महाराष्ट्रः बिखरी और लडखड़ाती कांग्रेस क्या पहले ही हथियार डाल चुकी है?

विनोद अग्निहोत्री, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: संजीव कुमार झा Updated Wed, 16 Oct 2019 06:26 AM IST
Has the scattered and stray Congress already laid down its arms
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महाराष्ट्र विधानसभा में तीन दर्जन विधायक भेजने वाली मुंबई में अगर एक कोने से दूसरे कोने तक घूम आइए तो एसा लगेगा कि शायद यहां सिर्फ भाजपा शिवसेना गठबंधन अकेला चुनाव लड़ रहा है। मुंबई हवाई अड्डे से दक्षिण मुंबई जाइए या दक्षिण मुंबई से पूरा शहर लांघते हुए उप नगर ठाणे तक जाने पर सडकों चौराहों पर सिर्फ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री देंवेंद्र फडणनवीस के फोटो वाले होर्डिंग दिखाई देंगे।
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कहीं कहीं उद्धव ठाकरे के फोटो वाले शिवसेना के होर्डिंग भी मिल जाएंगे, लेकिन कांग्रेस और राष्ट्रवादी कांग्रेस के बैनर पोस्टर होर्डिंग खोजने पर भी शायद ही दिखाई दें।जबकि महज छह महीने पहले हुए लोकसभा चुनावों में कांग्रेस एनसीपी गठबंधन भले ही शहर की सभी छह लोकसभा सीटें हार गया हो, लेकिन चुनाव प्रचार के दौरान वह भाजपा शिवसेना गठबंधन को कड़ी टक्कर दे रहा था।

आदित्य ठाकरे-देवेंद्र फडणवीस-उद्धव ठाकरे (फाइल फोटो)
आदित्य ठाकरे-देवेंद्र फडणवीस-उद्धव ठाकरे (फाइल फोटो) - फोटो : PTI
महज छह महीने में इतना फर्क कैसे पड़ गया। इस सवाल का जवाब वरिष्ठ राजनीतिक विश्लेषक अनुराग चतुर्वेदी देते हैं। चतुर्वेदी कहते हैं कि लोकसभा चुनावों के बाद जिस तरह राष्ट्रीय स्तर पर कांग्रेस नेतृत्व में जड़ता पलायनवाद और दिशाहीनता आई उसने मुंबई और महाराष्ट्र में नेताओं और कार्यकर्ताओं में बेहद निराशा पैदा की।

न सिर्फ उनका मनोबल टूटा बल्कि कई ने दल बदल किया तो कई घर बैठ गए।रही सही कसर कांग्रेस के टिकट बंटवारे ने पूरी कर दी। जिस तरह कांग्रेस ने मुंबई में बेहद अक्षम और जनाधार विहीन लोगों को मैदान में उतारा है,उससे जमीनी कार्यकर्ताओं में बेहद क्षोभ है।

फिर जो उम्मीदवार चुनाव लड़ रहे हैं वो चुनावों में पैसा भी नहीं खर्च कर रहे हैं, क्योंकि एक तो पार्टी की तरफ से भी उन्हें कोई ज्यादा आर्थिक मदद नहीं मिली है दूसरे चुनाव में जीत की घटती संभावनाएं भी उन्हें पैसा खर्च करने रोक रही हैं।

वहीं दूसरी तरफ भाजपा के पास प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की लोकप्रियता, मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणनवीस की छवि और गृह मंत्री और भाजपा अध्यक्ष अमित शाह की रणनीति है जिसने उसके नेताओं और कार्यकर्ताओं में ऊर्जा भर रखी है।

लोकसभा चुनावों के बाद भाजपा कार्यकर्ताओं का जो मनोबल आसमान छू रहा था, वो अब भी बरकरार है।दिल्ली से चुनाव ड्यूटी पर मुंबई में डेरा डाले हुए भाजपा उपाध्यक्ष शैलेश सिंह कहते हैं कि पूरा चुनाव एकतरफा है। विपक्ष कहीं मैदान में है ही नहीं।

भाजपा नेता दावा करते हैं कि भाजपा शिवसेना गठबंधन कम से कम विधानसभा की कुल 288 सीटों में सवा दो सौ सीटें जीतेगा।वहीं कांग्रेस नेता पूछने पर कहते हैं कि हमारा गठबंधन अच्छा लड रहा है और पहले से बेहतर नतीजे होंगे। लेकिन जीत कर सरकार बनाने का दावा कांग्रेस एनसीपी के नेता पूरी दमखम के साथ नहीं कर पाते हैं।

उत्तर प्रदेश से पार्टी की चुनाव ड्यूटी पर मुंबई आई महिला कांग्रेस के महासचिव शमीना शफीक कहती हैं कि कांग्रेस एनसीपी गठबंधन के उम्मीदवार हर जगह भाजपा शिवसेना को कड़ी टक्कर दे रहे हैं।

शमीना मानती हैं कि संसाधनों और प्रचार में भाजपा शिवसेना उनसे कहीं आगे हैं, लेकिन वह कहती हैं कि इसके बावजूद आर्थिक बदहाली और मंदी को लेकर लोगों में जो गुस्सा है वह मतदान के नतीजों में जरूर सामने आएगा। लेकिन कांग्रेस एनसीपी गठबंधन कितनी सीटें जीतेगा इसका आकलन कांग्रेसी नेताओं के पास नहीं है।

राहुल गांधी (फाइल फोटो)
राहुल गांधी (फाइल फोटो)
भाजपा में जहां तमाम गुटबाजी और अंदरूनी असंतोष के बावजूद एक बड़ी एकजुटता दिखती है।वहीं कांग्रेस में एक तरफ कृपाशंकर सिंह, नारायण राणे जैसे कई नेताओं ने पाला बदल लिया है तो दूसरी तरफ संजय निरुपम, मिलिंद देवड़ा जैसे नेता खुलेआम पार्टी के खिलाफ बयान दे रहे हैं। वहीं मुंबई कांग्रेस का मौजूदा नेतृत्व कार्यकर्ताओं में कोई जोश नहीं भर पा रहा है।

हालाकि राहुल गांधी ने मुंबई में और राज्य में कुछ चुनाव सभाओं को संबोधित किया है, लेकिन एक तो राहुल के भाषण में वही लोकसभा चुनाव वाली सुर ताल और लय है जिसे जनता नकार चुकी है, दूसरे जिस तरह उन्होंने पार्टी अध्यक्ष पद छोड़ा उससे उनके समर्थकों में बेहद मायूसी है।

इस बात की ताईद नाम न छापने की शर्त पर मुंबई कांग्रेस के एक पदाधिकारी करते हैं। इस पदाधिकारी के मुताबिक विधानसभा चुनाव की इस जंग में लगता है हमने जंग शुरु होने से पहले ही हथियार डाल दिए हैं, अब कोई चमत्कारी ही पार्टी का बेड़ा पार लगा सकता है।
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