कि अगर ये काम धार्मिक स्थल या धार्मिक समारोह में होता है तो 5 साल की कैद हो सकती है।

सरकार जुटी कानून लाने में
इस बीच देश में हेट स्पीच के बढ़ते मामलों को देखते हुए केंद्र सरकार अब सख्त नजर आ रही है। सरकार जल्दी ही हेट स्पीच को लेकर सख्त कानून लाने को लेकर विचार कर रही है। इस कानून के तहत हेट स्पीच की परिभाषा तय की जाएगी। फिल्हाल कानून का ड्राफ्ट तैयार किया जा रहा है। इस कानून में सिर्फ हिंसा फैलाने वाला कंटेंट ही नहीं बल्कि झूठ फैलाने और आक्रामक विचार रखने वाले भी इस कानून के दायरे में आने वाले हैं। सरकार बहुत दिनों से इस मामले पर विचार कर रही थी लेकिन अब ज्यादा समय न लेते हुए इसका ड्राफ्ट तैयार किया जा रहा है और हो सकता है कि मानसून सत्र में इस कानून को लेकर संसद में बहस देखने को मिल जाए।


विधि आयोग ने हेटस्पीच पर अपने परामर्श पत्र में साफ किया है कि यह जरूरी नहीं कि सिर्फ हिंसा फैलाने वाली स्पीच को हेटस्पीच माना जाए, इंटरनेट पर पहचान छिपाकर झूठ और आक्रामक विचार आसानी से फैलाए जा रहे हैं, ऐसे में भेदभाव बढ़ाने वाली और नस्ली भाषा को भी हेटस्पीच के दायरे में रखा जाना चाहिए, इससे सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स के खिलाफ कार्रवाई का रास्ता खुलेगा, हेट स्पीच की परिभाषा साफ होने के बाद सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म यूजर्स द्वारा फैलाई गईं फेक न्यूज़ या नफरत भरी बातों से पल्ला नहीं झाड़ सकेंगी, सोशल प्लेटफॉर्म के जरिए भ्रामक फैलाई जाती हैं अब इनके खिलाफ सख्त कानून बनने से कानूनी कार्रवाई का रास्ता खुल जाएगा।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News apps, iOS Hindi News apps और Amarujala Hindi News apps अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed